नई दिल्ली. बॉलीवुड में जब भी बेमिसाल कॉमेडी और टाइमिंग की बात होती है, तो गोविंदा-कादर खान की जोड़ी दिमाग में आती है. हालांकि कादर खान ने अक्सर पिता, ससुर या चाचा के रोल किए लेकिन उनके ऑन-स्क्रीन रोल किसी भी दूसरे लीडिंग एक्टर से कम नहीं थे. इस जोड़ी ने दर्जनों बॉक्स ऑफिस हिट फिल्में दीं, जिससे यह साबित हुआ कि परफेक्ट कॉमिक टाइमिंग किसी भी फिल्म को सुपरहिट बना सकती है.
डेविड धवन के डायरेक्शन में बनी ‘आंखें’ 1993 की सबसे बड़ी हिट साबित हुई. गोविंदा ने डबल रोल किया था, जिसमें कादर खान ने उनके पिता हसमुख राय का रोल किया था. पिता-बेटे की जोड़ी की जुगलबंदी, कन्फ्यूजन और कादर खान की बेमिसाल डायलॉग डिलीवरी ने दर्शकों का दिल जीत लिया. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और इतिहास रच दिया.
1994 में रिलीज हुई ‘राजा बाबू’ ने गोविंदा-कादर खान की जोड़ी को एक नया मोड़ दिया. कादर खान ने किशन सिंह (राजा के सख्त लेकिन प्यार करने वाले पिता) का रोल किया, जबकि गोविंदा ने एक बिगड़े हुए लेकिन अच्छे दिल वाले गांव के लड़के का रोल किया. कादर खान के तीखे डायलॉग और गोविंदा के दमदार एक्सप्रेशन ने फिल्म को घर-घर में मशहूर कर दिया.
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‘कुली नंबर 1’ में जिस फिल्म से ‘नंबर 1’ सीरीज शुरू हुई, कादर खान ने घमंडी अमीर ‘चौधरी होशियार चंद’ का रोल किया, जबकि गोविंदा ने कुली ‘राजू’ का रोल किया. होशियार चंद का अपनी बेटी की शादी एक बड़े परिवार में करने का जुनून और राजू का नकली अमीर आदमी होने का दिखावा थिएटर में खूब हंसाया. यह फिल्म 1995 की सबसे बड़ी हिट साबित हुई.
1996 की सुपरहिट फिल्म ‘साजन चले ससुराल’ में गोविंदा के साथ कादर खान (खुराना) की कॉमिक केमिस्ट्री देखने लायक थी. दो पत्नियों (करिश्मा कपूर और तब्बू) के बीच फंसे गोविंदा और उनकी हरकतों से परेशान ससुर का रोल कर रहे कादर खान के सीन आज भी मीम्स और वीडियो-शॉर्ट्स का हिस्सा हैं. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही.
1997 में आई ‘हीरो नं. 1’ में कादर खान ने एक सख्त और कंजर्वेटिव अमीर आदमी ‘दीनानाथ त्रिपाठी’ का रोल किया था. गोविंदा अपनी गर्लफ्रेंड (करिश्मा) का दिल जीतने के लिए उनके घर में कुक का भेष बदल लेते हैं. गोविंदा का कादर खान को अपनी सादगी और काम करने के तरीके से इम्प्रेस करने का तरीका और उसके बाद दोनों के बीच हुई बहस दर्शकों को आखिर तक बांधे रखती है. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी हिट रही थी.
‘दूल्हा राजा’ गोविंदा और कादर खान की सबसे अच्छी कॉमेडी फिल्मों में से एक मानी जाती है. कादर खान (केके सिंघानिया) एक फाइव-स्टार होटल के मालिक हैं और गोविंदा (राजा) उनके होटल के ठीक सामने अपना ढाबा खोलते हैं. ढाबा हटाने की जद्दोजहद से लेकर राजा के आखिरकार सिंघानिया के दामाद बनने तक का सफर हंसी का जबरदस्त डोज देता है. इस फिल्म के डायलॉग आज भी कल्ट क्लासिक्स माने जाते हैं.
कादर खान और गोविंदा का करिश्मा 90 के दशक के आखिर और शुरुआत में भी जारी रहा. 2000 के दशक में ‘हसीना मान जाएगी’ (1999) में सेठ अमीरचंद और ‘अंखियों से गोली मारे’ (2002) में माखन भुवा जैसे रोल किए. इन फिल्मों ने साबित कर दिया कि गोविंदा की एनर्जी और कादर खान की वर्सेटिलिटी और राइटिंग का कोई मुकाबला नहीं था. यह जोड़ी हिंदी सिनेमा के इतिहास में हमेशा अमर रहेगी.
