पीएम मोदी के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर 14 अप्रैल 2024 को अपलोड किया गया इस भाषण का पूरा वीडियो खोजा गया। वीडियो में करीब 28 मिनट 22 सेकंड पर पीएम मोदी कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते दिख रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया गया कि पीएम मोदी ने देश से गरीबी को एक झटके में खत्म करने की बात कही है। इस वीडियो को कई लोग शेयर कर रहे हैं और इस पर तरह-तरह के कमेंट्स आ रहे हैं। लेकिन क्या पीएम मोदी ने सच में ऐसा कहा है? आइए फैक्ट चेक करते हैं।
पीटीआई फैक्ट चेक डेस्क की जांच में सामने आया कि वायरल वीडियो को एडिट किया गया है। असल वीडियो में पीएम मोदी खुद एक झटके में गरीबी खत्म करने का दावा नहीं कर रहे थे, बल्कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कथित बयान का जिक्र करते हुए उन पर निशाना साधा। 9 सितंबर को एक्स पर एक यूजर ने यह वीडियो शेयर किया था। पोस्ट में ऐसा दिखाया गया कि पीएम मोदी देश की गरीबी को एक झटके में खत्म करने की बात कर रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद इसकी पड़ताल की गई।
रिवर्स इमेज सर्च में क्या मिला
जांच के दौरान वीडियो के अलग-अलग हिस्सों की तस्वीरें निकालकर उनकी रिवर्स इमेज सर्च की गई। इससे पता चला कि इसी वीडियो को मिलते-जुलते दावों के साथ दूसरे सोशल मीडिया अकाउंट्स से भी शेयर किया गया था। जांच में अप्रैल 2024 की एक खबर मिली। इसमें मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में लोकसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी की चुनावी सभा का जिक्र था। वायरल वीडियो का दृश्य और पीएम मोदी के कपड़े भी इसी कार्यक्रम से मिलते पाए गए।
2024 में पीएम मोदी का दिया बयान
पीएम मोदी के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर 14 अप्रैल 2024 को अपलोड किया गया इस भाषण का पूरा वीडियो खोजा गया। वीडियो में करीब 28 मिनट 22 सेकंड पर पीएम मोदी कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उनके कथित बयान का जिक्र करते हैं। पीएम मोदी कहते हैं कि कांग्रेस के राजकुमार ने दावा किया कि वह देश की गरीबी को एक झटके में खत्म कर देंगे। इसके बाद वह इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि क्या गरीबी को वास्तव में एक झटके में खत्म किया जा सकता है। वह इसे गरीबों का मजाक और उनका अपमान बताते हुए कांग्रेस पर तंज कसते हैं।
फैक्ट चेक करना है जरूरी
वायरल वीडियो में पीएम मोदी के भाषण का वह हिस्सा हटा दिया गया, जिसमें वह राहुल गांधी के कथित बयान का हवाला दे रहे थे। काट-छांट के बाद वीडियो को इस तरह पेश किया गया कि मानो पीएम मोदी खुद गरीबी खत्म करने का दावा कर रहे हों। जांच के आधार पर वायरल दावे को गलत पाया गया।