ईशा रिखी जब बिग बॉस 20 के घर में आई तो लोगों को लगा वह लंबा टिकने वाली हैं. अपने बेबाक अंदाज से वह बिग बॉस में छाई रही लेकिन अफसोस कि वो शो में ज्यादा दिन टिक नहीं पाईं. ईशा अब ‘बिग बॉस 20’ से बाहर आ चुकी हैं. शो के दौरान जब ईशा रिखी ने अपने इमोशनल ब्रेकडाउन के बारे में बातें की तब माही विज ने उन पर बादशाह को इनडायरेक्टली बदनाम करने का आरोप लगाया. अब बाहर आने के बाद उन्होंने माही विज की उस टिप्पणी पर खुलकर बात की है.
ईशा ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान माही की उस बात को असंवेदनशील कहा. ईशा को सबसे ज्यादा बुरा इस बात का लगा कि उनके पीठ पीछे ये सब बोला गया .
ईशा ने माही के बातों को याद करते हुए कहा, ‘मुझे बहुत बुरा लगा, मुझे खराब लगा कि आप एक महिला हैं फिर भी आपने किसी की स्थिति को बहुत आसानी से जज किया और बिना पूरी स्टोरी जाने आप इस पर इतनी बड़ी बात कैसे बोल सकती हैं. मुझे लगता है ये सच में बहुत ही असंवेदनशील है’.
ईशा को इस बात का बहुत बुरा लगा कि माही ने उन्हें ये बातें डायरेक्टली नहीं कही. ईशा ने कहा, मुझे सबसे ज्यादा यही बात खली. आप ये बातें मुझसे सामने से नहीं कही, बल्कि मेरे पीठ पीछे बोली. यह मेरे लिए काफी निराशाजनक था.’ ईशा का कहना है कि माही भी एक महिला हैं और एक महिला होने के नाते ये सब कैसे बोल सकती है. उन्होंने कहा कि हर कोई अपने दर्द से अलग-अलग तरीके से गुजरता है.
कोई डिप्रेशन का नाटक नहीं करता…
ईशा ने मेंटल हेल्थ पर लोगों की सोच पर नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि किसी के डिप्रेशन और इमोशनल ब्रेकडाउन को सच नहीं मानना और उस पर सवाल उठाना गलत है. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि किसी के इमोशनल ब्रेकडाउन, ट्रॉमा और डिप्रेशन को जज करना बहुत ही असंवेदनशील है. कुछ लोग कहते हैं ओह ये डिप्रेशन का नाटक कर रहा है, लेकिन कोई डिप्रेशन का नाटक नहीं करता. आप इस तरह के नाटक नहीं कर सकते. आप तीन घंटे किसी की सहानुभूति के लिए रोने का नाटक नहीं कर सकते हैं.’
ईशा ने अपने ब्रेकडाउन को याद करते हुए कहा कि उन्होंने खुद को रोने से रोकने की पूरी कोशिश की थी. उन्होंने कहा, ‘मैं खुद से कह रही थी कि मैं नहीं रोऊंगी, मैं अपने आप को रोने से रोकने की कोशिश की. मैं रोना नहीं चाहती थीं. जब में वॉशरूम एरिया में आई तब भी मैं खुद से बोलती रही कि मैं रोना नहीं चाहती. लेकिन उस वक्त कुछ ऐसा ट्रिगर हुआ कि मैं खुद को रोक नहीं पाई.’ ईशा ने कहा कि उस दौरान लोगों ने उनके दर्द को समझने की कोशिश करने के बजाय उनकी कही बातों और उनके रिएक्शन पर ज्यादा ध्यान दिया.
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