फेस्टिव सीजन में दुर्गा पूजा और दिवाली से पहले रेलवे कर्मचारियों का बोनस का इंजतार है. रेलकर्मियों को अब तक 78 दिन का बोनस दिए जाने का प्रावधान है. जल्द ही कैबिनेट मीटिंग में अप्रूवल के बाद इसका ऐलान हो सकता है. कहा जा रहा है कि बोनस की राशि 17,951 रुपये हो सकती है, जबकि रेलकर्मी 7,000 रुपये की पुरानी सीलिंग के बदले 18 हजार के न्यूनतम वेतन पर 53,855 रुपये बोनस की मांग कर रहे हैं. इस बीच सोशल मीडिया पर रेलवे के नाम से एक लेटर वायरल हो रहा है, जिसमें 41,149 रुपये बोनस दिए जाने की बात कही जा रही है. रेलवे बोर्ड ने इस लेटर की सच्चाई बताई है.
रेलवे बोर्ड ने क्या बताया?
रेलवे कर्मचारियों के प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस लेटर को रेलवे बोर्ड ने फर्जी बताया है. मामले को गंभीरता से लेते हुए रेलवे बोर्ड ने साफ किया है कि वायरल हो रहा ये पत्र पूरी तरह जाली और फर्जी है.
बोर्ड ने रेलवे के सभी जोन, प्रोडक्शन यूनिट और संबंधित अधिकारियों को इस पत्र को नजरअंदाज करने और इसके आधार पर किसी तरह का भुगतान या कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है.
वायरल लेटर पर फर्जी दस्तखत
सोशल मीडिया और अलग-अलग मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर रेलवे बोर्ड के नाम से एक पत्र बड़े पैमाने पर शेयर किया जा रहा था. इस पत्र पर RBE No. 101/2026 और 6 अक्टूबर 2026 की तारीख दर्ज थी. और तो और… रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया था.
फर्जी पत्र में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए पात्र गैर-राजपत्रित रेलवे कर्मचारियों को 78 दिनों के वेतन के बराबर प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस देने की बात कही गई थी. इसमें प्रति कर्मचारी 41,149 रुपये के भुगतान का भी दावा किया गया है.
रेलवे बोर्ड ने क्या कहा?
रेलवे बोर्ड के स्थापना निदेशालय ने 7 अक्टूबर 2026 को इस मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया. इसमें डिप्टी डायरेक्टर मनोज कुमार ने कहा है कि वायरल पत्र अनधिकृत है और रेलवे बोर्ड की ओर से जारी नहीं किया गया है.
बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे, प्रोडक्शन यूनिट, वित्तीय सलाहकारों और अन्य संबंधित कार्यालयों को निर्देश दिया है कि इस जाली दस्तावेज को पूरी तरह नजरअंदाज किया जाए.
इसके आधार पर किसी कर्मचारी को बोनस का भुगतान या कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए.
फर्जी लेटर बनाने वालों पर FIR के निर्देश
रेलवे बोर्ड ने इस मामले में कानूनी कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं. बोर्ड ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के महानिदेशक को निर्देश दिया है कि मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाए.
इसका मकसद फर्जी रेलवे दस्तावेज तैयार करने और सोशल मीडिया के जरिए उसे प्रसारित कर भ्रम फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना है.
कर्मचारियों के लिए जरूरी चेतावनी
रेलवे ने कर्मचारियों और अधिकारियों से अपील की है कि बोनस या किसी अन्य वित्तीय लाभ से जुड़ी किसी भी सूचना पर सोशल मीडिया के संदेशों के आधार पर भरोसा न करें.
रेलवे बोर्ड से जुड़ी ऐसी सूचनाओं के लिए केवल आधिकारिक माध्यमों पर जारी आदेशों को ही मान्य माना जाए. किसी अनधिकृत पत्र, मैसेज या सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर भुगतान या प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए.
यानी फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल 78 दिन के बोनस और 41,149 रुपये के भुगतान वाले पत्र को रेलवे बोर्ड ने फर्जी बताया है. कर्मचारियों को ऐसे संदेशों से सावधान रहने की सलाह दी गई है.
जल्द ही बोनस का ऐलान कर सकती है सरकार
केंद्र सरकार अगले हफ्ते तक रेल कर्मचारियों के सालाना बोनस का ऐलान कर सकती है. ऐसी संभावना जताई जा रही है कि कैबिनेट मीटिंग में इस पर फैसला लिया जाएगा. इस बार भी रेल कर्मचारियों को 78 दिनों का बोनस मिलने की संभावना है, लेकिन सवाल यही है कि 7,000 रुपये की सीलिंग हटती है या नहीं.
सेंट्रल रेलवे इम्प्लाइज यूनियन ( ECREU) ने सरकार और कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा है. संगठन ने लिखा है कि अब तक रेलवे में न्यूनतम वेतन 7,000 मानकर बोनस 78 दिन का 17,951 रुपये दिये जाते हैं.
संगठन ने कहा, ‘कोल इंडिया में इंडस्ट्रियल बोनस मिलता है, जबकि रेल, डाक-तार विभागों में प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) मिलता है और यह एक महीने के न्यूनतम वेतन के आधार पर बोनस मिलता है, जो अब तक 7000 रुपये था.
संगठन ने कहा, ‘अब केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने हाल में ही गजट नोटिफिकेशन करके न्यूनतम वेतन 21,000 रुपये तय किया है. तो रेलकर्मियों को उसी को आधार मानकर PLB(बोनस) का भुगतान किया जाना चाहिए. इस आधार पर 78 दिनों का बोनस बनता है, 690 x 78 = 53,855 रुपये दिया जाना चाहिए.’