बांग्लादेश के पूर्व अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस को अमेरिका के न्यूयॉर्क में स्थित जॉन एफ कैनेडी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बांग्लादेशी प्रवासियों के गुट के विरोध का सामना करना पड़ा है. उन्होंने सीधे कन्फ्रंट करते हुए कहा है कि तुम आतंकवादी, यहां क्यों आए हो?
वीडियो तब का है, जब यूनुस को व्हीलचेयर पर एयरपोर्ट के बाहर लाया जा रहा था. इतने में कुछ प्रदर्शनकारियों ने उनको घेर लिया. कुछ लोगों ने उन्हें आतंकवादी कहा, उन पर बांग्लादेशियों और पुलिसकर्मियों की हत्या का आरोप लगाया. साथ ही वापस जाओ के नारे भी लगाए. इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला. बताया जा रहा है कि युनूस कुछ देर के बाद एयरपोर्ट के अंदर ही चले गए थे.
“YOU TERRORIST, WHY DID YOU COME HERE” Muhammad Yunus has fled Bangladesh and been spotted at JFK airport with the same concubine he has been involved in a relationship for years, while leaving his sick wife at home, now facing peak humiliation and public anger. Karma. https://t.co/RiR6n4Yeky
— Toofani 🇧🇩 (@Ekattor_71) October 13, 2026
फिलहाल प्रोटेस्टर्स कौन थे, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है. इन लोगों ने बांग्लादेश में हुई मौतों और गिरफ्तारियों के आरोप लगाए हैं. इनका कहना है कि बांग्लादेश में लगभग दो लाख लोगों को अरेस्ट किया गया है. हजारों पुलिसकर्मियों की मौत का जिम्मेदार ठहराया है. लेकिन यह सारी बातें कथित तौर पर ही हैं. इन्हें कहीं दर्ज नहीं किया गया है.
युनूस पर क्या आरोप लग रहे हैं?
पूरा मामला 2024 में हुए बांग्लादेश के घटनाक्रम से जुड़ा हुआ है. यहां छात्रों के विरोध ने सरकार का तख्तापलट कर दिया था. शेख हसीना को पद से हटना पड़ा था. इसके बाद वहां की अंतरिम सरकार की कमान मुहम्मद यूनुस ने संभाली थी. अंतरिम सरकार पर कुछ राजनीतिक समर्थकों के साथ अवामी लीग और अन्य लोगों ने राजनीतिक हमले रोकने और कानून व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने का आरोप भी मढ़ा था.
इस दौरान हिंदू अल्पसंख्यक लोगों को भी निशाना बनाया गया. मनमाने ढंग से अरेस्ट किया गया था. फिलहाल शेख हसीना भारत में निर्वासन का जीवन जी रही हैं. उन्होंने भारत में संरक्षण ले रखा है. बांग्लादेश की मौजूदा सरकार कई दफे उन्हें सौंपने की मांग कर चुकी है. इधर, शेख हसीना ने भी मीडिया इंटरव्यू में अपनी बात रखी है. वह अपने प्यारे बांग्लादेश के लोकतंत्र को बचाए रखने की बातों को दोहरा चुकी हैं, साथ ही वतन वापसी पर अपनी प्रतिबद्धता भी जाहिर कर चुकी है. लेकिन उन्होंने अपनी कुछ मांगे रखी हैं.