नेटफ्लिक्स पर आते ही धमाका कर रही है ये साउथ की फिल्म। पहले बॉक्स ऑफिस पर कमाई आकर छोड़ी थी छाप। परफॉरमेंस और कहानी से इम्प्रेस हुई ऑडियंस। जानिए कहानी –
कुछ समय पहले तेलुगू सिनेमा ने एक शानदार फिल्म रिलीज की थी। ये एक ऐसी फिल्म थी कि कई बड़े साउथ एक्टर्स ने तारीफ की। करीब एक महीने पहले थिएटर पर रिलीज हुई रवि तेजा की फिल्म इरुमुडी थी। फिल्म अब नेटफ्लिक्स पर आते ही धूम मचा रही है। फिल्म की कहानी एक पिता और उसकी बेटी की है। कहानी इतनी मजेदार है कि आप सीट से हिलने का नाम भीं नहीं लेंगे। लेकिन कहानी के अंत में जो ट्विस्ट आएगा वो आपके होश उड़ाने के साथ रोंगटे खड़े कर देगा। इस फिल्म को IMDB पर 7.1 की रेटिंग मिली है।
इरुमुडी की कहानी
फिल्म इरुमुडी की कहानी एक सड़क से शुरू होती है। एक आदमी आने-जाने वाली गाड़ियों को रोककर हॉर्न करने से मना करता है। वो कहता है कि बच्ची सो रही है, हॉर्न की आवाज से जाग जाएगी। कुछ ड्राइवर ये बात मानकर चुपचाप चले जाते हैं। लेकिन एक ड्राइवर मजाक उड़ाते हुए जोर जोर से हॉर्न बजाता है। ये सुनते ही सीन में एंट्री होती है रवि तेजा के के किरदार तिरुनाथ की। वो उस ड्राइवर को मारता है। फिर कहानी फ्लैशबैक में जाती है। दिखाया जाता है कि एक स्कूल की लड़की टीचर से मिली बेइज्जती और टॉर्चर की वजह से सुसाइड कर लेती है। फिर फ्लैशबैक में तिरुनाथ का जीवन दिखाया जाता है।
तिरुनाथ एक बेटी का जन्म
आगे कहानी में दिखाया जाता है कि तिरुनाथ और उनकी पत्नी कावेरी शादी के चार साल बाद भी पेरेंट्स नहीं बन पाए। ऐसे में तिरुनाथ को उनका गुरु गोपीराज से उसकी मुलाकात होती है और वो उसे अय्यपा स्वामी की पूजा और व्रत करने की सलाह देता है। भगवान की कृपा से तिरुनाथ एक बेटी का पिता बनता है जिसका नाम वो मणिकर्ण रखता है। मणि अब तिरुनाथ की जान बन चुकी है। कहानी आगेभी बढती जाती जय कि वो स्कूल जाती है। अब उसे आगे की पढ़ाई के लिए दूर के स्कूल जाना है। दूर जाने के लिए वाहन की व्यवस्था नहीं है। तिरुनाथ वहां के मंत्री से मिलकर बच्चों के लिए एक बस की व्यवस्था करवाता है। वहीं गांव में चार लड़के भी हैं जो नशा करते हैं और आने-जाने वाली लड़कियों को छेड़ते हैं। जब ये बात तिरुनाथ को पता चलती है तो वो उन्हें खूब मारता है। आगे इनमें से एक का मर्डर भी हो जाता है सबको लगता है कि वो तिरुनाथ ने किया है। लेकिन वो मर्डर तिरुनाथ ने नहीं किया था।
टीचर करती है गलत काम
कहानी में स्कूल की टीचर भी दिखाई जाती है। ये वही टीचर है जिसने शुरुआत में लड़की पर अत्याचार किया था। अपनी सजा पूरी कर ये स्कूल वापस आ गई है। दूसरी तरफ दिखाया जाता है कि गोपीराज की बेटी गायत्री और अनसुइया नाम की एक लड़की को टीचर अपने घर पढ़ाई के लिए सेलेक्ट करती है। इसी बीच अनसुइया टीचर के घर जाने से मना कर देती है। लेकिन गायत्री चली जाती है। उसके साथ वहां दुष्कर्म करने की कोशिश की जाती है। वहीं मणि ने अपने पापा तिरुनाथ से वादा किया था कि वो अब शराब को हाथ नहीं लगाएगा। तिरुनाथ वादा करता है और उस रात भगवान अय्यपा की पूजा में निकल जाता है। कहानी में आगे दिखाया जाता है कि गायत्री आज भी टीचर के घर से बेइज्जत होकर लौटी है। उसे टीचर का असिस्टेंट बीच रास्ते में छोड़ कर चला जाता है। दूसरी तरफ लड़कियों को छेड़ने वाले वो चार में से तीन गुंडे भी वहीं पहुंच जाते हैं। इसके बाद सीन यहीं रुक जाता है। गायत्री के साथ क्या हुआ ये नहीं पता चलता।
मणि की मौत का सदमा
अगले सीन में तिरुनाथ पर कुछ गुंडे हमला करते हैं। इसी बीच उसे बेटी मणि का फोन आ जाता है। लेकिन गुंडे फोन तोड़ देते हैं तो वो मणि से बात नहीं कर पाता। अगले सीन में गोपीराज अपनी बेटी गायत्री की तलाश में होता है। वो घर नहीं आई। फिर खबर आती है कि एक लड़की की लाश मिली है। लोग भागकर जाते हैं। लेकिन कहानी यहां सबसे बड़ा ट्विस्ट दिखाती है। जो लाश मिली है वो गायत्री की नहीं बल्कि तिरुनाथ की बेटी मणि की है। और फिर फिल्म का वो पहला सीन दिखाया जाता है जब वो ट्रक ड्राइवर से हॉर्न नहीं बजाने के लिए कहता है क्योंकि वो यकीन नहीं कर पाता कि मणि इस दुनिया में नहीं रही।
मणि की मौत का कातिल
तिरुनाथ और कावेरी सदमे में जी रहे होते हैं। मन्नत से मांगी हुई बेटी अब भगवान ने छीन ली। अब तिरुनाथ का एक ही मकसद होता है बेटी की मौत के कातिल को पकड़ना। फिर तिरुनाथ को अपना हो टूटा हुआ फोन मिलता है। जब वो फोन ठीक करवाता है तो उसे कातिल के बारे में पता चल जाता है। उस कॉल में मणि ने मारने वाले का नाम लिया था। इसके बाद तिरुनाथ अपने गुरु गोपीराज को बुलाता है और उससे पूछता है कि उसने उसकी बेटी को क्यों मारा। कहानी हैरान करती है क्योंकि अभी तक शक उन गुंडों पर होता है।
इरुमुडी का अंत
गोपीराज फिर पूरी बात बताता है जो मणि जान गई थी। टीचर, गायत्री के साथ गलत काम कर रही थी। इसी वजह से उस लड़की ने भी सुसाइड किया था। और जिस नेता ने गांव में लड़कियों के लिए बस की व्यवस्था की थी वो लड़कियों का इस्तेमाल करता था और इस बार गायत्री का नंबर था। गोपीराज अपनी बेटी को बचाने के लिए मणि का मर्डर कर देता है। कहानी में आगे तिरुनाथ बेटी का मौत का बदला लेकर अय्यपा स्वामी की पूजा में लग जाता है।