विद्युत जामवाल ‘स्ट्रीट फाइटर’ से हॉलीवुड में डेब्यू कर रहे हैं। वह फिल्म में धालसिम का किरदार निभा रहे हैं। नवभारत टाइम्स से बातचीत में वह शूटिंग की यादें और अनुभव साझा करते हैं। बताते हैं कि कैसे हर दिन सेट पर शूटिंंग से पहले वह हॉलीवुड के स्टार दोस्तों से शंख बजवाते थे।
‘स्ट्रीट फाइटर’ शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। यह पॉपुलर वीडियो गेम पर आधारित एक लाइव-एक्शन फिल्म है। ‘स्ट्रीट फाइटर’ (Street Fighter) में विद्युत के किरदार का नाम धालसिम (Dhalsim/Thalsim) है, जो अपनी आध्यात्मिक शक्ति, गजब की लचक और लंबी दूरी की लड़ाई के लिए जाना जाता है।
शंख बजाकर करते थे शूटिंग की शुरुआत
जम्मू में पैदा हुए सैन्य अफसर पिता की संतान विद्युत बताते हैं, ‘स्ट्रीट फाइटर सबसे पुराने विडियो गेम्स में से है। इस पर पहले भी दो फिल्में बनी हैं, लेकिन इस बार वे दुनिया के बेस्ट फाइटर्स को साथ लेकर आए हैं। कोडी रोड्स, 50 सेंट, रोमन रेंस, जेसन मोमोआ, एंड्रयू शोड्स, इन सब दिग्गजों के साथ समय बिताना, रोज रिहर्सल पर जाना, हंसी-मजाक करना एक अलग ही अनुभव था। शूट पर मैंने उन सबसे शंख बजवाया। फिल्म के मेन लीड और मेरे बड़े अच्छे दोस्त नोआ सेंटिनियो रोज शूटिंग परआने से पहले शंख बजाते थे। फिर, मेरा किरदार धालसिम मुझसे निजी तौर पर भी काफी मिलता है। वह एक योगी है जो मार्शल आर्ट्स में पारंगत है। मेकर्स ने मेरे बारे में पूरी जानकारी जुटाकर कि मैं क्या करता हूं, कैसे सोचता हूं, सबकुछ पता करने के बाद ही यह रोल ऑफर किया, जिसके लिए मैं बहुत खुशकिस्मत हूं।’
‘सेट पर सभी भारत को करीब से जानने को उत्सुक थे’
विद्युत जामवाल बताते हैं कि सेट पर कमोबेश जितने बड़े दिग्गज कलाकार थे, उन सब में भारत को लेकर जिज्ञासा थी। वह बताते हैं, ‘ये लोग हिंदुस्तान काफी बार आ चुके हैं। 50 सेंट ने इंडिया में बहुत शोज किए हैं। जब वे पहली बार इंडिया आए थे तो मैं उनका शो देखने गया था, तो वे हिंदुस्तान को जानते हैं, लेकिन इंडिया को और करीब से जानना चाहते हैं, तो वे पूछते थे कि विद्युत, मैं गोवा गया हूं। राजस्थान गया है। तुम बताओ कि और कौन सी जगहें बेस्ट हैं, तो मैं कहता था कि असली हिंदुस्तान देखने के लिए आपको वहां छोटे-छोटे शहरों में जाना पड़ेगा, जहां सिर्फ मैं ले जा सकता हूं।’
विद्युत जामवाल बोले- हॉलीवुड वाले रिसर्च बहुत करते हैं
जब विद्युत से पूछा गया कि भारतीय फिल्मकारों को हॉलीवुड वालों से क्या सीखना चाहिए? तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया, ‘इंसान तो हर जगह एक ही होते हैं। आपको अच्छे, अजीब, बेवकूफ हर तरह के लोग हर जगह मिलेंगे। हां, टेक्निकली वो हमसे बेहतर हैं। वो रिसर्च बहुत करते हैं। प्री-प्रोडक्शन में काफी वक्त लगाते हैं। उनके सेफ्टी स्टैंडर्ड भी काफी अलग है।’
‘खुद को मुश्किलों में डालना पसंद है’
हमने विद्युत जामवाल को अक्सर अपने शरीर को चैलेंज करते देखा है। वह कभी कांच की बोतल पर उल्टे खड़े हो जाते हैं, तो कभी -8 डिग्री पानी में डुबकी लगाते हैं। हाल ही, इसी फिल्म के इवेंट में उन्होंने स्टेज पर15 मिनट सांस रोक लिया, 20 मिनट तक पलक नहीं झपकाई। इसके पीछे की सोच और उद्देश्य पूछने पर वह कहते हैं, ‘अच्छा सवाल है। मैंने उद्देश्य तो सोचा नहीं है, मगर मुझे लगता है कि अपने को जानने और ढूंढ़ने का सबसे अच्छा तरीका है कि खुद को कठिनाई में डालो। तब आपको समझ आता है कि आप क्या-क्या और कितनी देर झेल सकते हैं। अपने को असहज परिस्थितियों में डालना खुद को जानने का सबसे अच्छा जरिया है। अगर खुद के बारे में जिज्ञासा हो तो कोई नई चीज करो। जब आप नई चीज शुरू करेंगे तो पहले असंभव लगेगी। लोग भी बोलेंगे कि असंभव है, लेकिन शरीर में हर चीज संभव करने की क्षमता है। यह मेरी सोच है। लोग आपको बांधेंगे, बोलेंगे कि ये नहीं होगा, वो नहीं होगा, लेकिन अगर आप उनकी न सुनकर अपने मन की सुनें तो आप कई चीजें कर सकते हैं।’
विद्युत जामवाल ने दी लाइफ की फिलॉसफी- भागते रहना नहीं, ठहरने में समझदारी
जब विद्युत से पूछा गया कि क्या उनकी मार्शल आर्ट्स की ताकत ने, उन्हें बतौर ऐक्टर सिर्फ एक्शन हीरो तक सीमित कर दिया है? इस पर उन्होंने कहा, ‘ऐसा नहीं है। मैं ‘खुदा हाफिज’ में हताश पति रह चुका हूं। ‘जंगली’ में हाथियों को बचाने के लिए जान कुर्बान कर देता हूं। साउथ में कई अलग रोल किए हैं तो मुझे जो मिलता है उसे मजे से करता हूं। आप जानती हैं कि मैं किस्मत में मानता हूं। जैसा होना है, वैसा होगा। ज्यादा ढूंढ़ोगे तो शायद न मिले। रुक जाओ तो चीजें आपके पास आ जाएंगी। मेरी फिलॉसफी यही है कि रुक जाओ, थम जाओ। चाहते हो तो हो जाएगा। आपको एक लाइन खींचनी पड़ेगी कि इतने पैसे कमा लिए, तो अब रुक जाऊंगा। जो भी आपको करना है, वो पा लिया तो उसके पीछे और नहीं भागूंगा। लोग और ज्यादा, ज्यादा के पीछे भागते रहते हैं, लेकिन जो आपने हासिल किया है, उसे तो एंजॉय करो। अपनी हर उपलब्धि का जश्न मनाओ। जब मैं मॉडलिंग करता था, तब बड़ी वाली टीवी खरीदने पर भी बिल्डिंग में हर वॉचमैन को मिठाई खिलाता था। यह छोटी सी चीज थी, पर मेरे लिए बहुत बड़ी होती थी। हर छोटी-बड़ी चीज का जश्न मनाइए। सिर्फ भागते मत रहिए।’