डोसा… नाम सुनते ही सामने आती है पतली, कुरकुरी परत, साथ में सांभर और नारियल की चटनी. कभी डोसा एक सादा और हल्का नाश्ता माना जाता था, लेकिन अब यही डोसा सोशल मीडिया पर अपने अजीबोगरीब और नए अंदाज की वजह से वायरल होता रहता है. हाल ही में एक वायरल वीडियो ने 1995 से लेकर 2050 तक डोसे के इसी बदलते अंदाज को मजेदार तरीके से दिखाया है.
1995 के डोसे की तस्वीर काफी सीधी थी. तवे पर पतला डोसा, ऊपर थोड़ा सा घी और साथ में सांभर-चटनी. मसाला डोसा और प्लेन डोसा जैसे विकल्प पहले से ही लोगों के बीच लोकप्रिय थे. डोसे की खासियत सिर्फ उसका स्वाद नहीं, बल्कि उसका बैटर भी है. आमतौर पर चावल और उड़द दाल को भिगोकर पीसा जाता है और बैटर को फर्मेंट होने दिया जाता है. इसके बाद इसे गर्म तवे पर पतली परत में फैलाकर सेंका जाता है.
यानी डोसे की असली पहचान थी – कम चीजों में स्वाद.
फिर आया मसाला, बटर और एक्सपेरिमेंट का दौर. समय के साथ डोसा सिर्फ सादा नाश्ता नहीं रहा. मसाला डोसा, रवा डोसा, पेपर डोसा, सेट डोसा और कई दूसरी किस्में लोगों के बीच लोकप्रिय हुईं. फिर इसमें पनीर, चीज, चाइनीज सॉस और दूसरे फ्लेवर भी जुड़ने लगे. यानी डोसे ने अपनी पारंपरिक पहचान को बनाए रखते हुए नए स्वादों को भी अपनाना शुरू कर दिया. हाल के समय में खास तौर पर बेंगलुरु का बेन्ने डोसा भी चर्चा में आया है. इसमें मक्खन का इस्तेमाल काफी ज्यादा होता है और यह अब बेंगलुरु से बाहर दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों के रेस्टोरेंट्स तक पहुंच चुका है.
2025 में डोसा कितना बदल गया?
अब डोसा सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि सोशल मीडिया कंटेंट भी बन गया है. वायरल वीडियो में 1995 के डोसे पर थोड़ा घी दिखाया गया. फिर 2025 तक आते-आते घी की मात्रा इतनी बढ़ती दिखाई गई कि डोसा लगभग एक बड़े गिलास घी के साथ नजर आता है. इसके बाद वीडियो 2035 की कल्पना करता है, जहां डोसा एक बड़े बर्तन में भरे घी के बीच दिखाई देता है.
2050 में डोसा या घी का स्विमिंग पूल?
वीडियो के मुताबिक 2050 तक डोसे का हाल इतना “वायरल” हो जाता है कि पूरा स्विमिंग पूल घी से भरा दिखाई देता है और उसके अंदर कहीं डोसा मौजूद है. यह असल भविष्यवाणी नहीं, बल्कि खाने में बढ़ते घी और “जितना ज्यादा, उतना अच्छा” वाले ट्रेंड पर बनाया गया मजेदार सोशल मीडिया कंटेंट है. इस वायरल वीडियो पर लोगों ने भी मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं. किसी ने अगले दौर में “बेन्ने स्कूबा घी पोडी मसाला डोसा” की कल्पना कर दी, तो कुछ लोगों ने ज्यादा घी वाले डोसे पर चिंता भी जताई.
सादे डोसे से वायरल डोसे तक का सफर
डोसे की कहानी असल में सिर्फ घी बढ़ने की कहानी नहीं है. यह बताती है कि भारतीय खाना समय के साथ कैसे बदलता है. एक तरफ लोग आज भी पारंपरिक प्लेन और मसाला डोसा पसंद करते हैं. दूसरी तरफ रेस्टोरेंट और सोशल मीडिया नए फ्लेवर, नए आकार और नए तरीके आजमा रहे हैं. यानी 1995 का डोसा जहां सादगी के लिए जाना जाता था, वहीं आज का डोसा एक्सपेरिमेंट और सोशल मीडिया ट्रेंड का हिस्सा बन चुका है.