IAS-JKAS विवाद: वायरल वीडियो पर जम्मू-कश्मीर श्रम विभाग की सफाई; कहा- अधूरे क्लिप से निष्कर्ष न निकालें


राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के श्रम एवं रोजगार विभाग की एक समीक्षा बैठक के चुनिंदा वीडियो क्लिप इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग ने पूरे मामले पर स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग का कहना है कि वायरल वीडियो में बैठक की पूरी कार्यवाही और उसका संदर्भ सामने नहीं आया है। ऐसे में अधूरे और बिना सत्यापन वाले वीडियो के आधार पर किसी नतीजे पर पहुंचना सही नहीं है।

विभाग ने मीडिया और आम लोगों से अपील की है कि वे ऐसे वीडियो साझा करने या उन पर भरोसा करने से पहले सावधानी बरतें।

यह मामला 14 अक्टूबर 2026 को श्रम एवं रोजगार विभाग के सचिव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक से जुड़ा है। बैठक दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक चली थी। विभाग के अनुसार, इस दौरान जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों में विभागीय कामकाज और प्रदर्शन की विस्तृत समीक्षा की गई।

तीन घंटे की बैठक में 20 जिलों के कामकाज की समीक्षा

विभाग ने स्पष्ट किया कि बैठक का दायरा इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहे कुछ वीडियो क्लिप तक सीमित नहीं था। इसमें सभी जिलों में विभाग की कार्यप्रणाली, योजनाओं के क्रियान्वयन और निर्धारित लक्ष्यों की प्रगति का आकलन किया गया।

विभाग ने यह भी बताया कि बैठक की पूरी रिकॉर्डिंग राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के पास उपलब्ध है। वायरल क्लिप के बजाय संपूर्ण रिकॉर्डिंग से बैठक की वास्तविक कार्यवाही और उसका संदर्भ समझा जा सकता है।

मिशन युवा को लेकर अधिकारियों को दिए गए सख्त संदेश

बैठक में मिशन युवा के महत्व पर भी विशेष जोर दिया गया। विभाग के सचिव ने अधिकारियों को याद दिलाया कि इस मिशन से युवाओं की बड़ी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। इसलिए इसकी जिम्मेदारी केवल योजना लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पात्र युवाओं तक इसका लाभ समय पर पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है।

विभाग के अनुसार, जिला अधिकारियों से पूरी निष्ठा, जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ काम करने की अपेक्षा की गई। मिशन युवा का प्रभावी क्रियान्वयन और पात्र लाभार्थियों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना विभाग की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

अनुशासन और अधिकारियों के बीच सम्मान पर जोर

विभाग ने अपने स्पष्टीकरण में आधिकारिक बैठकों के दौरान आपसी सम्मान, अनुशासन और पेशेवर मर्यादा बनाए रखने की आवश्यकता भी रेखांकित की। उसके मुताबिक, अधिकारियों और कर्मचारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने आधिकारिक दायित्व निभाते समय वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति उचित सम्मान बनाए रखें।

साथ ही, विभाग ने कहा कि प्रशासनिक बैठकों में उकसाने वाली टिप्पणियों और अनुचित भाषा के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। ऐसी बातचीत संयम, पारस्परिक सम्मान और संस्थागत गरिमा के अनुरूप होनी चाहिए।

संपादित वीडियो पर चिंता, नियमों के तहत होगी कार्रवाई

बैठक से जुड़े घटनाक्रम पर खेद जताते हुए विभाग ने कहा कि कुछ इंटरनेट मीडिया हैंडल द्वारा वीडियो के चुनिंदा हिस्सों को पूरे संदर्भ के बिना प्रसारित करना चिंता का विषय है। विभाग के अनुसार, इस तरह की चुनिंदा एडिटिंग से वास्तविक कार्यवाही की भ्रामक तस्वीर सामने आ सकती है। उसने वायरल क्लिप को अप्रमाणित बताते हुए स्पष्ट किया कि मामले को लागू नियमों और विनियमों के अनुसार उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाएगा। 



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