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सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो प्रमुख दावों की पड़ताल की गई. पहले दावे में एक तस्वीर शेयर कर कहा जा रहा था कि राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस एक शोरूम के सभी टीवी स्क्रीन्स पर दिखाई जा रही थी. पड़ताल में पता चला कि यह तस्वीर एडिटेड और एआई जनरेटेड है, जिसमें कई तकनीकी खामियां नजर आईं. दूसरे दावे में एक वीडियो शेयर कर दावा किया गया कि बिहार के जमुई मामले के आरोपियों को पुलिस ने सरेराह पीटा और उनका जुलूस निकाला. जांच में सामने आया कि यह वीडियो जमुई का नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के बोरी क्षेत्र की पुरानी घटना का है, जहां डकैती और गैंगरेप के आरोपियों का पुलिस ने जुलूस निकाला था. दोनों ही वायरल दावे पूरी तरह भ्रामक और गलत साबित हुए.
