रात 12 से सुबह 6 बजे तक बंद रहेगा इंस्टाग्राम और फेसबुक! Meta ने शुरू किया ट्रायल


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सोशल मीडिया का इस्तेमाल बच्चों से लेकर बड़ों तक हर कोई कर रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की वजह से ही लोगों का स्क्रीन टाइम भी बढ़ रहा है। बच्चे भी आधी रात में जाग-जागकर सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं।

वहीं अब इंस्टाग्राम और फेसबुक पर डिजिटल बेडटाइम लगेगा, जिससे रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच एक्सेस पर रोक रहेगी। साथ ही रात में और स्कूल के समय में नोटिफिकेशन कम कर दिए जाएंगे। मेटा ने इसे लेकर ट्रायल शुरू कर दिया है।

बच्चों को लेकर Meta की पॉलिसी में होगा बदलाव

सोशल मीडिया पर बच्चों की एक्टिविटी को कम करने के लिए नाबालिगों के पोस्ट पर लाइक और रिएक्शन की गिनती गायब हो जाएगी।

इन यूजर्स के लिए कॉस्मेटिक-सर्जरी फिल्टर बैन कर दिए जाएंगे, एज-एश्योरेंस सिस्टम और पेरेंटल कंट्रोल को मजबूत किया जाएगा और मेटा इनफिनिट-स्क्रॉल एक्सपीरियंस में रुकावट डालेगा।

टीनएजर्स को नॉन-पर्सनलाइज्ड फीड का ऑप्शन भी दिया जाएगा, न कि ऐसे फीड का जो एल्गोरिदम से चलता हो, जो अंदाजा लगाने और शायद बताने के लिए डिजाइन किए गए हों। अभी तक इससे सोशल मीडिया एंगेजमेंट को बढ़ाया जाता है।

देखा जाए तो एक तरफ जहां पहले इंस्टाग्राम-फेसबुक लोगों को इन एप पर बने रहने के लिए मजबूर करते थे, वहीं अब बच्चों के सोने का समय डिसाइड करने में मदद करेंगे।

मेटा अब एक इंडिपेंडेंट ऑडिटर कम्प्लायंस को मॉनिटर करेगा। मेटा अपने प्लेटफॉर्म की सेफ्टी के बारे में गुमराह करने वाले दावे करना बंद करने पर भी सहमत हो गया है। सेफ्टी को लेकर जो सही जानकारी होगी, वही लोगों को दी जाएगी।

मेटा करेगा अरबों डॉलर का भुगतान

मेटा से शुरू में लगभग 12.7 बिलियन डॉलर भुगतान देने की उम्मीद है और कुल रकम 17.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि टिकटॉक और यूट्यूब जैसे दूसरे प्लेटफॉर्म भी ऐसे ही तरीके अपनाते हैं और पैसे से मदद करते हैं या नहीं।

हालांकि यह एक बहुत बड़ी रकम है (17.1 डॉलर बिलियन लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये), लेकिन मेटा के हिसाब से यह बहुत कम है, क्योंकि कंपनी ने 2025 में लगभग 201 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू बताया था।

मेटा के ही पूर्व सिक्योरिटी इंजीनियर ने खोला राज

मेटा पर 2023 में 29 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने US फेडरल कोर्ट में केस किया था, जिसमें आरोप लगाया गया कि फेसबुक और इंस्टाग्राम को जानबूझकर बच्चों और टीनएजर्स को परेशान रखने के लिए बनाया गया था।

राज्यों ने कंपनी पर आरोप लगाया कि उसे पता था कि उसके प्रोडक्ट्स से मेंटल और फिजिकल नुकसान हो सकता है, जबकि वह माता-पिता और जनता को इन खतरों के बारे में गुमराह कर रही थी। उन्होंने 13 साल से कम उम्र के बच्चों से माता-पिता की सही सहमति के बिना जानकारी इकट्ठा करके फेडरल चाइल्ड-प्राइवेसी कानून के उल्लंघन का भी आरोप लगाया।

ओरिजिनल कोएलिशन दोनों पार्टियों का था और 47 राज्यों, US कैपिटल और कई US टेरिटरीज को शामिल करते हुए एक बहुत बड़े सेटलमेंट में बदल गया।

इस केस का ट्रायल 18 अगस्त से ही शुरू हुआ है। मेटा के पूर्व सेफ्टी इंजीनियर आर्टुरो बेजार की गवाही के बाद मेटा के लिए यह मामला असहज हो गया था।

आर्टुरो बेजार ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने युवा यूजर्स पर असर डालने वाले नुकसानदायक अनुभवों के बारे में चिंता जताई थी और आरोप लगाया था कि मेटा का कल्चर सेफ्टी से ज्यादा एंगेजमेंट और ग्रोथ को प्राथमिकता देता है।

पूर्व सेफ्टी इंजीनियर ने कहा कि मेटा ने खुद को एक ऐसी कंपनी को दिखाया जो समस्या को समझती थी लेकिन रेवेन्यू जेनरेट करने वाली मशीनरी से ज्यादा बच्चों की भलाई को आगे रखने में संघर्ष करती थी।

यह भी पढ़ें- मेटा का ऐतिहासिक समझौता: बच्चों की सुरक्षा दावों पर 16.68 अरब डॉलर का करेगा भुगतान



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