Opinion: जमुई के लिए फैसले का वक्त-वो गुंडों से डर जाएगा या उस मासूम बच्ची के साथ खड़ा होगा?


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Jamui Viral Video Case: जमुई में 10वीं कक्षा के छात्र-छात्रा से सड़क पर कथित बदसलूकी और मारपीट का वीडियो वायरल होने के बाद मामला चर्चा में है. वीडियो में कुछ लोग दोनों को रोककर उनके साथ दुर्व्यवहार करते नजर आ रहे हैं. लड़की को हाथ जोड़कर छोड़ने की अपील करते हुए भी देखा-सुना जा रहा है. पुलिस के अनुसार घटना जमुई-लखीसराय रोड से जुड़ी है. वहीं, घटना को लेकर पीड़ितों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं.

जमुई के वायरल वीडियो से उठता सवाल

जमुई: कोई उसे अपनी तरफ खींच रहा है. कोई यहां-वहां पकड़ रहा है. कोई किसी बोरी की तरह उठा कर ले जाने की कोशिश कर रहा है. वो बच्ची प्लीज-प्लीज बोल रही है और वहशी उसे छोड़ने को तैयार नहीं. ये सब हो रहा है बिहार में जमुई की सड़कों पर. वायरल वीडियो में आ रही आवाजों को सुनकर ऐसा लगता है कि ये ‘ऑलमोस्ट लिंचिंग’ शायद इसलिए की जा रही है क्योंकि 10वीं की एक लड़की और उसी क्लास का एक लड़का साथ में स्कूटी पर घूमने निकले थे. शाम हो चुकी थी. शायद नैतिकता के ठेकेदारों के मुताबिक ये एक लड़के और लड़की के घूमने के लिए परमिसिबल समय नहीं था. बिहार में जंगलराज एक सियासी जुमला बन चुका है लेकिन लोगों के दिमाग में जो जंगल है वो जुमला नहीं, डरावनी हकीकत है. ये वीडियो उसकी गवाही देता है.

‘जिंदगी में फिर कभी नहीं आऊंगी’
पुलिस ने चेतावनी दी है कि कोई इस वायरल वीडियो को लेकर अफवाह न फैलाए. मगर अफवाह तब फैलती है जब हकीकत छिपाई जाती है. तो पुलिस को जल्द से जल्द इस मामले की तह में जाना चाहिए. सच्चाई बताना चाहिए. दोषियों को ऐसी सजा देनी चाहिए कि जमुई की सड़कों पर फिर जंगल पैदा ना हो, कोई वहशी दिन में और रात में घूम न पाए. उसे ये भी बताना चाहिए कि जमुई पुलिस से कहां चूक हुई कि सड़कों पर वहशी घूमने लगे, इतने निडर हो गए और दो बच्चों को सरे राह दौड़ा-दौड़ा कर ऐसी दहशत में डाला कि वो उनकी पूरी जिंदगी एक डर के साए में बीतेगी. वायरल वीडियो के आखिर में लड़की हाथ जोड़ कर कह भी रही है कि इस बार माफ कर दो, जिंदगी में फिर कभी नहीं आऊंगी.

जमुई को तय करना होगा
अभी दो दिन पहले मैंने एक दक्षिण भारतीय फिल्म देखी इरुमुड़ी. एक पिता है जो अपनी बेटी को चुप रहना सिखाता है और दूसरा अपनी बेटी को जुल्म न सहने की सीख देता है. आवाज उठाने की सीख देता है. ये लड़की मर जाती है लेकिन जो गलत हुआ है उसको देखकर भी चुप रहने से मना कर देती है. ये लड़की चुप रहने से इनकार कर देती है इसलिए स्थानीय एमएलए की सताई बहुत सारी लड़कियों को इंसाफ मिलता है और कई और लड़कियों की जिंदगी नरक बनने से बच जाती है. जमुई को तय करना है कि वो किस तरह की पेरेटिंग करना चाहता है. वो बच्ची के साथ हुए गुंडई पर चुप रहेगा ये आवाज उठाएगा? जमुई के मामले में अभी मामला दर्ज नहीं हुआ है.

लड़की अपना चेहरा क्यों छिपा रही है
पुलिस के आखिरी बयान के मुताबिक वो पीड़ितों से संपर्क करने की कोशिश कर रही है. जाहिर है पीड़ितों ने खुद सामने आकर FIR नहीं कराई. क्यों? क्योंकि संभवत: सड़क पर बदसलूकी और लिंचिंग जैसी स्थिति झेलने के बाद उनका उत्पीड़न बंद नहीं होगा. शायद इसिलए वीडियो में दिख रही लड़की अपना चेहरा छिपा रही है. उसे डर है कि जो भी इस वीडियो को देखेगा वो हमलावरों पर हमला कम करेगा और उसके चरित्र पर ज्यादा वार करेगा. समाज के वो लोग जो इस वीडियो को देखकर इस बच्ची को बुरा कहेंगे, उन्हें ये जरूर याद रखना चाहिए कि कल कोई और ऐसी घटना होगी तो उसके लिए समाज भी जिम्मेदार होगा. आखिर क्या दिक्कत है कि जब दो दोस्त शाम के वक्त घूमने निकल जाएं? क्या बिहार में ये संभव नहीं?

मां-बाप को भी जरूर याद रखें
वीडियो में हमलावर कह रहे हैं कि इनके मां-बाप को बुलाओ. हमलावरों को आखिर क्यों लगता है कि वो ऐसा बर्बर हमला करने के बाद भी पीड़ितों के मां-बाप को बुला सकते हैं? इस सवाल का जवाब इन बच्चों के मां-बाप को भी देना चाहिए. जब ये बच्चे घर पहुंचे तो उन्होंने बच्चों से क्या कहा? उन्हें ही गलत माना, उन्हें मारा-पीटा और चुप होकर सो गए, या उन्हें बताया कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया. उन्होंने कोई पाप नहीं किया, पाप तो उन गुंडों ने किया. क्या वो अपने बच्चों के साथ खड़े हुए और उनका हाथ पकड़कर थाने ले गए? शायद नहीं. तो अगली बार फिर से जब ऐसी कोई वारदात हो जाए तो इन मां-बाप को भी जरूर याद रखना चाहिए कि उसके लिए ये भी जिम्मेदार होंगे.

कोई लड़की कैसे बनेगी जमुई की विधायक
पुलिस और प्रशासन इस मामले में क्या करती है, इसपर भी निर्भर करेगा कि अगली बार बिहार में कोई ऐसी घटना होती है या नहीं. बिहार में फिर से ऐसी कोई वारदात हो जाए तो पुलिस और सरकार को भी जरूर याद रखना चाहिए कि उसके लिए ये भी जिम्मेदार होंगे. जमुई को खासकर सोचना है कि वो इस घटना पर कैसे रिएक्ट करेगा? क्योंकि जमुई की एक लड़की ऐसे ही डर जाती तो पुरुषों के इलाके में ना जाती. वो इंटरनेशनल शूटर न बनती. भारत को मेडल ना दिला पाती. बिहार की खेल और उद्योग मंत्री न बनती. जमुई की विधायक श्रेयसी सिंह नहीं बनती.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…

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