मणिपुर में हिंसा के बीच सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार की नई चुनौती सामने आई, फैक्ट चेक में कई वायरल दावे निकले गलत


जेएनएन, कोलकाता। मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय तनाव और हिंसा के बीच सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार की एक नई चुनौती सामने आई है।

डिजिटल जांच में विदेशी संपर्क वाले कुछ सोशल मीडिया खातों पर मणिपुर से जुड़ी भ्रामक सूचनाएं और विकृत कथाएं फैलाने के आरोप सामने आए हैं। फर्जी पहचान, पुराने वीडियो और भ्रामक कैप्शन के जरिये स्थानीय घटनाओं को अलग रूप में पेश किए जाने की बात कही गई है।

फरवरी 2026 में डिजिटल फोरेंसिक, रिसर्च एंड एनालिटिक्स सेंटर (डीएफआरएसी) ने पांच एक्स खातों को लेकर जांच रिपोर्ट प्रकाशित की थी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि इन खातों से मणिपुर से जुड़ी भ्रामक कथाओं का प्रसार किया जा रहा था। जांच के दौरान इनमें से चार खातों को भारत में रोक दिए जाने की बात भी सामने आई थी।

क्षेत्रीय नाम, स्थानीय तस्वीरों और स्थानीय भाषा के इस्तेमाल से किसी बाहरी खाते को स्थानीय पत्रकार, कार्यकर्ता या निवासी की तरह प्रस्तुत किए जाने की आशंका जताई गई।

अगस्त में भी डीएफआरएसी ने कुछ अन्य खातों को पूर्वोत्तर में अस्थिरता से संबंधित व्यापक इंटरनेट मीडिया नेटवर्क से जोड़ने का दावा किया। एक अन्य मामले में मणिपुर में भारतीय सेना द्वारा महिलाओं पर कथित अत्याचार के प्रमाण के रूप में प्रसारित वीडियो की जांच में पता चला कि वह मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध का पुराना वीडियो था।

18 फरवरी को पीआईबी फैक्ट चेक ने मणिपुर के ‘स्वतंत्रता सेनानियों’ द्वारा भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर पर कब्जे के दावे को भी गलत बताया था।

पुराने वीडियो से फैलाया गया भ्रामक दावा

गलत सूचना फैलाने में पुराने या किसी अन्य स्थान के वीडियो का इस्तेमाल भी बड़ी चुनौती है। ऐसी सामग्री संवेदनशील माहौल में तेजी से भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा कर सकती है। एक बार कोई वीडियो या पोस्ट वाट्सऐप, फेसबुक, एक्स और लघु वीडियो मंचों पर व्यापक रूप से प्रसारित हो जाए तो बाद में उसका सही संदर्भ सामने आने के बावजूद गलत धारणा को दूर करना कठिन होता है।

विदेशी दुष्प्रचार की जांच के साथ स्थानीय कारणों पर भी ध्यान जरूरी

जानकारों का कहना है कि मणिपुर के संकट को केवल बाहरी दुष्प्रचार के नजरिये से देखना भी उचित नहीं होगा।

जातीय अविश्वास, विस्थापन, जमीन और पहचान से जुड़े विवाद, राजनीतिक मतभेद, सशस्त्र समूहों की गतिविधियां तथा प्रशासनिक विफलता के आरोप इस संकट के स्थानीय कारणों में शामिल रहे हैं। इसलिए गलत सूचना और विदेशी प्रभाव की जांच के साथ इन वास्तविक समस्याओं का समाधान भी जरूरी है।

अधिकारियों के सामने चुनौती यह है कि विदेशी प्रभाव अभियानों की जांच करते हुए वैध राजनीतिक आलोचना, स्वतंत्र पत्रकारिता और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति प्रभावित न हो। केवल व्यापक सेंसरशिप पर निर्भर रहने के बजाय सरकारी एजेंसियों को सत्यापित सूचना तेजी से उपलब्ध कराने, तथ्यों और अनिश्चितताओं को स्पष्ट करने तथा गलतियों को खुले तौर पर सुधारने पर जोर देना होगा।

मणिपुर जैसे बहुभाषी और संवेदनशील राज्य में मैतेई, कुकी-जो, अंग्रेजी तथा अन्य स्थानीय भाषाओं में तथ्य-जांच की व्यवस्था मजबूत करना भी महत्वपूर्ण है। इंटरनेट मीडिया कंपनियों से खातों के स्थान, समन्वित गतिविधियों और कृत्रिम रूप से तैयार या बदली गई सामग्री के बारे में अधिक पारदर्शिता की अपेक्षा की जा सकती है।

आम नागरिक भी वीडियो की तारीख और स्थान की जांच, संदिग्ध खातों की पृष्ठभूमि देखने और किसी दावे को साझा करने से पहले विश्वसनीय समाचार स्रोतों से पुष्टि करके भूमिका निभा सकते हैं।



Source link

Related posts

कंधे पर बस्ता और गले में थरमस…बचपन के दोस्तों का स्कूल रीयूनियन मोमेंट वायरल, दशकों बाद यादें हुईं ताजा

जंगल में टाइगर के बच्चों की ‘पूल पार्टी’, मां किनारे बैठकर रखती रही नजर, वीडियो वायरल – tiger cubs pool party with mother in tadoba video goes viral tstf

Kanpur News: जेड स्क्वायर मॉल में मारपीट का वीडियो वायरल, Kanpur Hindi News