Home Viral‘बेटा स्कूल नहीं जाते हो…?’ कचरा बीनते बच्चे को देख DM ने रोकी गाड़ी, अफसरों से कहा- एडमिशन कराओ, वीडियो वायरल – purnia dm stops car child picking garbage school admission 19 second video lcla

‘बेटा स्कूल नहीं जाते हो…?’ कचरा बीनते बच्चे को देख DM ने रोकी गाड़ी, अफसरों से कहा- एडमिशन कराओ, वीडियो वायरल – purnia dm stops car child picking garbage school admission 19 second video lcla

by BollywoodNewsAndMovie


गाड़ी सड़क पर आगे बढ़ रही थी. पूर्णिया के डीएम अंशुल कुमार दालकोला चेकपोस्ट की तरफ जा रहे थे. सरकारी काम था, रास्ता तय था और काफिला अपनी रफ्तार से चल रहा था. तभी सड़क किनारे एक बच्चा दिखाई दिया. उसके हाथ में एक बड़ा सा बोरा था. वह सड़क किनारे कचरे में कुछ तलाश रहा था. DM ने गाड़ी रुकवाई. बच्चे को अपने पास बुलाया. और सवाल पूछा- बेटा, स्कूल नहीं जाते हो? बच्चे ने जवाब दिया- नहीं. बस, यहीं से कहानी बदल गई.

डीएम से बच्चे की इस बातचीत का एक वीडियो सामने आया है. एक तरफ सड़क किनारे बोरा लिए खड़ा बच्चा. दूसरी तरफ सरकारी गाड़ी में मौजूद अफसर. DM बच्चे से बात करते हैं. उसे पढ़ाई के लिए प्रेरित करते हैं. फिर अपने साथ मौजूद अधिकारी से कहते हैं कि बच्चे का स्कूल में एडमिशन कराया जाए. इसके बाद बच्चे के हाथ में बिस्किट का पैकेट भी दिया जाता है.

यहां देखें Video

इस बच्चे का नाम मोहम्मद इमरान है. वह पूर्णिया के बायसी थाना क्षेत्र का रहने वाला है. इमरान उस वक्त सड़क किनारे कचरा बीन रहा था. जिस उम्र में बच्चे स्कूल में पढ़ने जाते हैं, उसी उम्र में वह बोरा लेकर ऐसी चीजें तलाश रहा था, जिन्हें बेचकर कुछ पैसे मिल सकें. और शायद उसके लिए सड़क, कचरा और बोरा रोज की जिंदगी का हिस्सा बन चुके थे.

DM दालकोला चेकपोस्ट के निरीक्षण के लिए जा रहे थे. रास्ते में बच्चा दिखा. उन्होंने गाड़ी रुकवाई. बच्चे से बात की. और फिर उसी वक्त उसके स्कूल में दाखिले की व्यवस्था करने के निर्देश दिए. 

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अंशुल कुमार जब बाहर निकलते हैं तो उनकी गाड़ी में बिस्किट के पैकेट रहते हैं. रास्ते में बच्चे मिल गए तो उनसे बात करते हैं. बिस्किट देते हैं. पढ़ाई के लिए प्रेरित करते हैं. इसलिए इमरान को भी उस दिन बिस्किट मिला. बच्चा स्कूल नहीं जाता था. DM ने यह जाना. और फिर स्कूल भेजने की बात आगे बढ़ी.

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वीडियो छोटा है, लेकिन सवाल बड़ा है. कितने ऐसे बच्चे हैं जो स्कूल जाने की उम्र में कचरा बीन रहे हैं? कितने बच्चों के हाथ में किताब की जगह बोरा है? और कितने बच्चे इसलिए स्कूल नहीं पहुंच पाते, क्योंकि घर की जरूरतें उन्हें सड़क पर ले आती हैं? इमरान की कहानी इन सवालों का पूरा जवाब नहीं देती. लेकिन सड़क किनारे कचरा बीनते एक बच्चे की तस्वीर जरूर दिखाती है. और यह भी दिखाती है कि किसी अधिकारी की नजर उस तस्वीर पर पड़े तो क्या हो सकता है. 

फिलहाल प्रशासन की तरफ से बच्चे का स्कूल में एडमिशन कराने के निर्देश दिए गए हैं. जब इमरान स्कूल पहुंचेगा. उसके हाथ में बोरे की जगह किताब होगी. वह नियमित रूप से पढ़ पाएगा और पढ़ाई जारी रख सकेगा तो शायद उसकी जिंदगी की कहानी भी बदल सकती है. वीडियो सामने आने के बाद डीएम के इस व्यवहार की तारीफ की जा रही है. लोगों का कहना है कि अधिकारी का किसी बच्चे से रुककर बात करना और उसे पढ़ाई के लिए प्रेरित करना अपने आप में सकारात्मक पहल है. 

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