जागरण संवाददाता, आगरा। रामहि देखि बरात जुड़ानी। प्रीति कि रीति न जाति बखानी॥ नृप समीप सोहहिं सुत चारी। जनु धन धरमादिक तनुधारी॥
रामचरितमानस की ये पंक्तियां मंगलवार की शाम आगरा की सड़कों पर सिर्फ पढ़ी नहीं गईं, जीवंत होती दिखाई दीं। रावतपाड़ा से दूल्हे के रूप में तैयार होकर रघुवर श्रीराम निकले तो लगा, मानो समय ने अपनी चाल थाम ली और त्रेता ने वर्तमान का हाथ पकड़ लिया। ऐरावत की भव्यता वाले रथ पर विराजमान श्रीराम के साथ अनुज लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के स्वरूप अपने रथों पर सवार हो निकले तो रावतपाड़ा से लेकर शहर के बाजारों तक आस्था और भक्ति का ज्वार उमड़ पड़ा।
किसी ने आरती उतारी, किसी ने पुष्प बरसाए, किसी ने हाथ जोड़कर नयन भर दर्शन किए और देखते ही देखते राम बरात देखने निकला आगरा स्वयं रघुवर का बराती बना नजर आया। यह सिर्फ रामलीला की शोभायात्रा नहीं थी। यह वह दृश्य था, जिसमें अयोध्या की मर्यादा, मिथिला की प्रतीक्षा और आगरा की आस्था एक ही सड़क पर साथ चलती दिखाई दी।
राम बरात में भगवान राम के स्वरूप।
ऐरावत पर दूल्हा बने श्रीराम निकले तो थम गईं राहें, झुक गए सिर और उठ गईं आरती की थालियां
ढोल-नगाड़ों की गूंज, 31 कलाकारों के नासिक ढोल की थाप, शंखनाद और हजारों कंठों से उठता जय श्रीराम का उद्घोष वातावरण को ऐसा बना रहा था, मानो रामकथा का कोई पन्ना अचानक जीवंत होकर आंखों के सामने उतर आया हो। 168 झाकियों के विराट कारवां में धर्म और संस्कृति के रंग थे, तो भारत के वर्तमान की तस्वीर भी स्पष्ट झलक रही थी।
देवी-देवताओं और पौराणिक प्रसंगों से सजी झांकियों के बीच किसान का हल, जवान का शौर्य, सामाजिक समरसता का संदेश और राष्ट्रप्रेम भी साथ चल रहा था। रघुवर की बरात में सनातन की स्मृति थी और बदलते भारत की चेतना भी दिखाई दी।
बारहद्वारी में सजे चारों भाई, ऐरावत पर निकले दूल्हे राम
रावतपाड़ा स्थित लाला चन्नोमल की बारहद्वारी मंगलवार को कुछ देर के लिए अयोध्या के राजमहल जैसी प्रतीत हुई। श्रीराम सहित लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के स्वरूपों का मनोहारी शृंगार किया गया। आकर्षक रजत मुकुट धारण करके उनका विराट स्वरूप साक्षात हुआ, तो विधिवत पूजन और आरती की गई। केंद्रीय पंचायती राज मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री योगेंद्र उपाध्याय, उप्र राज्य महिला आयोग अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान, उप्र लघु उद्योग निगम अध्यक्ष राकेश गर्ग और जिलाधिकारी मनीष बंसल ने स्वरूपों की आरती उतारी।
ऐसा दृश्य बना, मानो अयोध्या से चली बरात पांच हजार वर्ष की दूरी लांघकर पहुंची आगरा
इसके बाद चारों भाई अपने-अपने रथों पर विराजमान हुए। सबसे पहले शत्रुघ्न, फिर भरत और लक्ष्मण निकले। अंत में वह क्षण आया, जिसकी प्रतीक्षा में शहरवासियों के नेत्र प्रतिक्षारत थे। ऐरावत हाथी की भव्यता वाले रथ पर दूल्हे के रूप में श्रीराम प्रकट हुए। एक पल को जैसे भीड़ की सांसें थम गईं। आरती की थालियां ऊपर उठ गईं। फूलों की पंखुड़ियां हवा में तैरने लगीं। सैकड़ों हाथ आशीष पाने के लिए उठे और हजारों नेत्र उस मनोहारी स्वरूप पर ठहर गईं।
गणपति आगे, पीछे खुलता गया रामकथा का संसार
आठ फीट ऊंचे गणेशजी की सवारी की अगवानी और आरती के साथ बरात का शुभारंभ हुआ। विधायक चौधरी बाबूलाल और श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने नारियल फोड़कर हरी झंडी दिखाई। दोपहर तीन बजे कारवां आगे बढ़ा तो ऊंट-नगाड़ों और नासिक ढोल की थाप ने पुराने आगरा की धड़कन बदल दी। राजा दशरथ और रानी कौशल्या बग्घी में, मुनि विश्वामित्र और गुरु वशिष्ठ रथ पर एवं भगवान विष्णु लक्ष्मीजी के साथ रजत रथ पर विराजमान थे। ऐसा लग रहा था, जैसे रामायण किताब में नहीं, आगरा की सड़कों पर चल रही हो।
हर सवारी में कथा, हर कथा में संदेश
कालिया नाग मर्दन, बकासुर वध, रामलला, महाकाल, द्वादश ज्योतिर्लिंग, पंचमुखी हनुमान, बाबा बर्फानी, कैलाश मानसरोवर, मां काली, गिरिराजजी, वैष्णो देवी, सुदामा-कृष्ण, वासुदेव कारागार, परशुराम, गौतम ऋषि-अहिल्या, राधा-कृष्ण रास और यशोदा की गोद में कृष्ण समेत सभी 168 सवारियों में सनातन की पूरी कथा जैसे एक साथ चलती रही। 11 फीट की माखन चोरी लीला ने श्रद्धालुओं को आकर्षित किया। श्रीनाथजी, श्रीराम दरबार, श्रीकृष्ण-सुदामा और भीष्म पितामह की शरशैया ने भक्ति और भाव के अलग-अलग रंग बिखेरे। जंगल में पूंछ हिलाता डायनासोर बच्चों के बीच कौतूहल का केंद्र बना रहा।
बरात में धर्म के साथ देश भी चला
भारत माता की झांकी ने राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। खेत में हल चलाता किसान अन्नदाता के गौरव की तस्वीर बना रहा था। सामाजिक समरसता की झांकी समानता और भाईचारे का संदेश दे रही थी। गदर से प्रेरित हैंडपंप उखाड़ने का दृश्य युवाओं में जोश भरता रहा, तो आतंकवादियों से लोहा लेते भारतीय जवानों की झांकी ने सीमा के प्रहरी सैनिकों को नमन कराया। प्रभु श्रीराम की बरात में भक्ति थी भारत था, परंपरा के साथ वर्तमान का संदेश भी था।
रघुवर निकले तो घरों से निकले लोग
रावतपाड़ा, सुभाष बाजार, दरेसी, छत्ता बाजार, कचहरी घाट, बेलनगंज, पथवारी और घटिया—हर रास्ता श्रद्धा से भरता चला गया। दुकानों से आरती हुई, घरों की छतों से पुष्प बरसे और गलियों में जय श्रीराम के जयघोष गूंजते रहे। बच्चे रथ के साथ दौड़ते रहे, महिलाएं आरती की थालियां लिए खड़ी रहीं और बुजुर्ग हाथ जोड़कर प्रभु के दर्शन करते रहे। मुख्य मार्ग पर दस बड़ी एलईडी स्क्रीन पर राम बारात का सीधा प्रसारण किया गया। बीपी आयल मिल पर आधे घंटे विश्राम के बाद कारवां फुलट्टी, फव्वारा और रावतपाड़ा तिराहा होते हुए श्रीमनकामेश्वर मंदिर की ओर बढ़ा।
रामलीला कमेटी के मीडिया प्रभारी राहुल गौतम ने बताया कि बुधवार सुबह श्रीराम के स्वरूप भावना एस्टेट में सजी जनकपुरी पहुंचेंगे और सुबह नौ बजे मिथिलानगरी में वरयात्रा निकलेगी।
इनका रहा सहयोग
संचालन प्रकाश चंद्र अग्रवाल ने किया। राम बारात प्रभारी प्रवीण स्वरूप बंसल, मुकेश जौहरी, अंजुल बंसल, आनंद मंगल, मोहित गोयल, ताराचंद, अजय गर्ग, विनोद जौहरी, रामकिशन अग्रवाल, अशोक गोयल, शालू अग्रवाल, दिलीप अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, सुधांशु खंडेलवाल, शृंगार कमेटी प्रभारी राहुल शर्मा, राम अभिषेक शर्मा, हृदेश वल्लभ गोस्वामी, किट्टू शर्मा और सुमित अग्रवाल ने व्यवस्थाएं संभालीं।