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- GRP Conducts Morning And Evening Drills On The Platform In Front Of Passengers, As 40% Of Crimes Are Committed Here.
भोपाल57 मिनट पहले
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रेलवे स्टेशनों पर होने वाले 40% अपराध ट्रेनों के बजाय प्लेटफॉर्म, सर्कुलेटिंग एरिया और आउटर पर होते हैं। जीआरपी की आंतरिक समीक्षा में यह सामने आने के बाद मप्र जीआरपी मुख्यालय ने अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव किया है।
अब जवानों की सुबह-शाम फॉल-इन, ब्रीफिंग, डी-ब्रीफिंग और संक्षिप्त ड्रिल बंद कमरों या थानों के बजाय यात्रियों के सामने सीधे प्लेटफॉर्म पर कराई जा रही है। इसका उद्देश्य स्टेशन परिसर में होने वाले अपराधों पर लगाम लगाना है।
ब्रीफिंग में जवानों को प्लेटफॉर्म, आउटर और सर्कुलेटिंग एरिया में पिछले 12 घंटे के दौरान हुई संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी दी जाती है। इसी दौरान निगरानी की जिम्मेदारी भी तय होती है। कौन जवान आउटर ट्रैक पर रहेगा और कौन प्लेटफॉर्म के संवेदनशील हिस्सों पर नजर रखेगा, इसका फैसला मौके पर किया जाता है।
ट्रेन आने से पहले और जाने के बाद वारदात
- सॉफ्ट टारगेट समय: ट्रेन आने से ठीक पहले और रवाना होने के तुरंत बाद मोबाइल और बैग लिफ्टिंग की घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं।
- आउटर और ब्लाइंड स्पॉट्स: आउटर पर ट्रेनों के धीमे होते ही असामाजिक तत्वों का प्लेटफॉर्म छोर और ट्रैक के रास्ते प्रवेश आसान रहता था।
- बदमाशों में खौफ खत्म होना: प्लेटफॉर्म पर पुलिस की नियमित और प्रभावशाली विजिबिलिटी न होने से शातिर चोर प्लेटफॉर्म को आसान ठिकाना (ग्रीन पाश्चर) समझने लगे थे।