भारत में माता-पिता की संपत्ति को लेकर भाई-बहनों के बीच झगड़े आम हैं। कई परिवारों में विरासत के बंटवारे ने रिश्ते तोड़ दिए हैं। लेकिन अमेरिका में स्थिति बिल्कुल अलग है। वहां रहने वाली एक भारतीय महिला ने एक वीडियो में बताया कि अमेरिकी माता-पिता अपनी करोड़ों की संपत्ति बच्चों को क्यों नहीं सौंपते और युवाओं की सोच कितनी अलग है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @krishna_in_america नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इसमें अमेरिका में रह रही भारतीय महिला बड़े-बड़े घरों का जिक्र करते हुए बताती हैं कि वहां आम परिवारों के पास भी भारत के अमीरों से बड़े घर होते हैं। लेकिन बुढ़ापे में ये घर बच्चों को विरासत में नहीं मिलते। ज्यादातर लोग अपनी प्रॉपर्टी बेच देते हैं और उससे मिले पैसे अपने बाकी जीवन, इलाज और रोजमर्रा के खर्चों के लिए रख लेते हैं। कुछ लोग संपत्ति चैरिटी या सामाजिक संस्थाओं को भी दे देते हैं।
’18 की उम्र के बाद युवा इंडिपेंडेंट हो जाते हैं’
अमेरिकी संस्कृति में वंश आगे बढ़ाने से ज्यादा खुद के जीवन और भविष्य की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है। बच्चे 18 साल के बाद स्वतंत्र हो जाते हैं। वे अपना करियर खुद चुनते हैं और माता-पिता भी ज्यादा दखल नहीं देते। रिश्ता भावनात्मक तो रहता है, लेकिन आर्थिक निर्भरता नहीं होती। बच्चे धीरे-धीरे अपना खर्च खुद संभालने लगते हैं। शुरुआती मदद तो मिलती है, लेकिन पूरी जिंदगी माता-पिता की संपत्ति पर निर्भर रहने की स्थिति नहीं बनती। इसी वजह से संपत्ति के बंटवारे को लेकर विवाद बहुत कम होते हैं।
भारत के बारे में
ऐसा माना जाता है कि, भारत में संयुक्त परिवार की परंपरा रही है। शादी के बाद भी कई बच्चे माता-पिता के साथ रहते हैं। इससे भावनात्मक सहारा मिलता है, लेकिन जगह और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की कमी के कारण अब कई परिवार अलग हो रहे हैं। इसके बाद संपत्ति को लेकर झगड़े शुरू हो जाते हैं। कई बार मामला कोर्ट तक पहुंच जाता है। अमेरिका में यह संस्कृति अलग है। वहां युवा स्वावलंबी बनने पर जोर देते हैं। माता-पिता भी खुद आर्थिक रूप से मजबूत रहना पसंद करते हैं, ताकि बच्चों पर बोझ न बने।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
वीडियो को एक लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है। सोशल मीडिया पर लोग अपनी राय दे रहे हैं।
एक यूजर ने लिखा, “माता-पिता और बच्चों दोनों का स्वावलंबी होना अच्छा है। इससे दोनों स्वतंत्र निर्णय ले सकते हैं।”
दूसरे ने कहा कि घर तो विरासत होना चाहिए, लेकिन कुछ फैसले भावना से भी लिए जाते हैं। कई लोगों ने इसे सकारात्मक बताया कि बुढ़ापे में माता-पिता बच्चों पर निर्भर न रहें। कुछ ने भारतीय संस्कृति की तुलना में इसे ठंडा रिश्ता भी करार दिया।
यह कहानी दो अलग-अलग सामाजिक व्यवस्थाओं को सामने लाती है। भारत में परिवार और विरासत को गहराई से जोड़ा जाता है, जबकि अमेरिका में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता मिलती है।
गौरतलब है कि, इससे पहले एक विदेशी महिला ने इससे पहले अमेरिका को भारत से सीखने की सलाह दी थी।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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