Home Morning News (खास खबरें)School News: भारत के पड़ोसी देश में बंद होंगे प्राइवेट स्कूल? सिर चढ़ी फीस, मनमानी की खबरों के बीच जानिए सच – nepal new rule on private schools will it apply in india too experts say this is not a solution

School News: भारत के पड़ोसी देश में बंद होंगे प्राइवेट स्कूल? सिर चढ़ी फीस, मनमानी की खबरों के बीच जानिए सच – nepal new rule on private schools will it apply in india too experts say this is not a solution

by BollywoodNewsAndMovie


Nepal School Latest Updates:भारत के पड़ोसी देश नेपाल में प्राइवेट स्कूलों को लेकर अपडेट्स हैं। बढ़ती फीस और मनमानी के आरोपों के बीच स्कूल बंद होने की खबरें सामने आ रही हैं, जो गलत है। सरकार केवल शिक्षा सुधार के तहत फीस की मनमानी रोकने, नियमों का पालन सुनिश्चित करने और कोचिंग सेंटरों पर नियंत्रण की तैयारी कर रही है। 5वीं तक पारंपरिक परीक्षाएं खत्म कर वैकल्पिक मूल्यांकन लागू होगा। भारत के संदर्भ में विशेषज्ञों के अनुसार, प्राइवेट स्कूल बंद करना समाधान नहीं है।

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Nepal Private School News Hindi : नेपाल में सभी प्राइवेट स्कूलों को पूरी तरह बंद किए जाने की वायरल खबर सच नहीं है। पिछले कुछ दिनों से भारत में सोशल मीडिया पर यह खबर छाई हुई है कि नेपाल में सभी प्राइवेट स्कूलों को बंद कर दिया जाएगा और सवाल यह भी किए जा रहे थे कि क्या भारत में भी प्राइवेट स्कूलों को लेकर ऐसा कोई फैसला किया जा सकता है?

पड़ताल में सामने आया कि नेपाल सरकार शिक्षा सुधार के तहत प्राइवेट स्कूलों की मनमानी रोकने की तैयारी कर रही है, बंद करने का ऐसा कोई आदेश सामने नहीं आया है। नेपाल में मुख्य फोकस अवैध रूप से वसूली गई फीस वापसी, सरकारी नियमों के पालन पर है। सरकारी शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कोचिंग सेंटरों पर लगाम लगाने और 5वीं कक्षा तक की परंपरागत परीक्षाएं खत्म करने पर है।

नेपाल में सरकार का क्या है उद्देश्य

नेपाल में स्कूलों से जुड़ी खबरों में सामने आया कि नेपाल केशिक्षा मंत्रालय ने प्राइवेट स्कूलों को तय सीमा से अधिक फीस न लेने की चेतावनी दी है। प्राइवेट स्कूलों के बारे में सबसे ज्यादा शिकायतें उनकी फीस को लेकर आती हैं, खासकर उस समय जब एक शैक्षणिक सत्र खत्म होता है और दूसरा शुरू होता है। अभिभावकों ने मंत्रालय, स्थानीय सरकारों और अन्य अधिकारियों से शिकायतें की हैं, जिनमें प्राइवेट स्कूलों पर एडमिशन और सालाना फीस जैसी कैटिगरी के तहत मनमाने ढंग से फीस लेने का आरोप लगाया गया है।

कोचिंग सेंटरों पर भी सख्ती

मंत्रालय ने स्कूलों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे छात्रों का एडमिशन तभी करें जब शैक्षणिक सत्र शुरू हो जाए। साथ ही कोचिंग सेंटरों की मनमानी रोकने की कोशिशें भी हुई हैं। स्कूल स्तर पर सरकार ने 5वीं क्लास तक के छात्रों के लिए पारंपरिक आंतरिक परीक्षाओं को खत्म कर दिया है। इसके बजाय, उनकी प्रगति का मूल्यांकन वैकल्पिक और मनोवैज्ञानिक तरीकों से किया जाएगा, जिससे तनाव-मुक्त और समग्र सीखने का माहौल बनेगा।

एक्सपर्ट बोले- प्राइवेट स्कूलों को बंद करना समाधान नहीं

प्राइवेट स्कूलों की ऐक्शन कमिटी के अध्यक्ष, भरत अरोड़ा ने कहा, प्राइवेट स्कूलों को बंद करना कोई समाधान नहीं है। दिल्ली में 2 हजार से ज्यादा प्राइवेट स्कूल है। सीबीएसई के देश में 35 हजार स्कूल है, जिसमें से आधे से भी ज्यादा प्राइवेट है। प्राइवेट स्कूल भारत के राष्ट्र निर्माण में स्वतंत्रता के समय से ही एक सशक्त सहयोगी रहे है। शिक्षा में इनोवेशन, गुणवत्ता और व्यापक अवसरों को बढ़ावा देते है। संस्थान सामाजिक उत्तर दायित्व को भी सुदृढ़ करते है। फीस का मुद्दा है तो देश में हर राज्य के ऐक्ट के हिसाब से नियम लागू किए जाते है।

निजी और सरकारी स्कूलों के बीच गुणवत्ता का बड़ा अंतर और सरकारी व्यवस्था की गिरावट इसकी मुख्य वजह है। NEP (National Education Policy) ने ECCE (प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा) को अहम माना है, लेकिन सरकारी स्तर पर इसकी गुणवत्ता कमजोर है। मजबूर होकर अभिभावक निजी स्कूलों पर निर्भर है, जहां फीस, किताबें और यूनिफॉर्म महंगी होती है। प्री-प्राइमरी शिक्षा अब भी अनियमित है, जिससे जवाबदेही की कमी है। नीति जरूरी है।

अशोक अशोक गांगुली, सीबीएसई के पूर्व अध्यक्ष

दिल्ली समेत भारत के प्राइवेट स्कूलों में भी है फीस का मुद्दा

दिल्ली समेत भारत के प्राइवेट स्कूलों में भी मनमानी फीस बढ़ोतरी, एनुअल फीस, अलग-अलग कैटेगरी में फीस को लेकर शिकायतें मिलती रहती हैं। छात्रों और अभिभावकों पर प्राइवेट पब्ल‍िशर्स की महंगी किताबें खरीदने के लिए दबाव डालने के मामले भी सामने आते हैं। इसके अलावा स्टेशनरी से लेकर ड्रेस की खरीद भी स्कूल काउंटर से खरीदने के आरोप भी लगते हैं।

भूपेंद्र शर्मा

लेखक के बारे मेंभूपेंद्र शर्माभूपेंद्र शर्मा, नवभारत टाइम्स में सहायक संपादक के रूप में कार्यरत है। 1999 से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। एजुकेशन बीट पर 20 वर्षों से ज्यादा काम करने का अनुभव है। इसके साथ ही दिल्ली हाई कोर्ट, दिल्ली सरकार, एमसीडी बीट भी कवर कर चुके हैं। इस समय दिल्ली नैशनल ब्यूरो में शिक्षा मंत्रालय, कौशल विकास मंत्रालय, बीजेपी, आरएसएस, प्रेजिडेंट हाउस, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, आम आदमी पार्टी, राज्यसभा सचिवालय समेत कई बीट्स पर काम कर रहे हैं। नैशनल ब्यूरो मे हेल्थ मिनिस्ट्री, आवास मत्रालय भी कवर कर चुके हैं। टाइम्स में मई 2008 से कार्यरत है, इससे पहले आईबीएन 7 अब टीवी 18, दैनिक जागरण, दैनिक हरिभूमि में भी काम कर चुके हैं। करीब 26 वर्षों का अनुभव है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में ग्रैजुएशन और कुरूक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में एमए की डिग्री हासिल की है।… और पढ़ें