Sanjay Gupta का हुआ निधन
हिंदी सिनेमा में एक अलग पहचान
संजय गुप्ता ने अपने करियर की शुरुआत साल 1994 में फिल्म ‘आतिश: फील द फायर’ के साथ की थी। उन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए बॉलीवुड में एक विशिष्ट शैली विकसित की थी, जो स्टाइलिश निर्देशन, दमदार संवाद और शानदार एक्शन सीक्वेंस के लिए जानी जाती थी। उनकी फिल्मों में मुंबई का अंडरवर्ल्ड, अपराध और गैंगस्टर्स की दुनिया अक्सर एक मुख्य किरदार की तरह उभरती थी।
उनके करियर का सबसे बड़ा पड़ाव साल 2002 में आई फिल्म ‘कांटे’ रही। अमिताभ बच्चन, संजय दत्त और सुनील शेट्टी जैसे सितारों से सजी यह फिल्म अपनी अनूठी प्रस्तुति के कारण एक कल्ट फिल्म बन गई। इसके अलावा, ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’, ‘शूटआउट एट वडाला’, ‘मुसाफिर’, ‘जिंदा’ और ‘मुंबई सागा’ जैसी फिल्मों ने उन्हें एक्शन-थ्रिलर जॉनर का एक बड़ा नाम बना दिया।
गैंगस्टर ड्रामा से लेकर इमोशनल थ्रिलर तक का सफर
संजय गुप्ता ने केवल गैंगस्टर फिल्मों तक ही खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने साल 2017 में ऋतिक रोशन और यामी गौतम के साथ ‘काबिल’ जैसी भावनात्मक थ्रिलर फिल्म का निर्देशन किया, जिसे दर्शकों और समीक्षकों ने काफी सराहा। वहीं, ऐश्वर्या राय बच्चन के साथ ‘जज्बा’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया।
संजय गुप्ता के निर्देशन की खासियत यह थी कि वे कैमरा एंगल, बैकग्राउंड म्यूजिक और किरदारों के चित्रण पर विशेष ध्यान देते थे, जिससे उनकी फिल्में दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ती थीं। उनके निधन से हिंदी सिनेमा ने एक ऐसा फिल्ममेकर खो दिया है, जिसने अपनी फिल्मों के जरिए दर्शकों को मनोरंजन का एक नया और स्टाइलिश नजरिया दिया।