Home Viralपंजाब का माहौल बिगाड़ने की साजिश! चितकारा और LPU में वायरल मैसेज की जांच में जुटी साइबर सैल और इंटेलिजेंस

पंजाब का माहौल बिगाड़ने की साजिश! चितकारा और LPU में वायरल मैसेज की जांच में जुटी साइबर सैल और इंटेलिजेंस

by BollywoodNewsAndMovie


रोहित कुमार, चंडीगढ़। चितकारा यूनिवर्सिटी में लड़की के गायब होने और अनहोनी से जुड़ी अफवाह के बाद पुलिस से टकराव हुआ तो अगले ही दिन लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में छात्रा से दुष्कर्म के आरोपों से जुड़ा मैसेज वायरल होने के बाद स्टूडेंट ने नेशनल हाईवे जाम कर दिया। अब इन दोनों घटनाओं ने पुलिस और इंटेलिजेंस एजेंसियों को एक दूसरे सवाल की तरफ मोड़ दिया है।

पुलिस जांच में जुटी है कि आखिर ऐसे मैसेज कौन तैयार कर रहा है और इन्हें इस तरह क्यों फैलाया जा रहा है कि स्टूडेंट सीधे सड़क पर उतर आएं? दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग हैं और अभी तक इन्हें जोड़ने वाला कोई ठोस तथ्य सामने नहीं आया है।

इसके बावजूद जांच एजेंसियां वायरल मैसेज के सोर्स और उसके प्रसार की कड़ी खंगाल रही हैं। साइबर सेल यह पता लगाने में जुटा है कि संदेश सबसे पहले किस अकाउंट, नंबर या ग्रुप से सामने आया और उसके बाद वह किन लोगों तक पहुंचा।

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मैसेज से ज्यादा अब उसकी टाइमिंग पर नजर

जांच का एक अहम पहलू मैसेज की टाइमिंग भी है। चितकारा में शुक्रवार को अफवाह फैलने के बाद कुछ ही समय में स्टूडेंट कैंपस में जुट गए। पुलिस पहुंची तो स्थिति टकराव तक पहुंच गई। एलपीयू में शनिवार तड़के दुष्कर्म से जुड़ा मैसेज वायरल हुआ और करीब चार बजे स्टूडेंट नेशनल हाईवे पर उतर गए।

यानी दोनों मामलों में इंटरनेट मीडिया पर सूचना फैलने और उसके बाद स्टूडेंट के सड़कों पर आने के बीच का घटनाक्रम जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण है। मैसेज किसने बनाया, सबसे पहले किसने भेजा और किसने उसे आगे बढ़ाया—इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।

स्टूडेंट की संवेदनशीलता निशाना पर!

जांच एजेंसियां इस पहलू को भी देख रही हैं कि क्या वायरल सामग्री जानबूझकर ऐसे विषयों पर आधारित थी, जिनसे स्टूडेंट तत्काल भावनात्मक प्रतिक्रिया दें। चितकारा मामले में लड़की की मौत और गायब होने जैसी बातें सामने आईं, जबकि एलपीयू में छात्रा से दुष्कर्म का आरोप वायरल हुआ।

दोनों विषयों की संवेदनशीलता को देखते हुए यह सवाल भी जांच का हिस्सा है कि कहीं किसी ने बिना पुष्टि की सूचना को तेजी से फैलाकर यूनिवर्सिटी का माहौल बिगाड़ने की कोशिश तो नहीं की।

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आगामी चुनाव के दौरान माहौल बिगाड़ने की आशंका

पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या इन घटनाओं का इस्तेमाल व्यापक स्तर पर माहौल प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि फिलहाल किसी राजनीतिक संगठन, व्यक्ति या किसी संगठित समूह की भूमिका का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए इसे अभी केवल जांच के एक पहलू के तौर पर देखा जा रहा है।

इंटेलिजेंस स्तर पर दोनों घटनाओं से जुड़ी सूचनाएं जुटाई जा रही हैं, जबकि साइबर सेल डिजिटल कड़ियों को जोड़ने में लगा है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि दोनों मामलों के मैसेज के प्रसार का तरीका कहीं समान तो नहीं था।

एलपीयू मामले में FIR, चितकारा में अभी नहीं

एलपीयू मामले में पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर ली है। वायरल मैसेज के स्रोत की जांच के साथ-साथ हाईवे जाम करने और पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों को भी जांच में शामिल किया जा रहा है। दूसरी तरफ चितकारा यूनिवर्सिटी मामले में अभी एफआइआर दर्ज नहीं हुई है। वहां यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने वायरल सूचनाओं को झूठा और मनगढ़ंत बताया है।

फिलहाल जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि दो अलग यूनिवर्सिटी में अलग-अलग संवेदनशील मैसेज वायरल होने के बाद स्टूडेंट इतनी तेजी से सड़क पर कैसे पहुंचे? क्या यह केवल इंटरनेट मीडिया पर फैली अपुष्ट सूचनाओं का असर था या इसके पीछे किसी ने जानबूझकर माहौल को भड़काने की कोशिश की? इसका जवाब वायरल मैसेज की पहली कड़ी और उसे आगे बढ़ाने वाले नेटवर्क की जांच से ही सामने आएगा।

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