‘कौन जाति हो?’ जमीन नापने पहुंचे लेखपाल ने पूछा सवाल, युवक को SC-ST एक्ट की धमकी का आरोप – hardoi land measurement lekhpal caste question sc st act threat video viral lclar


उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में जमीन की पैमाइश के दौरान राजस्व टीम की कार्रवाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला गरमा गया है. वायरल वीडियो को लेकर आरोप है कि पैमाइश के दौरान एक लेखपाल ने पहले एक युवक से उसकी जाति पूछी. युवक ने खुद को ब्राह्मण बताया तो लेखपाल ने दूसरे पक्ष की जाति पूछी. दूसरे पक्ष के अनुसूचित जाति से होने की जानकारी सामने आने के बाद युवक को एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है. मामला सदर तहसील क्षेत्र के टड़ियावां थाना अंतर्गत सखौरा गांव का है. यह हरदोई तहसील क्षेत्र में गोमती नदी के किनारे बसा अंतिम गांव बताया जा रहा है. इसी गांव के माजरा बेहटी निवासी अनुसूचित जाति के रामसागर पासी ने पट्टे में मिली जमीन पर कब्जा और उसकी पैमाइश कराने के लिए तहसील में आवेदन किया था. इसके बाद नायब तहसीलदार के नेतृत्व में राजस्व टीम गांव पहुंची थी.

टीम में स्थानीय लेखपाल कौशल यादव, दूसरे क्षेत्र के लेखपाल आलोक त्रिपाठी और पुलिस बल मौजूद था. इसी दौरान संतोष कुमार पांडे के बेटे गौरव पांडे ने संबंधित जमीन पर अपना दावा बताते हुए पूरी भूमि की पैमाइश कराने की मांग की. गौरव के मुताबिक उनके परिवार के लोग पुरोहित और पूजा-पाठ का काम करते हैं. उस दिन परिवार का कोई अन्य सदस्य मौके पर मौजूद नहीं था, इसलिए वह खुद वहां पहुंचा था. गौरव का कहना है कि करीब 30 वर्ष पहले उनके बाबा गया प्रसाद पांडे के नाम तीन-चार बीघे सरकारी जमीन का पट्टा हुआ था. परिवार ने जमीन को साफ कराया, वहां पेड़ लगाए और लंबे समय से उस जमीन पर खेती करता चला आ रहा है. गौरव का आरोप है कि पूरी जमीन की पैमाइश किए बिना ही वहां लगे पेड़ों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई.

युवक की जाति पूछते ही मचा बवाल

इसी दौरान हुई कथित बातचीत का वीडियो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है. गौरव पांडे का आरोप है कि जब उन्होंने राजस्व टीम के सामने अपनी बात रखी तो उनकी बात नहीं सुनी गई. इसी दौरान लेखपाल आलोक त्रिपाठी ने उनकी जाति पूछी. गौरव के ब्राह्मण बताए जाने के बाद दूसरे पक्ष की जाति पूछी गई. रामसागर के अनुसूचित जाति से होने की बात सामने आने के बाद एससी-एसटी एक्ट लगवाने की धमकी देने का आरोप है. गौरव के परिवार और गांव के लोगों का कहना है कि किसी सरकारी प्रतिनिधि की ओर से इस तरह जाति पूछकर हरिजन एक्ट की धमकी दिया जाना उन्हें आहत करने वाला है. गौरव ने दावा किया कि उनके खेत में लगे आम के पेड़ भी उखाड़े गए और उनकी मौजूदगी के बिना जमीन की नापजोख की गई. उनका कहना है कि उन्होंने केवल पूरी जमीन और पूरे सेक्टर की सही तरीके से पैमाइश कराने की मांग की थी.

गौरव के चाचा शांति स्वरूप पांडे ने भी कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि परिवार की गैर-मौजूदगी में राजस्व टीम जमीन की नापजोख करने पहुंची थी. जब उनके भतीजे ने खेत में लगे पेड़ उखाड़ने का विरोध किया तो अधिकारियों ने उसकी जाति पूछी और दूसरे पक्ष की जाति सामने आने के बाद एससी-एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की बात कही. परिवार ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई और अपनी जमीन वापस दिलाने की मांग की है. 27 सितंबर, रविवार को वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कई ब्राह्मण संगठनों ने मामले पर आपत्ति जताई. सोशल मीडिया पर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा ब्राह्मणों को निशाना बनाने और एससी-एसटी एक्ट के कथित दुरुपयोग को लेकर पोस्ट और ट्रेंड चलाए गए. इसके बाद प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया.

हरदोई के सदर एसडीएम मयंक कुंडू ने बताया कि सोशल मीडिया पर सखौरा गांव का एक वीडियो वायरल हो रहा है. राजस्व टीम दोनों पक्षों के बीच भूमि विवाद की जांच और पैमाइश के लिए गई थी. पैमाइश के दौरान दोनों पक्षों के क्षेत्रफल में ओवरलैपिंग पाई गई. इसी दौरान लेखपाल की ओर से एससी-एसटी एक्ट को लेकर कुछ अनुचित टिप्पणी की गई, जिसे एसडीएम ने पूरी तरह गलत बताया. प्रशासन ने मामले की जांच तहसीलदार सदर को सौंप दी है. तहसीलदार को दो दिन में जांच रिपोर्ट देने को कहा गया है. अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद मामले के गुण-दोष के आधार पर संबंधित लेखपाल के खिलाफ आवश्यक विधिक और विभागीय कार्रवाई की जाएगी.

वहीं, वीडियो में धमकी देने के आरोपी लेखपाल आलोक त्रिपाठी ने अपने ऊपर लगाए आरोपों से इनकार किया है. उनका कहना है कि वह नायब तहसीलदार के साथ क्षेत्र में थे. इसी दौरान सखौरा के लेखपाल का फोन आया कि जिलाधिकारी के आदेश के अनुपालन में पट्टे की पैमाइश की जा रही है और अवैध कब्जेदार कब्जा नहीं होने दे रहा है. आलोक त्रिपाठी के मुताबिक मौके पर पहुंचने पर पता चला कि अवैध कब्जेदार ने अनुसूचित जाति के पट्टेदार की पौने चार बीघे जमीन सहित करीब 11 बीघे जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा था और पट्टेदार को जान से मारने की धमकी दी जा रही थी. उनका कहना है कि उन्होंने दोनों पक्षों को केवल जुबानी विवाद से बचने और कागजी तरीके से अपना पक्ष रखने को कहा. उनके अनुसार नियमानुसार कब्जा दिलवाकर मेड़ भी रखवा दी गई.

SC-ST एक्ट की धमकी से गरमाया मामला

लेखपाल ने कहा कि वायरल वीडियो को किस तरह और क्या बनाकर प्रसारित किया गया है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है. उन्होंने किसी को कोई धमकी देने से साफ इनकार किया है. अब इस पूरे मामले में तहसीलदार की जांच रिपोर्ट अहम होगी. रिपोर्ट में पैमाइश के दौरान हुई बातचीत और वायरल वीडियो में सामने आए कथित विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है. प्रशासन ने भी कहा है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
 

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