सोनम शेखावत, (ETV Bharat gfx)
जयपुर: कभी पर्दे पर नजर आने वाले डायनासोर एक पांच साल की बच्ची के लिए डर और कौतूहल का विषय थे, लेकिन डर जल्द ही जिज्ञासा में बदल गया. उसके मन में सवाल उठा कि आखिर इन विशाल जीवों को पर्दे पर जीवंत कैसे किया जाता है ? इसी सवाल ने कल्पनाओं की एक ऐसी दुनिया का दरवाजा खोला, जिसने आगे चलकर उसके करियर की दिशा तय कर दी.
यह कहानी राजस्थान की बेटी सोनम शेखावत की है, जिन्होंने अपनी रचनात्मकता और कहानी कहने की कला के दम पर अंतरराष्ट्रीय एनीमेशन जगत में पहचान बनाई. 28 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय एनीमेशन दिवस के अवसर पर सोनम का सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपनी कल्पनाओं को पेशे में बदलना चाहते हैं. भारतीय और अंतरराष्ट्रीय एनीमेशन प्रोजेक्ट्स में लेखन का अनुभव रखने वाली सोनम एमी अवॉर्ड विजेता सीरीज ऑल हेल किंग जूलियन की लेखन टीम का हिस्सा रही हैं. उनका सफर बताता है कि एक छोटी सी जिज्ञासा भी बड़े सपनों की शुरुआत बन सकती है.
सोनम शेखावत से खास बातचीत. (ETV bharat jaipur)
जब शौक को करियर बनाने का फैसला आसान नहीं था : सोनम का सफर बताता है कि कल्पना केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि करियर, रचनात्मकता और वैश्विक पहचान का रास्ता भी बन सकती है. एनीमेशन को अक्सर रंग-बिरंगी तस्वीरों, कार्टून और तकनीकी सॉफ्टवेयर तक सीमित समझा जाता है, लेकिन किसी किरदार को दर्शकों के दिल तक पहुंचाने के पीछे उसकी सोच, स्वभाव, संघर्ष और कहानी की अहम भूमिका होती है. सोनम ने इसी कहानी कहने की कला को अपनी ताकत बनाया.
सोनम बताती हैं कि बचपन में ही उन्हें कहानियां गढ़ने का शौक था. वह छोटी उम्र से ही अपने आसपास की चीजों को कल्पनाओं और कहानियों से जोड़ने लगी थीं. पांच साल की उम्र में ‘जुरासिक पार्क’ देखने के बाद एनीमेशन के प्रति उनकी दिलचस्पी बढ़ी. हॉलीवुड फिल्मकार स्टीवन स्पीलबर्ग के काम ने भी उन्हें प्रेरित किया. वह खुद भी ऐसे किरदार और दुनिया बनाना चाहती थीं, जिन्हें देखकर लोग रोमांचित हों, लेकिन किसी शौक को पेशा बनाने का फैसला हर परिवार के लिए सहज नहीं होता. सोनम के सामने भी यही चुनौती आई. उनके माता-पिता चाहते थे कि वह विज्ञान की पढ़ाई करें और आगे चलकर मेडिकल या इंजीनियरिंग जैसे पारंपरिक करियर का चुनाव करें. सोनम पढ़ाई में अच्छी थीं और उनके पास इन क्षेत्रों में आगे बढ़ने के अवसर भी थे, लेकिन उनका मन एनीमेशन और कहानी लेखन में था.
जानें सोनम शेखावत के बारे में. (ETV Bharat gfx)
उन्होंने अपनी रूचि के मुताबिक रास्ता चुना और बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के एनीमेशन एवं मल्टीमीडिया पाठ्यक्रम से पढ़ाई की. सोनम कहती हैं कि यह फैसला केवल विषय चुनने का नहीं था, बल्कि अपने सपने पर भरोसा करने का भी था. शुरुआत में परिवार की असहमति के बावजूद उन्होंने अपने जुनून को समझाने और अपने हुनर को साबित करने की कोशिश जारी रखी. बाद में परिवार का समर्थन भी उन्हें मिला और आज उसी काम पर उन्हें गर्व भी है.
‘छोटा भीम’ से अंतरराष्ट्रीय एनीमेशन तक : सोनम शेखावत बाताती हैं कि पिछले 18 वर्षों से भारतीय और अंतरराष्ट्रीय एनीमेशन इंडस्ट्री में लेखिका, निर्देशक और क्रिएटिव उद्यमी के रूप में सक्रिय हैं. उन्होंने छोटा भीम, लिटिल सिंघम, सुपर भीम, शक्तिमान एनिमेटेड, बाहुबली: द लॉस्ट लेजेंड्स और बुज्जी एंड भैरवा जैसे लोकप्रिय भारतीय प्रोजेक्ट्स के लिए काम किया है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वे ड्रीमवर्क्स की एमी अवॉर्ड विजेता सीरीज ऑल हेल किंग जूलियन की लेखन टीम का हिस्सा रहीं. इसके अलावा पाव पेट्रोल, द कैट इन द हैट और सुपर विंग्स जैसे चर्चित शोज से भी जुड़ी रहीं.
एनीमेशन में करियर. (ETV Bharat gfx)
वर्ष 2024 में उन्हें AVGC 40 Under 40 सम्मान से नवाजा गया. फिलहाल वे Nokoverse.com की सह-संस्थापक के रूप में एआई टॉयज, बच्चों की तकनीक और नए मनोरंजन किरदारों पर काम कर रही हैं. सोनम का लक्ष्य भारत को केवल एनीमेशन निर्माण का केंद्र नहीं, बल्कि मौलिक कहानियों और किरदारों के वैश्विक मंच पर अग्रणी बनाना है.
एनीमेशन में सिर्फ चित्र नहीं : सोनम शेखावत कहती हैं कि एनीमेशन की दुनिया में किसी किरदार को दर्शकों का पसंदीदा बनाने के लिए उसका दिखना भर काफी नहीं होता. उसके व्यवहार, भावनाओं, संवादों और परिस्थितियों को इस तरह गढ़ना पड़ता है कि दर्शक उससे जुड़ाव महसूस करें. यही वजह है कि एनीमेशन में कलाकारों, तकनीकी विशेषज्ञों और कहानीकारों की भूमिका एक-दूसरे से जुड़ी होती है.
सोनम ने कहा कि अपने करियर की शुरुआत एनीमेशन उद्योग में काम करते हुए की. उन्हें शुरुआती दौर में 3D आर्ट से जुड़ा अनुभव मिला और फिर उन्हें कहानी लेखन का अवसर मिला. ‘शक्तिमान एनिमेटेड’ जैसे प्रोजेक्ट पर काम करते हुए उन्होंने कहानी कहने की व्यावहारिक बारीकियां सीखीं. आगे चलकर उन्होंने ‘छोटा भीम’ और ‘लिटिल सिंघम’ जैसे लोकप्रिय भारतीय किरदारों से जुड़े कार्यक्रमों और फिल्मों के लिए लेखन किया.
40 अंडर 40 अवॉर्ड के साथ सोनम शेखावत. (ETV bharat jaipur)
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सोनम कहती हैं कि बच्चों के लिए कहानी लिखना भी अपने आप में चुनौती है. कहानी रोचक हो, किरदार याद रह जाएं और मनोरंजन के साथ कोई सकारात्मक संदेश भी पहुंचे. इन सभी पहलुओं के बीच संतुलन बनाना पड़ता है. सोनम के काम में इसी रचनात्मक प्रक्रिया की झलक दिखाई देती है. उनका सफर यह भी बताता है कि एनीमेशन उद्योग में केवल ड्राइंग या सॉफ्टवेयर चलाना ही जरूरी नहीं, बल्कि कहानी, संवाद, पटकथा और चरित्र निर्माण में भी करियर की संभावनाएं हैं.
ऑल हेल किंग जूलियन’ से एमी अवॉर्ड तक : सोनम कहती है कि करियर को अंतरराष्ट्रीय पहचान उस समय मिली, जब वह एनिमेटेड सीरीज ‘ऑल हेल किंग जूलियन’ की लेखन टीम का हिस्सा बनीं. इस सीरीज को एमी अवॉर्ड के लिए नामांकन मिला और तीसरे सीजन में एनिमेटेड कार्यक्रम के उत्कृष्ट लेखन की श्रेणी में उनकी टीम को पुरस्कार मिला. यह उपलब्धि उनके लिए व्यक्तिगत सम्मान के साथ भारतीय रचनात्मक प्रतिभा की अंतरराष्ट्रीय पहचान का भी अहम पड़ाव बनी. उन्होंने कहा कि एमी अवॉर्ड जैसे सम्मान तक पहुंचने का रास्ता केवल कल्पनाशील होने से पूरा नहीं होता.
समिट में चर्चा करती सोनम शेखावत. (ETV bharat jaipur)
इसके लिए कहानी की संरचना समझना, किरदारों की खूबियों और कमजोरियों को पहचानना, उनके सामने चुनौतियां रखना और कहानी को प्रभावी अंत तक पहुंचाना जरूरी है. सोनम कहती है कि अनुभव का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने भारतीय दर्शकों के लिए लोकप्रिय किरदारों पर काम करने के बाद वैश्विक दर्शकों तक पहुंचने वाली कहानियों में भी योगदान दिया. सोनम की यात्रा उन युवाओं के लिए प्रेरक है, जो कला और रचनात्मकता को करियर के रूप में अपनाना चाहते हैं, लेकिन पारंपरिक पेशों से अलग रास्ता चुनने को लेकर असमंजस में रहते हैं.
जब कहानी आगे नहीं बढ़ती : सोनम कहती है कि किसी भी रचनात्मक क्षेत्र में काम करने वालों के सामने कभी-कभी विचारों का संकट भी आता है. सोनम ने बताया कि उन्हें भी रचनात्मक अवरोध का सामना करना पड़ता है. ऐसे समय में वह लेखन से अलग पेंटिंग, संगीत या मूर्तिकला जैसी दूसरी रचनात्मक गतिविधियों की ओर जाती हैं. इससे उन्हें नए विचारों के साथ लौटने में मदद मिलती है. यह अनुभव खास तौर पर उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है, जो मानते हैं कि प्रतिभाशाली व्यक्ति के पास हमेशा नए विचार होने चाहिए.
हकीकत यह है कि रचनात्मकता को भी समय, धैर्य और नए अनुभवों की जरूरत होती है. कभी-कभी एक काम से थोड़ी दूरी बनाना भी दूसरे विचारों के लिए जगह तैयार करता है. सोनम का मानना रहा है कि बच्चों के लिए बनाई जाने वाली कहानियां उनकी कल्पनाशक्ति को बढ़ा सकती हैं. यही कारण है कि एनीमेशन को केवल स्क्रीन पर दिखाई देने वाली गतिविधि मानना इसके प्रभाव को सीमित करके देखना होगा. एक अच्छा किरदार बच्चों को दोस्ती, साहस, जिम्मेदारी और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता जैसे विचारों से जोड़ सकता है.
अवार्ड लेती सोनम शेखावत. (ETV bharat jaipur)
अब भारत से दुनिया तक अपनी कहानियां पहुंचाने की कोशिश : सोनम कहती हैं कि यात्रा अब केवल दूसरे प्रोडक्शन के लिए लेखन तक सीमित नहीं है. वर्ष 2026 में वह ‘नोकावर्स’ की संस्थापक के रूप में भी सामने आई हैं. इस परियोजना के तहत ‘नोको: गार्जियंस ऑफ द अर्थ’ नामक 3D एनिमेटेड एडवेंचर की शुरुआत की गई, जिसकी कहानी दोस्ती, जिज्ञासा और खोज की भावना के इर्द-गिर्द बुनी गई है. इस पहल का उद्देश्य भारत में तैयार किए गए मौलिक किरदारों और कहानियों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाना है. यह बदलाव भारतीय एनीमेशन उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण है. लंबे समय तक भारतीय कंपनियों और कलाकारों की भूमिका वैश्विक प्रोजेक्ट के लिए तकनीकी काम करने तक सीमित समझी जाती रही, लेकिन अब भारतीय कहानियों और मौलिक किरदारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की कोशिशें भी बढ़ रही हैं.
राजस्थान में एनीमेशन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं : सोनम शेखावत का मानना है कि राजस्थान में एनीमेशन इंडस्ट्री के विकास की काफी संभावनाएं हैं. प्रदेश की समृद्ध लोककला, कठपुतली परंपरा, ऐतिहासिक कहानियां और सांस्कृतिक विरासत एनीमेशन के जरिए वैश्विक पहचान हासिल कर सकती हैं. उनका कहना है कि सरकार भी इस दिशा में काम कर रही है, लेकिन इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए युवाओं की भागीदारी जरूरी है.
एनीमेशन अब केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं, बल्कि लेखन, डिजाइन, 3डी मॉडलिंग, विजुअल इफेक्ट्स और गेमिंग जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहा है. केंद्र सरकार की AVGC-XR क्षेत्र को बढ़ावा देने की पहल भी इस उद्योग के विकास पर केंद्रित है. राजस्थान के युवा अपनी रचनात्मकता और तकनीकी कौशल के मेल से स्थानीय कहानियों को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचा सकते हैं.
सोनम के मुताबिक, युवाओं को नए प्रयोग करने और मौलिक किरदार व कहानियां गढ़ने के लिए आगे आना चाहिए. राजस्थान की AVGC-XR नीति 2024 के तहत एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी से जुड़े उद्योगों, स्टार्टअप और युवाओं को प्रोत्साहित करने का प्रावधान है. नीति का उद्देश्य रोजगार, कौशल विकास और राजस्थान की संस्कृति को वैश्विक मंच तक पहुंचाना है.