मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (CSMIA) के टर्मिनल 2 (T2) में टचलेस वॉशरूम फीचर्स चर्चा में आ गए हैं। सेंसर वाले नल और टच-फ्री दरवाजे यात्रियों को आकर्षित कर रहे हैं। ये सुविधाएं हाईजीन बढ़ाने और सतहों को छूने की जरूरत कम करने के लिए डिजाइन की गई हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोग पूछ रहे हैं कि ये स्मार्ट सिस्टम कैसे काम करते हैं।
स्मार्ट नल कैसे काम करते हैं?
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @the.kaur_ नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में सेंसर-ऑपरेटेड टैप्स दिखाए गए हैं जिनमें मोशन डिटेक्टर लगे होते हैं। जब आप हाथ नल के नीचे लाते हैं, तो सेंसर डिटेक्ट करता है और पानी अपने आप बहने लगता है। हाथ हटाने पर पानी तुरंत बंद हो जाता है। पारंपरिक नल की तरह हैंडल घुमाने या बटन दबाने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे साझा सतहों से संपर्क कम होता है और पानी की बर्बादी भी रुकती है, क्योंकि कोई भूलकर नल खुला छोड़ दे तो पानी बहता नहीं रहता।
टच-फ्री दरवाजे का सिस्टम
टच-फ्री डोर सिस्टम में मोशन सेंसर या अन्य मैकेनिज्म का इस्तेमाल होता है। कुछ दरवाजे सेंसर से अपने आप खुल जाते हैं, जबकि कुछ को बिना हैंडल छुए ही खोला-बंद किया जा सकता है। एयरपोर्ट जैसे व्यस्त जगहों पर जहां दिनभर हजारों यात्री वॉशरूम इस्तेमाल करते हैं, ये फीचर खास उपयोगी हैं। इससे हैंडल जैसी अक्सर छुई जाने वाली सतहों से संपर्क कम होता है।
बड़े अपग्रेडेशन प्रोग्राम का हिस्सा
ये टचलेस सुविधाएं टर्मिनल 2 के बड़े वॉशरूम अपग्रेड प्रोग्राम का हिस्सा हैं। अप्रैल 2025 में मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AERA) को प्रस्ताव सौंपा था। इसमें 41 पैसेंजर वॉशरूम ब्लॉक्स के नवीनीकरण का जिक्र था। भारी इस्तेमाल से फिटिंग्स खराब हो गई थीं और प्लंबिंग में लीकेज जैसी समस्याएं थीं। स्मार्ट वॉशरूम टेक्नोलॉजी में टचलेस सिस्टम और स्मार्ट मिरर शामिल किए गए हैं। पानी बचाने के उपाय भी जुड़े हैं। CSMIA में वॉटरलेस यूरिनल्स, टैप एरेटर्स और फ्लो रिड्यूसर्स लगाए गए हैं। सेंसर नल सिर्फ जरूरत पड़ने पर पानी देते हैं। ट्रीटेड वेस्टवॉटर को फ्लशिंग, कूलिंग और लैंडस्केपिंग में रीसाइकिल किया जाता है।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं। कुछ लोग इसे मॉडर्न और हाईजीनिक कदम बता रहे हैं। लेकिन कई यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि सिर्फ टेक्नोलॉजी से सफाई नहीं सुधरेगी। सिविक सेंस की कमी और रखरखाव पर जोर दिया जा रहा है। कुछ ने कहा कि पहली बार इस्तेमाल करने वाले यात्री भ्रमित हो सकते हैं, इसलिए साफ निर्देश और साइनबोर्ड जरूरी हैं। लोगों का मानना है कि, टचलेस सिस्टम संपर्क कम करते हैं और पानी बचाते हैं, लेकिन नियमित सफाई, मरम्मत और यात्रियों के जिम्मेदार व्यवहार के बिना ये प्रभावी नहीं रहेंगे। वॉशरूम की सफलता टेक्नोलॉजी के साथ-साथ मेंटेनेंस और यूजर्स पर निर्भर करती है।
गौरतलब है कि, इससे पहले एक बेटी द्वारा पिता से एयरपोर्ट को लेकर पूछे गए सवाल का वीडियो काफी वायरल हुआ था।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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