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अमित वी. मसुरकर के डायरेक्शन में बनी ‘न्यूटन’ 22 सितंबर 2017 को थिएटर में रिलीज हुई थी. इसे इंडियन सिनेमा की सबसे बेहतरीन पॉलिटिकल और सोशल ब्लैक-कॉमेडी में से एक माना जाता है. लगभग 9 से 10 करोड़ के लिमिटेड बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 29 से ज्यादा की कमाई की और इसे सेमी-हिट का दर्जा मिला. सिर्फ 106 मिनट के रनटाइम के साथ, यह दर्शकों को आखिर तक अपनी सीट से बांधे रखती है. राजकुमार राव और पंकज त्रिपाठी स्टारिंग इस फिल्म को 2018 के ऑस्कर के लिए इंडिया की ऑफिशियल एंट्री के तौर पर भी चुना गया था.
नई दिल्ली. जब 22 सितंबर 2017 को ‘न्यूटन’ बड़े पर्दे पर आई, तो इसमें कोई बड़ा सुपरस्टार स्टार कास्ट या कोई हैवीवेट मसाला नहीं था. लेकिन, इसकी अनोखी और एडवेंचरस कहानी ने दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों का ध्यान खींचा. यह फिल्म डेमोक्रेसी, इलेक्शन प्रोसेस और एक आम नागरिक की अपने कामों के प्रति ईमानदारी की एक सच्ची तस्वीर पेश करती है.
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका टाइट और क्रिस्प स्क्रीनप्ले है. सिर्फ 106 मिनट के रनटाइम के साथ यह फिल्म बिना किसी फालतू गाने या कमर्शियल ड्रामा के सीधे मुद्दे पर आती है. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जंगलों में इलेक्शन बूथ लगाने से लेकर वोटिंग प्रोसेस तक, हर पल दर्शकों के लिए लगातार क्यूरिऑसिटी और सस्पेंस बनाए रखता है.
‘न्यूटन’ ने साबित कर दिया कि छोटे बजट की फिल्में भी दमदार कंटेंट के साथ इतिहास रच सकती हैं. फिल्म का कुल प्रोडक्शन बजट लगभग 9 करोड़ था, जबकि इसने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 22.80 करोड़ नेट और दुनिया भर में 29 करोड़ से ज्यादा की कमाई की. बेहतरीन वर्ड-ऑफ-माउथ के दम पर फिल्म ने अपने थिएटर बजट से तीन गुना कमाई की और सेमी-हिट रही.
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फिल्म में राजकुमार राव न्यूटन कुमार का रोल कर रहे हैं, जो एक ईमानदार, जिद्दी और उसूलों वाला सरकारी क्लर्क है, जबकि पंकज त्रिपाठी आत्मा सिंह का रोल कर रहे हैं, जो एक CRPF कमांडेंट है और जमीन से जुड़ा और प्रैक्टिकल है. दो अलग-अलग डेमोक्रेटिक नियमों और सोच का यह टकराव फिल्म का दिल है, जिसमें दोनों एक्टर्स की कॉमिक और सीरियस टाइमिंग शानदार है.
न्यूटन सिर्फ एक इलेक्शन ऑफिसर की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारी डेमोक्रेसी की जमीनी हकीकत और सिस्टम पर एक तीखा सटायर भी है. यह फिल्म नक्सल प्रभावित इलाकों में आदिवासियों की नासमझी, एडमिनिस्ट्रेटिव लाचारी और सिर्फ कागजों पर मौजूद डेमोक्रेटिक प्रोसेस की कड़वी सच्चाई को दिल को छू लेने वाली और बारीकी से दिखाती है.
फिल्म की रिलीज के दिन इसे 90वें एकेडमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर 2018) में बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म कैटेगरी के लिए इंडिया की ऑफिशियल एंट्री के तौर पर चुना गया था. हालांकि यह फाइनल ऑस्कर नॉमिनेशन तक नहीं पहुंच पाई, लेकिन इस इंटरनेशनल पहचान ने फिल्म की रेप्युटेशन और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन को काफी बढ़ा दिया.
65वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में ‘न्यूटन’ को ‘बेस्ट हिंदी फिल्म’ का अवॉर्ड मिला. पंकज त्रिपाठी को उनकी शानदार और बैलेंस्ड परफॉर्मेंस के लिए नेशनल अवॉर्ड्स में ‘स्पेशल मेंशन’ भी मिला. फिल्म ने बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल समेत कई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में भी अवॉर्ड जीते.
22 सितंबर 2017 को रिलीज हुई ‘न्यूटन’ हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर है. बिना किसी मेलोड्रामा के एक जबरदस्त कहानी, बेहतरीन एक्टिंग और एक शानदार क्लाइमैक्स, जिसने दर्शकों को 106 मिनट तक बांधे रखा, इसे एक कल्ट क्लासिक बनाता है. यह फिल्म हर सिनेमा लवर के लिए जरूर देखने लायक है.