मनियर (बलिया)। एक पैर से दिव्यांग रागिनी राजभर की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शासन-प्रशासन ने उसकी मदद के लिए हाथ बढ़ाए। अब मनियर की ही सात साल की एक और रागिनी मदद की आस लगाए बैठी है।
जन्मजात दिव्यांग होने के कारण वह न ठीक से चल पाती है और न उसके हाथ काम करते हैं। आर्थिक तंगी के कारण आज तक उसका समुचित इलाज नहीं हो सका। स्कूल जाने का सपना भी अधूरा है।
नगर पंचायत मनियर के वार्ड नंबर 14 उत्तर टोला स्थित झुमक बाबा स्थान निवासी रागिनी यादव जन्म से ही दिव्यांग है। वह दोनों पैरों से लड़खड़ाकर चलती है। उसके हाथ भी काम नहीं करते। परिजन उसे मूक-बधिर भी बताते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि उसका इलाज कराया जा सके। यही वजह है कि सात साल की उम्र में भी उसका दिव्यांग प्रमाणपत्र नहीं बन सका है और वह किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं पा सकी है।
रागिनी की मां चंपा देवी का 25 अप्रैल को कैंसर से निधन हो गया। इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी पिता जयप्रकाश यादव पर आ गई। वह फोर व्हीलर चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। रागिनी की देखभाल उसकी दादी द्रुपती देवी करती हैं। परिवार करीब 30 वर्ष पहले सरयू नदी की कटान से प्रभावित होकर यहां आकर बसा था। रागिनी की बड़ी बहन कुमकुम कक्षा छह और भाई आदित्य कक्षा तीन में पढ़ते हैं।
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समाजसेवी ने जाना हाल, प्रशासन से मदद की उम्मीद
गांधी इंटर कॉलेज सिकंदरपुर के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य एवं विधानसभा बांसडीह क्षेत्र के समाजवादी पार्टी अध्यक्ष उदय बहादुर सिंह ने रागिनी के घर पहुंचकर परिवार का हाल जाना। उन्होंने बच्ची की स्थिति देखते हुए उसके इलाज और शिक्षा के लिए मदद की आवश्यकता बताई। परिवार और ग्रामीणों को अब जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों से उम्मीद है।
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सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा
नगर पंचायत मनियर के ईओ संदीप कुमार सिंह ने बताया कि रागिनी के मामले जानकारी की जा रही है। जांच के बाद जरूरी सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा।