जागरण संवाददाता, जमुई। Jamui Viral Video Case: नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ सरेराह हुई बदसलूकी और बैड टच के वायरल वीडियो मामले में जमुई पुलिस ने अपनी जांच व कानूनी कार्रवाई का दायरा काफी बड़ा कर दिया है। मुख्य आरोपितों की धरपकड़ के साथ-साथ अब पुलिस ने नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वालों के खिलाफ भी कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।
सोशल मीडिया पर पीड़िता का चेहरा बिना ब्लर किए वीडियो प्रसारित करने वाले इंटरनेट मीडिया हैंडलर्स और यूजर्स के विरुद्ध विधिवत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
पुलिस अधीक्षक (एसपी) विश्वजीत दयाल ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि इंटरनेट मीडिया पर संवेदनहीनता दिखाने वालों और कानून को ताक पर रखकर वीडियो फॉरवर्ड करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी नाबालिग पीड़िता की पहचान किसी भी रूप में उजागर करना कानूनन संगीन अपराध है। पोक्सो (POCSO) एक्ट की धारा 23 में पीड़िता की निजता और पहचान को सार्वजनिक करने पर सख्त सजा व जुर्माने का स्पष्ट कानूनी प्राविधान है।
फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स के 120 अकाउंट्स रडार पर
साइबर सेल और तकनीकी सर्विलांस टीम की पड़ताल में अब तक 120 ऐसे इंटरनेट मीडिया अकाउंट्स को चिह्नित किया जा चुका है, जिन्होंने व्यूज और सनसनी फैलाने के चक्कर में बिना ब्लर किया हुआ वीडियो पोस्ट किया था। इनमें प्रमुख रूप से फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (पूर्व में ट्विटर) के एकाउंट्स शामिल हैं। पुलिस ने इन सभी 120 हैंडल्स के खिलाफ टेकडाउन (कंटेंट हटाने) की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है और इनके संचालकों की पहचान कर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।
शेयर करने के बजाय फौरन डिलीट करें
एसपी विश्वजीत दयाल ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस संवेदनशील मामले में जिम्मेदारी और परिपक्वता का परिचय दें। किसी भी सूरत में इस आपत्तिजनक फुटेज को डाउनलोड, शेयर या दोबारा पोस्ट न करें। यदि किसी व्यक्ति के मोबाइल या व्हाट्सएप ग्रुप में यह वीडियो आता है, तो उसे आगे फॉरवर्ड करने के बजाय तत्काल अपने डिवाइस से डिलीट कर दें।
पुलिस ने सख्त हिदायत दी है कि नाबालिग की पहचान उजागर करने या अपराध से जुड़े वीडियो का प्रसार करने पर पोक्सो एक्ट की धारा 23 और किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम यानी जेजे एक्ट की धारा 74 के तहत गैर-जमानती धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।