Home Box OfficeBox Office: ‘हनुमान अंश’ ने 60 दिनों में की 21,000% से अधिक की कमाई, ‘मिर्जापुर’ से आगे निकली ‘द वन’ – hanuman ansh 2026 box office collection day 60 vs the vvaan and mirzapur the movie monday business

Box Office: ‘हनुमान अंश’ ने 60 दिनों में की 21,000% से अधिक की कमाई, ‘मिर्जापुर’ से आगे निकली ‘द वन’ – hanuman ansh 2026 box office collection day 60 vs the vvaan and mirzapur the movie monday business

by BollywoodNewsAndMovie


नीम करोली बाबा की जिंदगी पर तैयार फिल्म ‘हनुमान अंश’ने 60वें दिन उससे भी अधिक कमाई है जितनी फिल्म ने 16वें दिन कमाई की थी। हालांकि, अब तक वर्ल्डवाइड इस फिल्म को 21 हजार पर्सेंट से अधिक का फायदा हो चुका है। वहीं ‘मिर्जापुर द मूवी’ की तुलना में ‘द वन’ ने सोमवार को बाजी मारी है।

Hanuman Ansh 2026 Box Office Collection Day 60
हनुमान अंश बॉक्स ऑफिस 60वां दिन, द वन और मिर्जापुर द मूवी की कमाई
नीम करोली बाबा की जिंदगी पर बुनी गई फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर जो भंवर पैदा किया उसे अब सभी जान चुके हैं। फिल्म महज 2 करोड़ की लागत से तैयार की गई थी, जिसके लिए न तो प्रमोशन ही हुआ और न ही कोई प्रेस शो। फिल्म चुपचाप रिलीज हुई और पहले तो इसे केवल 355 शोज़ मिले, जिससे ‘हनुमान अंश’ ने केवल 10 लाख रुपये की कमाई की। शुरुआती कमाई बेहद निराशाजनक रही लेकिन फिर आया कमाई के पैटर्न में भूचाल। अब इस फिल्म को रिलीज हुए 60 दिन यानी पूरे दो महीने गुजर चुके हैं। वहीं ‘मिर्जापुर द मूवी’को भी सिनेमाघरों में उतरे करीब 25 दिन बीत चुके हैं। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की ‘द वन’ 11 दिनों के बावजूद अपनी लागत नहीं वसूल पाई है।

यहां सबसे पहले बात करते हैं ‘हनुमान अंश‘ की। प्रसिद्ध संत नीम करोली बाबा के आध्यात्मिक सफर पर बेस्ड ये कहानी की शुरू होती है स्वतंत्रता से पहले के भारत के एक युवा लड़के लक्ष्मी नारायण के बचपन से जिसे प्यार से लक्ष्मण दास भी कहा गया है। छोटी उम्र में ही अपनी मां को खो देने का दुख वो संभाल नहीं पाते और मां की दुबारा पाने की आश और तलाश में घर से निकल जाते हैं। उन्हें ये पता है कि अगर उन्हें कहीं भगवान मिल जाएं तो उनकी मां उन्हें दोबारा मिल सकती हैं। उसकी यह तलाश उन्हें सैकड़ों मंदिरों, घने जंगलों, नदियों से लेकर अनगिनत गांवों तक ले जाती है और इसी के साथ-साथ उनका मौन, अनुशासन और कठिन तपस्या अंदर से उन्हें एक आकार दे रहा होता है। धीरे-धीरे उन्हें पता लगता है कि मानवता और दीन-दुखियों की सेवा ही सबसे बड़ा भगवान है।