हॉलीवुड इंडस्ट्री हमेशा से कुछ नया प्रयोग करने के लिए जानी जाती है। उच्चतम तकनीक व नया रोमांच इनकी फिल्मों में भरपूर जान डाल देते हैं। हॉलीवुड ने दुनिया को एक से बढ़कर एक फिल्में दी हैं। फिर चाहे वो ड्रामा फिल्में हों, हॉरर, कॉमेडी या कोई सत्य घटना पर आधारित बायोपिक। अच्छी कहानी और किरदार के साथ गढ़ी गई इनकी ज्यादातर मूवीज बॉक्स ऑफिस पर भी रिकॉर्डतोड़ कमाई करती हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार की बात करें तो हॉलीवुड की भारतीय दर्शकों के अलावा अन्य देशों पर भी अच्छी पकड़ है। तभी तो ‘फास्ट एंड फ्यूरियस’ हो या फिर ‘हैरी पॉटर’ सभी ने सिर्फ इंडियन ऑडियन्स को आकर्षित ही नहीं किया बल्कि मोटी रकम भी कमाई। बॉलीवुड की ही तरह हॉलीवुड में भी कुछ फिल्में अपने स्टारकास्ट को लेकर चर्चा में रहती हैं तो कुछ जबरदस्त पटकथा के कारण। आज हम आपको ऐसी ही 10 हॉलीवुड फिल्मों के बारे में बताएंगे जो सच्ची घटनाओं पर आधारित थीं और जिन्हें दर्शकों की तरफ से काफी प्यार मिला।
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12 इयर्स अ स्लेव
– फोटो : 12 Years a Slave
12 इयर्स अ स्लेव (12 Years a Slave)
ये फिल्म न्यूयॉर्क के एक अश्वेत व्यक्ति के संस्मरण पर आधारित है, जिसका अपहरण कर लिया गया था और गुलामी के लिए बेच दिया गया था। 31 जनवरी 2014 में रिलीज हुई इस फिल्म में उसके संघर्षों को दिखाया गया है। मूवी को ऑनलाइन दर्शकों की तरफ से रेटिंग्स भी काफी अच्छी मिली है। इसके निर्देशक ब्रिटेन के स्टीव एमसीक्वीन थे, जो खुद एक अश्वेत हैं। ऑस्कर विनिंग इस फिल्म ने ढेरों अवॉर्ड बटोरे थे।
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कैप्टन फिलिप्स
– फोटो : Captain Phillips
कैप्टन फिलिप्स (Captain Phillips)
ब्रिटिश फिल्म निर्देशक, निर्माता, स्क्रीन राइटर और पूर्व पत्रकार रहे पॉल ग्रीनग्रास द्वारा निर्देशित यह फिल्म टॉम हैंक्स (Tom Hanks) अभिनीत एक थ्रिलर-ड्रामा पिक्चर है। ये 8 अप्रैल 2009 से हिंद महासागर में समुद्री लुटेरों द्वारा हाईजैक मर्सक अलबामा (MV Maersk Alabama) जहाज की सच्ची घटना से प्रेरित है। यह फिल्म कैप्टन रिचर्ड फिलिप्स (Captain Richard Phillips) की कहानी बताती है, जिन्हें सोमाली समुद्री डाकुओं ने बंधक बना लिया था। फिल्म रिचर्ड फिलिप्स द्वारा लिखी गई उन्हीं की किताब पर आधारित है, जिसका नाम ’ए कैपटन्स ड्यूटी’ है। बता दें कि रिचर्ड फिलिप्स अमेरिकी मर्चेंट मैरिनर रहे हैं जो शिप हाईजैक के समय एमवी मर्सक अलबामा के कैप्टन के तौर पर सेवा दे रहे थे। यह बायोपिक 27 सिंतबर 2013 में रिलीज हुई थी। इसमें दिखाया गया है कि जहाज के कप्तान रिचर्ड फिलिप्स ने अपने दल को बचाने के लिए किस तरह अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किया था। इस फिल्म को ऑस्कर से सम्मानित किया गया था।
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डलास बायर्स क्लब
– फोटो : Dallas Buyers Club
डलास बायर्स क्लब (Dallas Buyers Club)
डलास बायर्स क्लब 7 सिंतबर 2013 में रिलीज हुई बायोपिक ड्रामा एक ऑस्कर विजेता रही फिल्म है, जिसकी पटकथा एचआईवी एड्स से पीड़ित एक व्यक्ति की आत्मकथा पर आधारित है। फिल्म रॉन वुडरॉफ (Ron Woodroof) नाम के एक शख्स की कहानी बताती है, जो 1980 के दशक के मध्य में एड्स का मरीज था। उस वक्त एचआईवी/एड्स के उपचारों पर शोध ही किया जा रहा था। इस बीमारी को समझा नहीं गया था और लोग एड्स पीड़ितों को घृणा की नजर से देखा करते थे। उसने अपनी बीमारो को खत्म करने के लिए तरह-तरह के उपाय लगाए। बाद में वो टेक्सास में मादक पदार्थों की तस्करी करने लगा था। खाद्य और औषधि प्रशासन (एफडीए) के विरोध का सामना करते हुए उसने खरीदारों के लिए ‘डलास बायर्स क्लब’ की स्थापना कर दी थी। एक इंटरव्यू में फिल्म के लीड हीरो मैथ्यू डेविड ने बताया था कि पहले उन्हें लगा था कि ये एक आम सी कहानी है, लेकिन बाद में उन्हें इसकी खासियत का अहसास हुआ और इस दिलचस्प कहानी को फिल्म के तौर पर काफी सराहना मिली।
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जीरो डार्क थर्टी
– फोटो : Zero Dark Thirty
जीरो डार्क थर्टी (Zero Dark Thirty)
जीरो डार्क थर्टी 2012 की अमेरिकी थ्रिलर फिल्म है, जो कैथरीन बिगलो (Kathryn Bigelow) द्वारा निर्देशित है और मार्क बोएल (Mark Boal) ने इसे लिखा था। यह फिल्म 9/11 के हमलों के बाद आतंकवादी नेटवर्क अल-कायदा के नेता ओसामा बिन लादेन को पकड़ने के लिए लगभग एक दशक तक चलने वाली अंतरराष्ट्रीय जांच-पड़ताल और कार्रवाई पर आधारित है। इसकी खास बात यह है कि ऑस्कर पुरस्कार विजेता निर्देशक कैथरीन बिगलो ने मूवी की शूटिंग अमेरिका से आकर भारत में की थी। दरअसल, उन्हें पाकिस्तान के ऐबटाबाद और लाहौर के सीन चाहिए थे, जहां अमेरिकी नेवी सील्स के छापे में मारे जाने के कुछ दिन पहले तक के ओसामा के जीवन को दिखाया जाना था। लेकिन उस समय पाकिस्तान के साथ खराब और तनावपूर्ण हालात के कारण इसे वहां शूट नहीं किया जा सकता था। इसलिए भारत के चंडीगढ़ में इसकी शूटिंग की गई थी। चंडीगढ़ को लाहौर का रूप देने के लिए दुकानों पर उर्दू लिखी गई थी। फिल्म क्रू ने शहर के महत्वपूर्ण बाजारों और पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में शूटिंग की थी। फिल्म को एकेडमी अवॉर्ड के अलावा और भी कई पुरस्कार मिले थे।