‘मेरी दादी अब मेरा बचपन वाला वर्जन बन गई है’, पोती ने बताई बचपन की कहानी, बोली- लाइफ इज फुल ऑफ सर्कल! – grandmother became my childhood version granddaughter shares heartwarming childhood story says life comes full circle


Remarkable Love: ‘लाइफ इज फुल ऑफ सर्कल’ का मतलब समझते हैं? कई बार जीवन में हुई घटनाएं, रिश्ते और अनुभव अक्सर बदलाव के साथ वहीं लौट आते हैं। जहां से वो शुरू हुए हो। इंटरनेट पर वायरल दादी-पोती की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। जिसे सुनकर लोग अपने दादा-दादी को भी याद कर रहे हैं।

पोती ने दादी को बताया अपना बचपन का वर्जन
बचपन में दादा-दादी ने अपनी नाती-पोतों को गोदी में खिलाते हैं। वहीं बच्चों के बड़े होने के साथ जब बुजुर्ग अपनी हिम्मत खोने लगते हैं। तब वहीं पर जीवन का एक चक्र पूरा होना शुरू होता है! कैसे? कहा जाता है, बुजुर्गे जैसे-जैसे और बूढ़े होते है, वो दोबारा बालकों जैसा व्यवहार करने लगते हैं। ऐसे मौकों पर उन्हें और प्यार की तलाश होती है। हाल में वायरल एक वीडियो में पोती अपने दादी से जुड़ी कहानी बताकर सबको भावुक कर देती है।

बचपन में दादी ने संभाला और अब…

निधि बताती है कि उनकी दादी उन्हें छोड़ती नहीं है, वह एक सेकंड के लिए भी गायब हो जाए, तो उनकी दादी उन्हें ढूंढती रहती है। इस बीच दादी उनका हाथ पकड़े होती है और उन्हें अपने बगल बैठने को कह रही होती है। मगर जैसे ही वह थोड़ा छिड़ककर कहती है कि ‘मुझे काम है,मैं जा रही हूं काम से।’ ये सुनकर दादी उसे छोड़ देती है। इसके बाद वो खुद Aww बोलकर अपने दादी के बगल बैठ जाती है।

‘मेरी दादी अब मेरा बचपन वाला वर्जन बन गई है’

दादी के बगल बैठकर निधि अपने बचपन की कहानी बताती है, जब वो अपनी मां या दादी के अलावा किसी के साथ नहीं रहती है। बचपन में दादी या मम्मी के पास ना होने पर वो चिल्लाने और रोने लगती थी। हमेशा उन्हें दोनों में से कोई चाहिए ही होता था। निधि बताती है कि दादी भी अब वैसी ही हो गई, वो सोने जाती है, तो निधि को लेकर जाती है और जब दादी सो जाती है, तब निधि उठकर अपना काम निपटाती है।

लाइफ इज फुल ऑफ सर्कल!

निधि बताती है कि जब वो दादी को सुलाकर वापस आ जाती है और दादी की नींद खुलती है, तो वो वापस उन्हें ढूंढने लगती है। उनका कहना होता है कि उनकी दादी उनके बचपन का एकदम सटीक वर्जन बन चुकी है। बुजुर्ग, बूढ़े होने पर बच्चे बन जाते हैं, ये बात 100 परसेंट सच है। अंत में निधि अपनी दादी के गले लग जाती है और यह लम्हा यही थम जाता है। मगर इंटरनेट पर वायरल हो जाता है।

दादियां अनमोल है, ध्यान रखिए!

कमेंट सेक्शन में हर कोई निधि को दादी का ध्यान रखने और उनके साथ रहने की सलाह दे रहा है। निधि के इंस्टाग्राम हैंडल पर भी दादी के कई वीडियोज देखने को मिलते हैं। वह अपने दादी से बेहद अटैच है। उनके इस वीडियो पर एक कमेंट आया है कि दादियां अनमोल होती है, उनके जाने पर वो सबसे ज्यादा याद आती है। दूसरे यूजर ने कहा कि मैंने कुछ दिनों पहले ही दादी को खोया है, प्लीज अपनी दादी के साथ रहिए।

लेखक के बारे मेंप्रखर पाण्डेयप्रखर पाण्डेय नवभारतटाइम्स.कॉम में सीनियर ड‍िज‍िटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं और पिछले 3.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वायरल जर्नलिज्म में विशेषज्ञता रखने वाले प्रखर ने अब तक 3100 से अधिक लेख लिखे हैं। वह सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X/Twitter, Reddit, Threads और Facebook) की नब्ज पहचानने में माहिर हैं। प्रखर की विशेषता केवल ट्रेंड्स को पकड़ना ही नहीं, बल्कि इंडियन रेलवे और ट्रेन यात्राओं से जुड़ी ऐसी ‘फ्रेश’ और ‘यूनिक’ खबरें सामने लाना है, जो सीधे आम आदमी के जीवन को प्रभावित करती हैं।प्रखर मानते हैं कि ‘वायरल’ होने का अर्थ केवल सनसनी फैलाना नहीं, बल्कि कंटेंट की गहराई और उसकी प्रमाणिकता सुनिश्चित करना है। यही कारण है कि वे किसी भी सोशल मीडिया स्टोरी को पब्लिश करने से पहले मूल सोर्स या पोस्ट करने वाले व्यक्ति से संपर्क कर उसकी सत्यता की जांच करते हैं। साल 2025 में उनके द्वारा कवर की गई ‘ढाबे पर फौजियों’ की कहानी इसका प्रमाण है, जिसने न केवल लोगों को दिल जीता, बल्कि अपनी विश्वसनीयता के कारण सोशल मीडिया पर व्यापक सराहना भी पाई।एक Gen-Z लेखक होने के नाते प्रखर को आज की युवा पीढ़ी की पसंद और डिजिटल व्यवहार की गहरी समझ है। वे वायरल कंटेंट के ‘हल्केपन’ को कम करने के लिए उसमें मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सीख को पिरोते हैं, ताकि पाठक केवल खबर न पढ़ें, बल्कि उससे जुड़ाव महसूस करें। मनोरंजन, खेल और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर उनकी पैनी नजर उनके लेखों को अधिक सूचनात्मक और ट्रेंडी बनाती है।शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो प्रखर ने फिल्म सिटी स्थित गुलशन कुमार जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन इंस्टीट्यूट (नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त) से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में BA किया है। इसके अलावा, उन्होंने प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय, प्रयागराज से राजनीति विज्ञान में MA की डिग्री हासिल की है। यह शैक्षणिक आधार उन्हें खबरों को राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से समझने में मदद करता है।नवभारत टाइम्स के साथ जुड़ने से पहले, प्रखर ने करीब पौने दो साल जागरण.कॉम में अपना योगदान दिया था, जहां उन्होंने स्पोर्ट्स, एस्ट्रो और लाइफस्टाइल जैसी विभिन्न बीट्स पर हजारों वेब स्टोरीज कवर कीं। प्रखर का उद्देश्य जटिल से जटिल खबर को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना है, ताकि वह हर आम आदमी के लिए उपयोगी साबित हो सके।… और पढ़ें



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