AI In Bollywood Vs Hollywood,हॉलीवुड ने ठुकराया लेकिन बॉलीवुड ने अपनाया, AI ने बदला लाइट, कैमरा और एक्‍शन का तरीका – how ai is changing bollywood filmmaking bollywood vs hollywood hindi – Ai news News


भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में AI का दखल तेजी से बढ़ रहा है, जिससे शूटिंग की लागत और समय 80% तक कम हो गया है। जहां हॉलीवुड में इसका विरोध हो रहा है, वहीं बॉलीवुड पुरानी फिल्मों के अंत बदलने और डिजिटल एक्टर्स बनाने जैसे आक्रामक प्रयोग कर रहा है, जो सिनेमा के भविष्य को पूरी तरह बदल सकता है।

बॉलीवुड में बदलाव कर रहा AI
क्या आप एक ऐसे फिल्म सेट की कल्पना कर सकते हैं, जहां न लाइटमैन की भाग दौड़ हो और न ही लाइट-कैमरा-एक्शन की आवाज। AI के समय में यह हकीकत बन चुका है। दरअसल दुनिया में सबसे ज्यादा फिल्में बनाने वाली भारतीय फिल्म इंडस्ट्री आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। आपको जानकर हैरानी होगी कि बेंगलुरु के स्टूडियोज में अब असली सुपरस्टार्स की जगह डिजिटल एक्टर्स तैयार किए जा रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार,(REF.) AI की मदद से रामायण और महाभारत जैसे पौराणिक महाकाव्यों को पर्दे पर उतारा जा रहा है। हालांकि हॉलीवुड का रवैया AI के प्रति बॉलीवुड जैसा सकारात्मक नहीं रहा है। वहां इसे कला के खिलाफ माना जाता है, जबकि भारतीय स्टूडियोज इसे हाथों-हाथ ले रहे हैं।

लागत में कटौती के चलते हो रहा बदलाव?

AI ने फिल्म निर्माण के अर्थशास्त्र को पूरी तरह से बदल दिया है। रिपोर्ट्स की मानें, तो AI की वजह से पौराणिक और फैंटेसी फिल्मों की निर्माण लागत अब पहले के मुकाबले पांचवे हिस्से तक गिर चुकी है। गौर करने वाली बात है कि रिलायंस और डिज्नी जैसे बड़े खिलाड़ी पहले ही AI-जनरेटेड महाभारत सीरीज पेश कर चुके हैं। ये सीरीज करोड़ों व्यूज बटोरने में भी कामियाब रही है।

यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि करोड़ो व्यूज बटोरने के बावजूद AI से बनी सीरीज की क्वीलिटी और लिप-सिंक को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इतना तय है कि यह स्टूडियोज के लिए मुनाफा कमाने का नया जरिया बन गया है।

AI से स्टूडियो कर रहे प्रयोग

AI की वजह से भारतीय स्टूडियोज एक अनोखा प्रयोग कर रहे हैं। दरअसल वे पुरानी फिल्मों का अंत AI से बदल रहे हैं। हाल ही में फिल्म रांझणा को एक हैप्पी एंडिंग के साथ दोबारा पेश किया गया था, जिसे लेकर काफी विवाद हुआ था। फिल्म के मुख्य अभिनेता धनुष ने इसे ‘कला की आत्मा का हनन’ बताया था।
रिपोर्ट के अनुसार इरोस इंटरनेशनल जैसी कंपनियां अब अपनी 3,000 फिल्मों की लाइब्रेरी को खंगाल रही हैं, ताकि उन्हें AI के जरिए नया रूप देकर दोबारा पैसा कमाया जा सके। यह हॉलीवुड से बिल्कुल अलग है, जहां सख्त नियमों के कारण ऐसा करना फिलहाल मुश्किल है।

फिल्म इंडस्ट्री को बदल रहा AI

AI भारत में डबिंग के तौर-तरीके भी बदल रहा है। यहां 22 आधिकारिक भाषाएं हैं, जिनके लिए डबिंग हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। AI की मदद से किसी के चेहरे के हाव-भाव और होंठों की हलचल को किसी भी भाषा के अनुसार बदला जा सकता है।
यशराज फिल्म्स जैसी बड़ी कंपनियां वॉर 2 जैसी फिल्मों में इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही हैं। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एनवीडिया जैसे टेक दिग्गज भी भारतीय फिल्म निर्माताओं के साथ हाथ मिला रहे हैं। जहां हॉलीवुड में AI के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए, वहीं भारत में निर्देशक अनुराग कश्यप जैसे लोग मानते हैं कि यहां सिनेमा सिर्फ कला नहीं, बल्कि एक बिजनेस है और जनता नए प्रयोगों को पसंद कर रही है।

लेखक के बारे मेंभव्य भारद्वाजभव्य भारद्वाज, टेक और गैजेट्स की दुनिया के एक अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में नवभारतटाइम्स.कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में जुड़े हुए हैं। पिछले 11 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय भव्य ने टेक्नोलॉजी, गैजेट्स और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के बदलते परिदृश्य को बहुत करीब से देखा और कवर किया है। इन्होंने जी न्यूज (DNA), इंडिया न्यूज, यूसी न्यूज, ओपो इंडिया और बाइटडांस (टिकटॉक) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में रहते हुए टेक्‍नोलॉजी को हिंदी भाषा में आम यूजर्स तक पहुंचाया है। इन्‍होंने Google और WhatsApp (Meta) जैसी ग्लोबल टेक कंपनियों के लिए काम करते हुए तकनीकी बारीकियों और यूजर्स को लेकर अपनी समझ को बेहतर क‍िया है।
एक टेक जर्नलिस्ट के तौर पर भव्य की विशेषज्ञता नए गैजेट्स के रिव्यूज, लॉन्च इवेंट्स और एआई (AI) की दुनिया में हो रहे बदलावों पर है। भव्य AI के बारे में पढ़ने-समझने के साथ उसका इस्तेमाल करके लोगों तक उनके काम की चीजों को पहुंचाने में विश्वास रखते हैं। साथ ही उनकी पैनी नजर न सिर्फ लेटेस्ट स्मार्टफोन्स पर रहती है, बल्कि वह ऑडियो डिवाइसेस और वियरेबल्स को भी गहराई से परखते हैं। भव्य का हुनर जटिल तकनीकी जानकारियों को आसान और बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना है, जिससे आम पाठक भी नई तकनीक को आसानी से समझ सकें। भव्य अलग-अलग टेक्नोलॉजी को इस्तेमाल करते हुए लोगों तक आसान भाषा में काम में आने वाले टिप्स और ट्रिक्स पहुंचाने में भी महारत रखते हैं।

भव्य भारद्वाज ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से मास मीडिया और क्रिएटिव राइटिंग में स्नातक किया है। उन्‍होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की है। उनकी यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें तकनीकी खबरों को तथ्यात्मक और रचनात्मक तरीके से पेश करने की मजबूती देती है।
वह टेक्नोलॉजी को सिर्फ स्पेसिफिकेशन्स के आधार पर नहीं आंकते, बल्कि इस नजरिए से देखते हैं कि एक यूजर को उसके साथ कैसा अनुभव मिलेगा। वह मानते हैं कि टेक्नोलॉजी का असली मकसद जीवन को सरल बनाना है और यही सोच उनकी टेक्नोलॉजी को बयान करने के तरीके में भी झलकती है।और पढ़ें



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