बर्फीली पहाड़ी, माइनस तापमान और खूबसूरत वादियों की हद. स्विट्जरलैंड की जब बात होती है तो इसे दुनिया की जन्नत कहा जाता है, लेकिन इन वादियों का मौसम काफी सर्द होता है. ज्यादातर लोग खुद को गर्म रखने के लिए कई परतों वाले कपड़े पहनते हैं. लेकिन वायरल वीडियो में एक लड़की स्विट्जरलैंड में लहंगा पहनकर स्नोबोर्डिंग करती नजर आ रही है. मुंबई की स्नोबोर्डर उर्मिला पाबले ने स्विट्जरलैंड के माउंट टिटलिस पर कुछ ऐसा किया, जिसने इंटरनेट का ध्यान खींच लिया.
उर्मिला बर्फ से ढकी पहाड़ी पर लहंगा पहनकर स्नोबोर्डिंग करती नजर आईं. उन्होंने अपने इस अनुभव का वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया, जिसे एक दिन में 25 लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं. वीडियो में बर्फीले पहाड़, बादल और सूर्यास्त का नजारा भी दिखाई देता है.
माइनस 5 डिग्री में किया इंतजार
उर्मिला अपनी इस तैयारी के बारे में बताती हैं कि वह माउंट टिटलिस की चोटी पर शाम करीब 4 बजे पहुंची थीं और सूर्यास्त तक वहीं रहीं. स्विट्जरलैंड का मशहूर माउंट टिटलिस करीब 3,020 मीटर ऊंचा बर्फीला पर्वत और लोकप्रिय पर्यटन स्थल है. यहां तापमान काफी कम रहता है. उर्मिला बताती हैं कि सूरज करीब 8 बजे डूबा, जिसके लिए उन्हें लगभग चार घंटे तक ठंड में इंतजार करना पड़ा.
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इस दौरान सामान्य लिफ्ट संचालन बंद हो चुका था. ढलान पर बर्फ को समतल करने वाली मशीनों से काम किया जा रहा था. उर्मिला ने बताया कि उनका मकसद सूर्यास्त के दौरान एक रन करना था. इस वक्त यह जगह अलग ही खूबसूरती बिखेरती है.
फिर लहंगा पहनकर उतरीं बर्फीली ढलान पर
जब आखिरकार उन्होंने स्नोबोर्डिंग शुरू की तो उनका पहनावा भी चर्चा का विषय बन गया. इस वक्त उन्होंने कई परतों वाले गर्म कपड़ों के बजाय लहंगा पहना हुआ था. उन्होंने बताया कि उन्हें बिना जैकेट के इस भारतीय परिधान में रन करना पड़ा.
जब इसका वीडियो सामने आया तो लोग हैरान रह गए कि लहंगे में उन्होंने इतनी आसानी से स्नोबोर्डिंग कैसे की. वीडियो सामने आते ही लोगों का ध्यान उनकी तरफ चला गया, लेकिन इस रन में सिर्फ पहनावा ही चुनौती नहीं था.
उर्मिला बताती हैं कि कुछ सेकंड तक उन्हें रास्ता ही दिखाई नहीं दे रहा था. उन्होंने बताया कि रन के दौरान उन्हें लगा कि वह बादलों के बीच पहुंच गई हैं. इस दौरान विजिबिलिटी भी काफी कम हो गई थी.
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अपना अनुभव बताते हुए वह शेयर करती हैं कि एक वक्त ऐसा आया जब उन्हें कुछ भी नजर नहीं आ रहा था. इसके कुछ ही सेकंड बाद बादल हटे और उनके सामने सूर्यास्त का बेहद खूबसूरत नजारा था.
वह अपनी मुश्किलों के बारे में बताते हुए कहती हैं कि कम होती रोशनी और बादलों की वजह से हालात मुश्किल थे, लेकिन दूसरी तरफ सामने दिखाई देता सूर्यास्त इस पूरे एक्सपीरियंस को खास बना रहा था.
‘जेम्स बॉन्ड मिशन’ जैसा लगा
उर्मिला ने कहा कि ऐसा लग रहा था जैसे वह एक ‘जेम्स बॉन्ड मिशन’ पर हैं. वह खुद को जेम्स बॉन्ड के किरदार जैसा महसूस करने लगी थीं.
इस दौरान उन्हें तय रास्तों से अलग बर्फीले इलाके से गुजरना पड़ा. एक जगह ढलान काफी मुश्किल थी और फिसलने का खतरा भी था. रन खत्म होने के बाद भी उनका सफर तुरंत खत्म नहीं हुआ. उर्मिला के मुताबिक, इसके बाद उन्हें घाटी की ओर करीब एक घंटे तक पैदल चलना पड़ा.
उन्होंने अपने अनुभव को बेहद रोमांचक बताते हुए लिखा कि वह लगभग घायल होने से बचीं और ठंड में पूरी तरह जम गईं, लेकिन यह उनकी जिंदगी के सबसे अविश्वसनीय रोमांचक अनुभवों में से एक था.
हालांकि, एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बंद ढलानों या सुरक्षा नियमों को दरकिनार कर ऐसे रन करना जोखिम भरा हो सकता है. इसे बिना विशेषज्ञ प्रशिक्षण और आधिकारिक अनुमति के दोहराने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.
उर्मिला ने इस अनुभव का वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया. वीडियो को एक दिन में 25 लाख से ज्यादा व्यूज मिले और हजारों लोगों ने कमेंट किए.
कौन हैं उर्मिला पाबले?
उर्मिला पाबले मुंबई की रहने वाली एथलीट हैं. वह स्नोबोर्डिंग के साथ स्केटबोर्डिंग में भी एक्टिव रही हैं. 2025 के खेलो इंडिया विंटर गेम्स में उन्होंने महिला स्नोबोर्डिंग स्लैलम में कांस्य पदक जीता था.
उर्मिला इससे पहले भी पारंपरिक भारतीय परिधान में स्नोबोर्डिंग को लेकर चर्चा में रह चुकी हैं. मार्च 2026 में उनका और स्विट्जरलैंड की स्नोबोर्डर लिंडा श्मिटर का साड़ी पहनकर गुलमर्ग में स्नोबोर्डिंग करने वाला वीडियो भी वायरल हुआ था.
यानी उर्मिला के लिए भारतीय परिधान में बर्फीली ढलानों पर उतरना कोई पहली कोशिश नहीं है. लेकिन इस बार स्विट्जरलैंड के माउंट टिटलिस पर लहंगे में किया गया उनका रन फिर से इंटरनेट का ध्यान खींच रहा है.
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