Pakistani Came India: पाकिस्तानियों के लिए भारत में आना आसान नहीं है। लेकिन एक पुराने समझौते के चलते भारत हर साल पाकिस्तानियों के लिए वीजा जारी करता है। पाकिस्तान से अटारी-वाघा बॉर्डर पार करके भारत आए फखर ने अपनी सफर के कई वीडियो शेयर किए है, जो अब वायरल भी है।
कैसे शुरू हुआ सफर?
फखरुद्दीन बताते हैं कि वह लाहौर के हज कैंप पर खड़े होते हैं। जहां से उनका काफिल शुरू हुआ होता है। वह 178 लोगों के साथ चेकिंग के बाद वाघा अटारी बॉर्डर के लिए निकलते हैं। इमिग्रेशन और तमाम तरह की फॉर्मेलिटी पूरी करने के बाद आखिरकार उन सभी को भारत में घुसने की परमिशन मिलती है। अमृतसर पहुंचने के बाद टाइट सिक्योरिटी में पुलिस सबको रेलवे स्टेशन ले जाती है।
भारत का वीजा कैसे मिला?
पाकिस्तानी व्लॉगर भारत और पाकिस्तान के बीच हुए एक समझौते की बात करते हुए बताता है कि ‘जिस तरह पाकिस्तान सिख यात्रियों को करतारपुर आने देता है। उसी तरह भारत भी पाकिस्तानी श्रद्धालुओं को को हजरत निजामुद्दीन तक जाने का वीजा जारी करता है।’ कूटनीतिक विवाद और आपसी संबंध खराब होने की स्थिति में यह सुविधा स्थगित भी कर दी दाती है।
कोई अकेले नहीं आ सकता!
भारत सरकार ने 1974 के द्विपक्षीय धार्मिक प्रोटोकॉल के तहत पाकिस्तानी जायरीनों (श्रद्धालुओं) को दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह आने के लिए वीजा जारी करती है। लेकिन इसकी कुछ शर्तें होती है। जैसे कि आने वाला व्यक्ति ग्रुप यानि जत्थे में भारत आएगा। व्यक्तिगत तौर पर कोई यहां नहीं आ सकता। भारत आने का भी सीमित कोटा होता है। यहां आने वाले यात्री पहले से ही तय रूट और तय धार्मिक स्थलों तक जा सकते हैं।
भारत क्यों देता है टाइट सिक्योरिटी?
पाकिस्तान से भारत में धार्मिक स्थलों पर घूमने वालों को भारत की ओर से टाइट सिक्योरिटी दी जाती है। ताकि वह सुरक्षित वापस लौट सकें। बताते चलें कि भारत आने के लिए मिलने वाला ये वीजा अधिकतम 15 दिनों के लिए वैध होता है। जिसके तहत यहां आने वाले पाकिस्तानी पहले से फाइनल धार्मिक स्थलों तक ही जा सकते हैं। 723वां उर्स मुबारक मनाया जाने वाला है। हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर 29 सितंबर 2026 से 3 अक्टूबर 2026 तक र उनका 723वां उर्स मुबारक मनाया जाने वाला है।