मारहरा। कस्बे में हजरत सैय्यद शाह जलाल बाबा की दरगाह पर चल रहे 38वें सालाना उर्स में शुक्रवार रात कव्वाली की महफिल सजी। मशहूर कव्वाल असीम साबरी और शमीम अनवर ने अपने कलामों से ऐसा समां बांधा कि श्रोता सुबह तक महफिल में डटे रहे। रात 10 बजे शुरू हुई कव्वाली शनिवार सुबह चार बजे तक चली। इस दौरान एक कव्वाली.. सुहानी सुबह लिख देना, सुहानी शाम लिख देना.. पर लोगों ने खूब तालियां बजाईं।
कस्बा मारहरा में 38वां सालाना उर्स चल रहा है। बृहस्पतिवार से शुरू हुआ उर्स आज रविवार तक चलेगा। यहां शुक्रवार की रात सैय्यद शाह जलाल बाबा की दरगाह पर कव्वाली का आयोजन हुआ। अलीगढ़ से आए कव्वाल असीम साबरी ने कलाम पेश किए। उनके कलामों पर श्रोताओं ने खूब दाद दी और तालियां बजाईं।
इसके बाद कव्वाल शमीम अनवर ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं का ध्यान खींचा.. सुहानी सुबह लिख देना, सुहानी शाम लिख देना। मैं आपको चाहता हूं, यही पैगाम लिख देना.. मुझे जब आखिरी सफर पर लोग ले जाएं, तो कफन के चारों कोनों पर अली का नाम लिख देना। यह सुनकर महफिल में मौजूद लोगों ने खूब सराहना की। दोनों कव्वालों के कलाम सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे और देर रात से सुबह तक कव्वाली का सिलसिला जारी रहा।
उर्स के आयोजक इलियास कुरैशी, शकील कुरैशी और नासिर कुरैशी ने बताया कि चार दिवसीय उर्स में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ कव्वाली की महफिलें आयोजित की जा रही हैं। उर्स में शनिवार रात भी कव्वाली की महफिल सजेगी, जिसमें कव्वाल अपने कलाम पेश करेंगे।