गोदावरी बायोरिफाइनरीज को जापान के बाद वायरल संक्रमण के उपचार वाले यौगिकों पर चीन में पेटेंट


मुंबई: गोदावरी बायोरिफाइनरीज लिमिटेड ने एंटीवायरल रिसर्च के क्षेत्र में अपनी बौद्धिक संपदा (IP) का विस्तार किया है। कंपनी ने लाइफ साइंसेज पोर्टफोलियो को मजबूत करते हुए चीन में एक महत्वपूर्ण पेटेंट हासिल किया है। कंपनी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जापान के बाद अब चीन के नेशनल इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी एडमिनिस्ट्रेशन ने गोदावरी बायोरिफाइनरीज को “Use of Compounds for Treating Viral Infections” नामक आविष्कार के लिए पेटेंट प्रदान किया है।

एंटीवायरल दवाओं के विकास में ऐसे तरीकों पर भी शोध किया जाता है, जिनमें वायरल संक्रमण के दौरान वायरस द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले होस्ट-सेल मैकेनिज्म को लक्षित किया जाता है। इसके अलावा सीधे वायरस पर प्रभाव डालने वाले तरीकों पर भी काम किया जाता है। चीन में मिले इस पेटेंट में ऐसे यौगिकों को शामिल किया गया है, जो Vacuolar ATPase (V-ATPase) को रोकते हैं। V-ATPase एक सेलुलर तंत्र है, जिसका उपयोग कुछ वायरस संक्रमण के दौरान करते हैं। पेटेंट में इन यौगिकों के वायरल संक्रमण के उपचार के लिए दवाओं में उपयोग को भी शामिल किया गया है।इससे पहले इसी आविष्कार के लिए कंपनी को जापान में भी पेटेंट मिल चुका है। चीन में पेटेंट मिलने के साथ इस एंटीवायरल यौगिक वर्ग के लिए कंपनी की बौद्धिक संपदा सुरक्षा का दायरा एक और महत्वपूर्ण देश तक बढ़ गया है।

मानव स्वास्थ्य से जुड़ी रिसर्च पर फोकस

गोदावरी बायोरिफाइनरीज लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक समीर सोमैया ने कहा कि, यह पेटेंट V-ATPase और वायरल संक्रमण से निपटने में इसके संभावित उपयोगों पर कंपनी के शोध में एक और महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि, कंपनी का फोकस यह समझने पर है कि ये यौगिक मानव स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियों के समाधान विकसित करने में किस तरह योगदान दे सकते हैं। चीन में पेटेंट सुरक्षा मिलने से इस क्षेत्र में कंपनी की बौद्धिक संपदा मजबूत हुई है और विज्ञान आधारित रिसर्च के जरिए नए अणुओं (मॉलिक्यूल्स) के विकास के प्रयासों को समर्थन मिलेगा। सोमैया ने कहा कि, मानव स्वास्थ्य पर सार्थक प्रभाव डालने की क्षमता रखने वाले लाइफ साइंसेज रिसर्च को आगे बढ़ाना कंपनी की दीर्घकालिक प्राथमिकता बनी हुई है।

चार वैज्ञानिक पेटेंट के आविष्कारक

इस पेटेंट में डॉ. संगीता श्रीवास्तव, डॉ. संदीप गावड़े, डॉ. मैथिली अठावले और डॉ. प्रशांत खरखर को आविष्कारक के रूप में नामित किया गया है। डॉ. प्रशांत एस. खरखर, इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (ICT), मुंबई में मेडिसिनल केमिस्ट्री के प्रोफेसर और डीन (स्टूडेंट्स एंड एल्युमनी अफेयर्स) हैं। कंपनी के अनुसार, शोध यात्रा में उनका मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा है, विशेष रूप से V-ATPase को रोकने वाले यौगिकों और वायरल संक्रमण में उनके संभावित उपयोगों के अध्ययन में।





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