करोड़ों का दान और फिर भी ताने: ‘विदेश में $10 मिलियन क्यों लुटाए?’ सवाल पूछने वाले ट्रोल्स को MrBeast ने दिया करारा जवाब – mrbeast ghana village project reply to critics greenville charity


मशहूर यूट्यूबर MrBeast ने घाना में बाल मजदूरी खत्म करने के लिए करीब 83 करोड़ रुपये खर्च कर एक पूरा गांव बसाया, जिस पर कुछ लोगों ने उन्हें अपना पैसा विदेश में लुटाने का ताना मारा। इसके जवाब में MrBeast ने आलोचकों को आईना दिखाते हुए कहा जवाब दिया है, जो वायरल हो रहा है।

MrBeast ने दिया करारा जवाब
दुनिया के सबसे पॉपुलर यूट्यूबर और सोशल वर्कर जिमी डोनाल्डसन को इंटरनेट की दुनिया MrBeast के नाम से पहचानती है। हाल ही वो अपने एक बड़े चैरिटी प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने अफ्रीका के घाना में बाल मजदूरी खत्म करने के लिए 10 मिलियन डॉलर (करीब 83 करोड़ रुपये) खर्च करके एक पूरा गांव बसा दिया। हालांकि, इंटरनेट पर उनकी तारीफ करने के बजाय कुछ लोगों ने उन्हें इस बात के लिए ताने मारने शुरू कर दिए कि उन्होंने यह पैसा अपने होमटाउन (अमेरिका के ग्रीनविले) में क्यों नहीं खर्च किया। अब मिस्टर बीस्ट ने इन आलोचकों को आंकड़ों के साथ करारा जवाब दिया है।

घाना में 10 मिलियन डॉलर का ‘अब्ना डकवा गांव’

मिस्टर बीस्ट ने हाल ही में घाना के ईस्टर्न रीजन में ‘अब्ना डकवा गांव’ तैयार किया है। यह प्रोजेक्ट खास तौर पर उन समुदायों के लिए है जो कोको की खेती से जुड़े हैं और जहां बाल मजदूरी एक बहुत बड़ी समस्या है। इस 10 मिलियन डॉलर के प्रोजेक्ट में शामिल हैं

  • 300 से अधिक छात्रों के लिए एक स्कूल
  • शिक्षकों के लिए 10 घर और एक मेडिकल क्लिनिक
  • एक कम्युनिटी मार्केटप्लेस और साफ पानी का इंफ्रास्ट्रक्चर
  • सोलर पावर सिस्टम और आधुनिक कृषि सुविधाएं
  • द रॉकफेलर फाउंडेशन के सहयोग से 5 साल तक छात्रों के लिए मुफ्त भोजन की व्यवस्था।

आलोचना और MrBeast का जवाब

घाना प्रोजेक्ट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही X पर एक यूजर ने सवाल उठाया। यूजर ने अमेरिका के ग्रीनविले शहर की गरीबी दर का हवाला देते हुए पूछा कि मिस्टर बीस्ट इतनी बड़ी रकम विदेश में क्यों खर्च कर रहे हैं, जबकि वह खुद ग्रीनविले में पले-बढ़े हैं।
इस पर मिस्टर बीस्ट ने अपने संगठन ‘बीस्ट फिलैंथ्रोपी’ के स्थानीय कामों का हवाला देते हुए करारा जवाब दिया। उन्होंने लिखा, “मैं वाकई अपने शहर के लिए काम करता हूं। मेरा एक 501c नॉन-प्रॉफिट संगठन है और हमने अमेरिका में करोड़ों लोगों को भोजन मुहैया कराया है, जिनमें से कई मेरे अपने स्थानीय समुदाय के हैं। अगर मैं उन सभी चैरिटी कामों की लिस्ट बनाने लगूं जो हम स्थानीय स्तर पर करते हैं, तो वे सचमुच इस एक ट्वीट में फिट नहीं आएंगे।”

ग्रीनविले में बांटे 4.8 करोड़ मील्स

आंकड़े भी मिस्टर बीस्ट के दावे की गवाही देते हैं। उनकी ‘बीस्ट पैंट्री’ के जरिए 2020 के अंत से अब तक 4.84 करोड़ से ज्यादा मील्स बांटे जा चुके हैं और लगभग 1.58 करोड़ लोगों की मदद की गई है। मौजूदा समय में उनका संगठन ग्रीनविले और ईस्टर्न नॉर्थ कैरोलिना के 20 से अधिक समुदायों में हर महीने लगभग 80,000 जरूरतमंदों को भोजन मुहैया करा रहा है।

घाना को ही क्यों चुना?

घाना और कोटे डी आइवर (Côte d’Ivoire) के कोको उत्पादक क्षेत्रों में बाल मजदूरी एक गंभीर समस्या है। गरीबी, कोको की गिरती कीमतों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण लाखों बच्चे खतरनाक कृषि कार्यों में धकेल दिए जाते हैं। मिस्टर बीस्ट के इस 5 वर्षीय प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य 11 कोको-खेती वाले समुदायों में शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक मदद पहुंचाना है ताकि बच्चों को मजदूरी से निकालकर बेहतर भविष्य दिया जा सके।

लेखक के बारे मेंराम किशोर राम किशोर, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 11 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में नवभारतटाइम्स.कॉम में असिस्टेंट एडिटर के रूप में वायरल सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। इंटरनेट कल्चर, सोशल मीडिया ट्रेंड्स और पाठकों की बदलती रुचियों की गहरी समझ के साथ राम किशोर ऐसे विषयों पर काम करते हैं, जो न सिर्फ तेजी से वायरल होते हैं, बल्कि समाज, संस्कृति और आम जीवन से भी गहराई से जुड़े होते हैं।

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नवभारतटाइम्स.कॉम से पहले राम किशोर ने ScoopWhoop में सीनियर हिंदी स्टाफ राइटर के रूप में Gazabpost जैसे हिंदी वायरल प्लेटफॉर्म की लॉन्चिंग में अहम भूमिका निभाई, जहां उन्होंने मिलेनियल्स के लिए लिस्टिकल्स, ओरिजिनल स्टोरीज, इंटरव्यू और वीडियो कंटेंट तैयार किया। इसके अलावा Filmipop Hindi में सीनियर कॉपी एडिटर के तौर पर उन्होंने एंटरटेनमेंट कंटेंट के लिए एक अलग और प्रभावशाली स्टोरीटेलिंग अप्रोच विकसित की। Times Internet में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में उन्होंने NBT Viral Adda की शुरुआत और संचालन की जिम्मेदारी संभाली।

अपने करियर की शुरुआत राम किशोर ने प्रिंट मीडिया से की। दैनिक हरिभूमि में ट्रेनी सब-एडिटर के रूप में काम करते हुए उन्होंने डेस्क ऑपरेशंस, पेज-मेकिंग और 2014 हरियाणा विधानसभा चुनाव जैसे महत्वपूर्ण कवरेज का हिस्सा रहकर ग्राउंड-लेवल जर्नलिज्म की मजबूत नींव तैयार की।

शैक्षणिक रूप से राम किशोर ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC), नई दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इसके अलावा उन्होंने गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स डिग्री और दिल्ली विश्वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस में बीए (ऑनर्स) की पढ़ाई की है। उनकी यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें खबरों को 5W और 1H के फ्रेमवर्क में संतुलित और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने में सक्षम बनाती है।

बतौर पत्रकार राम किशोर जिम्मेदार और संतुलित जर्नलिज्म में विश्वास रखते हैं। उनका मानना है कि वायरल जर्नलिज्म का उद्देश्य केवल व्यूज हासिल करना नहीं, बल्कि ऐसी कहानियां सामने लाना है, जिनसे पाठक खुद को जोड़ सकें और अपने समय के ट्रेंड्स को बेहतर ढंग से समझ सकें।और पढ़ें



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