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Viral Story : कनाडा में रहने वाला बुजुर्ग कपल करीब 12,000 किलोमीटर का सफर तय करके उत्तर प्रदेश के बलिया में अपने पूर्वजों का गांव खोजने पहुंचा. उनके पास 1871 का अंग्रेजों के जमाने का एक पुराना कागज था, जिसने उन्हें अपनी जड़ों तक पहुंचाया है. पुश्तैनी गांव की मिट्टी देखकर दोनों भावुक हो गए.
Viral Story : कभी-कभी अतीत से जुड़ा एक छोटा-सा दस्तावेज भी इंसान को उसकी जड़ों तक पहुंचा सकता है. कनाडा के टोरंटो में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपती के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है. करीब 155 साल पहले उनके पूर्वज उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से कनाडा चले गए थे. इतने लंबे समय बाद कपल ने एक पुराने कागज की मदद से अपने पूर्वजों के गांव का पता लगा लिया. जब वे अपनी पुरखों की धरती पर पहुंचे, तो भावुक हो गए. उनकी यह कहानी अब लोगों का ध्यान खींच रही है.
1871 के पुराने दस्तावेज ने दिखाई गांव की राह
75 साल के इमतेज और उनकी पत्नी वर्नी अलाय के पास वर्ष 1871 का एक पुराना इमिग्रेशन दस्तावेज मौजूद था. इस कागज पर उस समय के दो अंग्रेज अधिकारियों के हस्ताक्षर थे. इसमें उनके पूर्वजों के पते से जुड़ी जानकारी भी दर्ज थी. इसी ऐतिहासिक दस्तावेज को आधार बनाकर कपल ने अपने परिवार की जड़ों को खोजने का फैसला किया. इसके लिए उन्होंने काफी मेहनत की और करीब 15 दिनों तक तलाश जारी रखी. आखिरकार उन्हें उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में खरसरा ग्राम पंचायत के अंदर आने वाले बेलौना टोला गांव तक पहुंचने का रास्ता मिल गया.
बताया जाता है कि 3 अक्टूबर को दंपती ने पंचायत सचिव मिथिलेश कुमार पांडेय से संपर्क किया था. पुराने कागज पर दर्ज जानकारी के आधार पर गांव की पहचान करने में मदद मिली. हालांकि, पंचायत सचिव के अनुसार, अभी तक उनके पूर्वजों के पुश्तैनी घर का सटीक पता नहीं चल पाया है.
मजदूरी के लिए कनाडा भेजे गए थे पूर्वज
इमतेज ने अपने परिवार के इतिहास के बारे में बताते हुए कहा कि उनकी दादी, उनकी बहन और भाई मूल रूप से बलिया के इसी इलाके के रहने वाले थे. उस समय उनकी दादी की उम्र लगभग 14 साल थी, जबकि उनके भाई-बहन की उम्र लगभग10 और 8 साल थी.
इमतेज के मुताबिक, वर्ष 1871 में उनके पूर्वजों को मजदूर के रूप में कनाडा भेजा गया था. इसके बाद परिवार की कई पीढ़ियां वहीं रहने लगीं. समय बीतने के साथ भारत से उनका सीधा संपर्क भले ही कम हो गया हो, लेकिन परिवार की पुरानी यादें और अपनी जन्मभूमि से जुड़ी जानकारी एक दस्तावेज में सुरक्षित रह गई.
पुश्तैनी गांव पहुंचकर भावुक हुआ कपल
सालों तक विदेश में रहने के बाद अपने पूर्वजों के गांव तक पहुंचना दंपती के लिए बेहद खास अनुभव रहा है. जिस जगह से उनके परिवार की कहानी शुरू हुई थी, उसे अपनी आंखों से देखना उनके लिए भावनात्मक पल बन गया. अपनी पुरखों की धरती पर कदम रखते ही उनकी आंखें नम हो गईं.
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