नीदरलैंड की 27 वर्षीय फिल्ममेकर और स्टोरीटेलर ईशा ब्रांडरहॉर्स्ट (Isha Branderhorst) का एक भावनात्मक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें उन्होंने बताया है कि भारत, खासकर उत्तराखंड के पवित्र शहर ऋषिकेश ने उनकी जिंदगी को कैसे पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश के पुल पर चलते समय वे रो पड़ीं क्योंकि पहली बार उन्हें कहीं अपनापन और ‘बिलॉन्गिंग’ (अपनेपन का अहसास) महसूस हुआ।
‘मैंने कभी अपनापन महसूस नहीं किया’
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @isha.branderhorst नामक हैंडल से शेयर किया गया है। उन्होंने भारत यात्रा के दौरान ऋषिकेश में बिताए समय को लेकर एक दिल को छू लेने वाला वीडियो शेयर किया। वीडियो में वे बताती हैं कि दुनिया में कहीं भी उन्हें कभी सच्चा ‘सेंस ऑफ बिलॉन्गिंग’ नहीं मिला था, जब तक कि वे ऋषिकेश नहीं पहुंचीं। उन्होंने वीडियो में कहा, “मैंने कभी कहीं अपनापन महसूस नहीं किया था, जब तक कि मैं ऋषिकेश के पुल पर नहीं चली। और फिर अचानक यह अहसास हुआ। मैं रोने लगी।” उन्होंने आगे बताया कि लंबे समय से वे रो नहीं पा रही थीं क्योंकि उनके चारों ओर एक कठोर परत बनी हुई थी। वे खुद को बचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही थीं। लेकिन उस दिन पुल पर चलते हुए आंसू अपने आप निकल आए। “उस समय मैं सिर्फ चल रही थी और रोने लगी। आंसू निकल रहे थे। और मुझे लगा कि शायद पहली बार मैं वास्तव में कहीं अपने को महसूस कर रही हूं।”
पहले भी यहां रह चुकी हैं
ईशा पहले भी ऋषिकेश में लंबे समय तक रहीं हैं। उनके यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो है जिसमें वे बताती हैं कि वे भारत आने से पहले डरी हुई थीं, लेकिन ऋषिकेश ने उनकी जिंदगी बदल दी और वे वहां डेढ़ साल तक रहीं। अकेले महिला यात्री के रूप में उन्होंने योग आश्रम में समय बिताया, आत्मिक परिवर्तन का अनुभव किया और अब वे आध्यात्मिक यात्रा, व्यक्तिगत विकास और सचेत यात्रा पर फिल्में बनाती हैं।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने कहा कि ऋषिकेश की ऊर्जा और माहौल वास्तव में अलग होता है। एक यूजर ने लिखा, “ऋषिकेश के बहुत अलग और मजबूत वाइब्स हैं। हर बार जब मैं वहां जाता हूं, ऐसा ही होता है।”
दूसरे ने कहा, “यह उस मिट्टी से आपका भावनात्मक जुड़ाव था। आपको वही मिला जिसकी आप तलाश कर रही थीं। भगवान आपको आशीर्वाद दे।”
कुछ यूजर्स ने इसे आध्यात्मिक नजरिए से देखा। एक ने लिखा कि भारत के हर शहर की अपनी देवता से जुड़ी ऊर्जा होती है। ऋषिकेश महादेव का शहर है जबकि वृंदावन कृष्ण का। जो व्यक्ति अपने अंदर की परमात्मा तत्व से करीब होता है, वह अवचेतन रूप से यह महसूस कर लेता है। कई लोगों ने स्वीकार किया कि पवित्र स्थलों के बारे में सोचते हुए भी उनकी आंखें नम हो जाती हैं।
एक अन्य कमेंट में कहा गया कि भारत व्यक्ति की बनाई हुई पहचान को तोड़ देता है। लोग अपनी छवि को बनाए रखने में इतना समय लगा देते हैं कि वे वास्तव में जीना भूल जाते हैं। भारत इस बोझ को हटाकर असली जीवन का अहसास कराता है।
ऋषिकेश विदेशियों को भी क्यों लुभाता है
ऋषिकेश योग, शांति और आध्यात्मिकता का विश्व प्रसिद्ध केंद्र है। यहां गंगा नदी के किनारे घाट, योग केंद्र और शांत वातावरण हजारों भारतीय और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। लोग यहां शांति, आत्म-खोज और मानसिक सुकून की तलाश में आते हैं। ईशा का अनुभव भी इसी माहौल से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि यह अनुभव उनके लिए अप्रत्याशित था और इसने उन्हें दुनिया में कहीं और नहीं मिला वाला जुड़ाव का अहसास दिया।
गौरतलब है कि, इससे पहले एक विदेशी टूरिस्ट ने भारत में घूमने के बाद इसका फीडबैक दिया था।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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