Home Hollywood‘बॉलीवुड को हिंदूफोबिया है’, एकता कपूर बोलीं- तिलक लगाती हूं, कलावा बांधती हूं तो कहते हैं सनकी और तांत्रिक – ekta kapoor says bollywood suffers from hinduphobia people call eccentric or tantrik when she wear tilak or kalava

‘बॉलीवुड को हिंदूफोबिया है’, एकता कपूर बोलीं- तिलक लगाती हूं, कलावा बांधती हूं तो कहते हैं सनकी और तांत्रिक – ekta kapoor says bollywood suffers from hinduphobia people call eccentric or tantrik when she wear tilak or kalava

by BollywoodNewsAndMovie


एकता कपूर ने रणवीर अल्‍लाहबादिया के पॉडकास्ट में अपनी धार्मिक आस्था को लेकर होने वाले जजमेंट और बॉलीवुड में हिंदू लोककथाओं व पौराणिक कहानियों की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए। उन्होंने टीका और कलावा पहनने पर लोगों की टिप्पणियों का जिक्र किया।

Ektaa Kapoor calls out ‘Hinduphobia’ in entertainment industry
एकता कपूर ने बॉलीवुड में ‘हिंदूफोबिया’ पर उठाए सवाल
टीवी की ‘क्‍वीन’ कही जाने जानी मशहूर प्रोड्यूसर और फिल्‍ममेकर एकता कपूर ने बॉलीवुड को ‘हिंदूफोबिक’ कहा है। दिग्‍गज एक्‍टर जितेंद्र की 51 साल की बेटी एकता ने हिंदी इंडस्‍ट्री में हिंदू लोककथाओं और पौराणिक कहानियों को नजरअंदाज किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। रणवीर अल्‍लाहबादिया के पॉडकास्ट में एकता ने दो टूक शब्‍दों में कहा है कि बॉलीवुड में फैंटेसी कहानियों पर उत्‍साह से दिखाया जाता है, लेकिन भारतीय संस्‍कृति से जुड़ी कहानियों को लेकर उतनी दिलचस्‍पी नहीं दिखती। यही नहीं, एकता ने दावा किया है कि उनके ‘त‍िलक लगाने’ और ‘कलावा बांधने’ पर भी लोग सवाल उठाते हैं। उन्‍हें इस कारण ‘सनकी’ और ‘तांत्र‍िक’ तक कहा गया है।

टीवी इंडस्‍ट्री को ‘कहानी घर घर की’ और ‘क्‍योंकि सास भी कभी बहू थी’ जैसे दर्जनों सुपरहिट शोज देने वालीं एकता कपूर इन दिनों ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ को लेकर चर्चा में हैं। वह इस फिल्‍म की प्रोड्यूसर हैं, जो बिहार के वनदेवी मंद‍िर की लोककथा पर बनी है। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया स्टारर इस फिल्‍म को दीपक कुमार मिश्रा ने प्रोड्यूस किया है। एकता का कहना है कि भारतीय लोककथाओं को फिल्मों में जगह मिलनी चाहिए और ऐसी कहानियों को दर्शकों से भी स्वीकार्यता मिलना जरूरी है।

लोककथाओं को नजरअंदाज किए जाने पर एकता ने उठाए सवाल

रणवीर अल्‍लाहबादिया के पॉडकास्ट में एकता कपूर ने कहा कि किसी फिल्म की सफलता केवल उसकी कमाई से तय नहीं होती, बल्कि उसकी कहानी और उससे जुड़ी सांस्कृतिक पहचान भी मायने रखती है। उन्होंने अपनी फिल्म ‘द वन’ का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय लोककथाओं पर आधारित कहानियों को भी उसी तरह स्वीकार किया जाना चाहिए, जैसे फैंटेसी की दूसरी कहानियों को किया जाता है। एकता ने कहा, ‘फिल्म द वन के लिए कमाई के आंकड़े बहुत अच्छे हैं। लेकिन सबसे अहम बात यह है कि यह लोककथाओं पर आधारित है। मैं कैमरे पर खुलकर कह रही हूं कि यहां हिंदूफोबिया है। हमें कई चीजों से डर लगता है। हम एनिमेटेड कहानियों को तो स्वीकार कर लेते हैं, लेकिन लोककथाओं और पौराणिक कथाओं पर बात करने में हमें दिक्कत होती है। इसलिए, मैं इन चीज़ों को सामने लाने और लोगों द्वारा इन्हें अपनाए जाने के पक्ष में हूं। अब पहले के मुकाबले स्वीकार्यता काफी बढ़ गई है।’