पार्लियामेंट के सामने प्रदर्शन करते लोगों का वायरल वीडियो फर्जी है। यह वीडियो काल्पनिक है और इसे एआई की मदद से तैयार किया गया है।
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP), कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन किए। इसी से जोड़कर एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में संसद के सामने जनसैलाब को देखा जा सकता है। इसे शेयर कर दावा किया जा रहा है कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शनकारी संसद तक पहुंच गए हैं और प्रोटेस्ट कर रहे हैं।
विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल वीडियो फर्जी है। यह एक काल्पनिक वीडियो है इसे एआई की मदद से तैयार किया गया है।
क्या हो रहा है वायरल?
फेसबुक यूजर ‘जनपीडा़ जनता पार्टी’ ने 13 अक्टूबर 2026 को वायरल वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “कहां है दिल्ली पुलिस कहां है अमित शाह की फोर्स।”
पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां पर देखें।
पड़ताल
वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने गूगल पर संबंधित कीवर्ड्स की मदद से सर्च किया। हमें इस दावे से जुड़ी कोई न्यूज रिपोर्ट नहीं मिली।
वीडियो को गौर से देखने पर हमने पाया कि इसमें मौजूद लोगों के शरीर की बनावट काफी अटपटी है। ऐसे में हमें वीडियो के एआई से बने होने का संदेह हुआ।
इसके बाद पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने वायरल वीडियो को एआई डिटेक्शन टूल्स की मदद से चेक करना शुरू किया। सबसे पहले हमने ‘Hive Moderation’ की मदद से वीडियो को स्कैन किया। हाइव के एनालिसिस में इस वायरल वीडियो के एआई से बने होने के करीब 100 फीसदी संकेत मिले।
इसी तरह हमने एक अन्य एआई डिटेक्शन टूल ‘AI Video Detector’ की मदद ली और वायरल वीडियो को चेक किया। इस टूल ने वीडियो को 81 प्रतिशत एआई-संभावित बताया।
हमने पड़ताल के दौरान तीसरे एआई डिटेक्शन टूल ‘Human Meter’ के जरिए भी वायरल वीडियो को सर्च किया। इस टूल ने भी वीडियो के एआई से बने होने की संभावना जताई। टूल ने वीडियो के 85 फीसदी तक एआई से बने होने के संकेत दिए।
हमें पड़ताल के दौरान ‘पीआईबी फैक्ट चेक’ के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर दावे से जुड़ी एक पोस्ट मिली। 13 अक्टूबर 2026 को इस पोस्ट को शेयर कर पीआईबी फैक्ट चेक ने वायरल वीडियो को एआई-निर्मित बताया।
वायरल वीडियो के बारे में अधिक जानकारी के लिए हमने एआई एक्सपर्ट डॉ. अजहर माचवे से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि वीडियो में दिख रही भारी भीड़ में मौजूद लोग एक-दूसरे में मिल रहे हैं, या आर-पार निकल रहे हैं। गेट पर पार्लियामेंट की स्पेलिंग भी गलत लिखी हुई है और बिल्डिंग का स्ट्रक्चर भी ठीक नहीं है।
क्या है संदर्भ?
विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग ने ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ अभियान (एसआईआर) प्रक्रिया में गड़बड़ी की है, जिसकी वजह से 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कट गए हैं। इसी विवाद को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी), कांग्रेस और ‘इंडी’ गठबंधन के नेता प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशभर में चल रहे प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट करने पर पाबंदी लगा दिया है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार द्वारा 11 अक्टूबर 2026 को जारी इस स्टैंडिंग ऑर्डर को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में एक याचिका दाखिल की गई है। पुलिस के इस आदेश के तहत जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया है। इस संबंध में ‘दैनिक जागरण’ और ‘बीबीसी’ की पूरी रिपोर्ट को यहां और यहां पढ़ा जा सकता है।
‘आजतक’ की वेबसाइट पर 14 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के बाद सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे ने वहां पहुंचकर प्रदर्शन किया और नारेबाजी की । इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। अब सौरव दास और अभिजीत दीपके को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। हालांकि, पुलिस ने पीस बॉन्ड भरवाकर अजिंक्य शिंदे को रिहा कर दिया है। सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस कार्रवाई पर अपनी नाराजगी जताई है।
एआई वीडियो को गलत दावे के साथ शेयर करने वाले यूजर की प्रोफाइल को अंत में हमने स्कैन किया। 20 मई 2026 को बने इस अकाउंट के पांच हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि पार्लियामेंट के सामने प्रदर्शन करते लोगों का वायरल वीडियो फर्जी है। यह वीडियो काल्पनिक है और इसे एआई की मदद से तैयार किया गया है।
- Claim Review : CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए पार्लियामेंट के सामने लोगों ने किया प्रदर्शन।
- Claimed By : FB User जनपीडा़ जनता पार्टी
- Fact Check : झूठ
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