Last Updated:
Rahul Gandhi and Neha Vora News: एलओपी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की फितरत रही है कि वह वायरल नेताओं को अचानक से तवज्जो देने लगते हैं. कन्हैया कुमार, हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर जैसे कई उदाहरण हैं जिसमें राहुल गांधी अचानक से युवा नेताओं को पता नहीं किस मकसद से प्रमोट करने लगते हैं. इन दिनों वह छात्र संगठन आइसा की अध्यक्ष नेहा वोरा को वीआईपी ट्रीटमेंट देने में जुटे हैं. धरना प्रदर्शनों में नेहा को अपने सुरक्षा घेरे में रखते हुए देखे जा रहे हैं. लेकिन गौर करें तो राहुल गांधी ने जिन भी वायरल नेताओं पर दांव लगाया वो गच्चा ही देते रहे हैं. वो या तो पाला बदलकर बीजेपी में चले गए या फिर कांग्रेस में रहते हुए भी हर मोर्चे पर फेल रहे.
वामपंथी छात्र नेता नेहा वोरा इस समय राहुल गांधी की चहेती बनी हुई हैं.
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 14 अक्टूबर को दिल्ली में ऋतु बराला समेत NSUI की उन छात्राओं के साथ प्रेस के सामने आए जिन्हें धरना प्रदर्शन के दौरान पुलिस टॉर्चर सहना पड़ा. इसके अलावा राहुल गांधी पिछले कुछ समय से वामपंथी छात्र संगठन AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा वोरा को कुछ ज्यादा ही तवज्जो देते दिख रहे हैं. धरना प्रदर्शन को लेकर 13 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उन्होंने नेहा वोरा को बोलने के लिए अलग से पूरा समय दिया.
12 अक्टूबर को जब राहुल गांधी ने ‘दिल्ली चलो’ नाम से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला तब भी नेहा वोरा उनके साथ चल रही थीं. पूरे मार्च के दौरान राहुल भीड़ से नेहा को प्रोटेक्ट करते दिखे. नेहा के आसपास जब कर्नाटक मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पहुंचे तब भी उन्होंने अपनी पार्टी के सीएम को धक्का देकर हटाने में गुरेज नहीं की. राहुल पूरे यात्रा में नेहा को प्रियंका गांधी के आस-पास और अपने सुरक्षा घेरे के अंदर रखने की कोशिश करते दिखे.
इसके अलावा मार्च में चल रही खुली ट्रक पर इंडिया गठबंधन के तमाम बड़े नेताओं को जगह दी गई थी, वहां भी छात्र नेता नेहा वोरा को जगह दी गई थी. इसके अलावा पिछले कुछ समय से जहां कहीं भी राहुल गांधी जाते हैं वहां वह नेहा वोरा को पूरा सम्मान देते दिखते हैं.
कैसे चर्चा में आईं नेहा वोरा
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा वोरा जेएनयू की रिसर्च स्टूडेंट हैं. मूलरूप से उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली नेहा सबसे पहले नीट पेपर लीक के खिलाफ शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की अगुवाई में Gen-Z की ओर से शुरू किए गए अनशन के समय लाइमलाइट में आईं. शुरुआत में इस आंदोलन में सोनम वांगचुक ने अनशन शुरू किया था, लकिन जब उन्हें अस्पताल में भर्ती करा दिया गया तो नेहा वोरा ने अनशन शुरू कर दिया था. इस दौरान उनका करीब सात किलो वजह भी घट गया था.
जेन-आंदोलन में नेहा वोरा ने पूरी तरह बढ़-चढ़कर हिस्सा ली थीं. वह झारखंड और पटना में हुए छात्र आंदोलनों में भी पहुंची थीं. अब 2 अक्टूबर को नेहा वोरा ने सबसे पहले एसआईआर में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन करती दिखीं. इसके बाद वह राहुल गांधी की अगुवाई में हुए तमाम धरना प्रदर्शनों में प्रमुखता से देखी जाती हैं. 10 अक्टूबर को सीजेपी की ओर से जंतर मंतर पर बुलाए गए प्रदर्शन को बैरिकेडिंग और भारी पुलिस बल के जरिए रोके जाने के बाद भी नेहा वोरा अपने समर्थकों के साथ जमीन पर उतर गई थीं. इन आंदोलनों में हिस्सा लेकर नेहा वोरा 9 बार पुलिस हिरासत में जा चुकी हैं.
वायरल नेताओं को तवज्जो देते रहे हैं राहुल गांधी
2014 के बाद से राहुल गांधी की राजनीति पर नजर डालें तो वह समय-समय पर वायरल युवा नेताओं पर दांव खेलते रहे हैं, लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि उन्हें हर बार गच्चा ही मिला है. आइए नीचे कुछ उदाहरण देखते हैं.
- कन्हैया कुमार: 2016 में जेएनयू में 2001 के संसद हमले के दोषी अफ़ज़ल गुरू के समर्थन में कार्यक्रम किया गया, जिसमें उनके समर्थन में नारेबाजी हुई. उस समय कन्हैया कुमार वामपंथी छात्र संगठन AISF के नेता के साथ जेएनयू के छात्र संघ अध्यक्ष थे. घटना के बाद वह जेल गए और जब बाहर आए तो अपनी हाजिर जवाबी और शानदार भाषण शैली के दम पर खूब सुर्खियां बटोरी. 2019 में अपने गृह जिले बेगूसराय से सीपीआई के टिकट पर चुनाव भी लड़ गए. हार गए, लेकिन टीवी चैनलों के टॉक शो में खूब टीआरपी मिलने और जनसभाओं में इन्हें सुनने के लिए जुटने वाली भीड़ को देखकर राहुल गांधी की इनपर नजर गई. राहुल गांधी इन्हें इस उम्मीद से पार्टी में लेकर आए कि बिहार में वह पार्टी को दोबारा खड़ा कर पाएंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. 2024 में अरविंद केजरीवाल से गठबंधन के बावजूद बीजेपी के मनोज तिवारी के सामने चुनाव हार गए. हाल ही में हुए दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 में कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI की सभी पदों पर करारी हार और बीजेपी के ABVP के प्रत्याशियों की जीत के बाद से कन्हैया कुमार गायब हैं.
- हार्दिक पटेल: पटेल समाज को गुजरात में आरक्षण दिलाने के नाम पर हजारों भीड़ जुटाने वाले हार्दिक पटेल को भी राहुल गांधी ने अपनाया था. उस समय हार्दिक की इतनी भी उम्र नहीं थी कि वह कोई चुनाव लड़ सकें. 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में हार्दिक पटेल से राहुल गांधी ने बीजेपी के खिलाफ रैलियां करवाई, लेकिन फिर भी जीत नहीं सके. 2022 के गुजरात चुनाव से ठीक पहले हार्दिक पटेल कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए और वीरमगाम विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं.
- अल्पेश ठाकोर: युवा नेता अल्पेश ठाकोर भी खूब सुर्खियों में आए थे. 2017 के गुजरात चुनाव में राहुल गांधी ने इन्हें भी खूब प्रमोट किया, लेकिन वह भी बीजेपी में चले गए और गांधीनगर दक्षिण सीट से विधायक हैं.
- जिग्नेश मेवानी: 2017 के गुजरात चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने जिग्नेश मेवानी को भी खूब प्रमोट किया. वह तमाम इंटरव्यू और रैलियों में पीएम नरेंद्र मोदी को जमकर खरी खोटी सुनाते थे. वो फिलहाल वडगाम से कांग्रेस के विधायक हैं, लेकिन अब उनकी कहीं भी खास चर्चा नहीं है.
अब राहुल गांधी छात्र नेता नेहा वोरा पर वैसा ही दांव खेलते हुए दिख रहे हैं. हालांकि यह तो वक्त ही बताएगा कि अगर नेहा कांग्रेस में आती हैं तो वह पार्टी के लिए कितनी कामयाब हो पाएंगी.
राहुल गांधी की इस तरकीब पर कहती है बीजेपी?
बीजेपी सांसद संबित पात्रा कहते हैं कि राहुल गांधी के पास अपना कुछ भी नहीं है. जो कोई भी युवा नेता किसी वजह से लाइमलाइट में आत है, राहुल गांधी उसके कंधे पर बैठ जाते हैं. वह यह सोचते हैं कि मैं तो नकारा हूं, कांग्रेस को चुनाव हरवाने का रिकॉर्ड बनवा चुका हूं, मुझे पार्ट टाइम राजनीति करनी है, इसलिए जो चर्चा में उसे पकड़ लो, शायद अपना बेड़ा पार हो जाए. राहुल किसी के कंधे पर चढ़ने से पहले यह भी नहीं देखते हैं कि उसकी विचारधारा क्या है. लेकिन राजनीति में ऐसा होता नहीं है. राहुल गांधी ने नेतृत्व में कांग्रेस पूरी तरह खत्म हो चुकी है. उस पार्टी से जो कोई जुड़ेगा वो भी खत्म होने लगता है. इसी वजह से हार्दिक पटेल और अल्पेश जैसे युवा नेता आज बीजेपी में हैं.
About the Author
अभिषेक कुमार News18 की डिजिटल टीम में बतौर एसोसिएट एडिटर (सहयोगी संपादक) पद पर कार्यरत हैं. वे यहां बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तसीगढ़, उत्तराखंड की राजनीति, क्राइम समेत तमाम समसामयिक…