Home Box Office44 साल पुराना देहाती गाना जिसके संगीतकार बचपन से थे नेत्रहीन, बिना स्टार्स फिल्म ने तोड़े बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड, जसपाल, हेमलता, चंद्राणी की एवरग्रीन आवाज | 44 year old song by Ravindra Jain blind since childhood no big stars shattered box office records evergreen voices of Jaspal Hemlata Chandrani

44 साल पुराना देहाती गाना जिसके संगीतकार बचपन से थे नेत्रहीन, बिना स्टार्स फिल्म ने तोड़े बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड, जसपाल, हेमलता, चंद्राणी की एवरग्रीन आवाज | 44 year old song by Ravindra Jain blind since childhood no big stars shattered box office records evergreen voices of Jaspal Hemlata Chandrani

by BollywoodNewsAndMovie


नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा की कुछ फिल्में अपने बड़े सितारों की वजह से याद की जाती हैं और कुछ अपनी कहानी, मिट्टी की खुशबू और संगीत की वजह से. 1982 में आई ‘नदिया के पार’ ऐसी ही फिल्म थी. न अमिताभ बच्चन, न धर्मेंद्र, न राजेश खन्ना और न ही हेमा मालिनी या श्रीदेवा, ना ही कोई बड़ा स्टार, इसके बावजूद फिल्म ने दर्शकों के दिल में ऐसी जगह बनाई कि आज 44 साल बाद भी इसके गाने सुने जाते हैं. इन्हीं गीतों में एक है ‘जोगी जी धीरे-धीरे.’ होली के रंग, गांव की बोली और देसी मस्ती से भरा यह गीत आज भी पुराने हिंदी फिल्म संगीत के चाहने वालों के बीच खास पहचान रखता है. इस गाने को जसपाल सिंह, हेमलता, चंद्राणी मुखर्जी और सुशील कुमार ने आवाज दी थी, जबकि इसके बोल और संगीत दोनों रविंद्र जैन ने तैयार किए थे.

जन्म से नेत्रहीन थे रविंद्र जैन, लेकिन संगीत उनकी आंखें बना

नदिया के पार की सबसे दिलचस्प कहानी उसके संगीतकार रविंद्र जैन से जुड़ी है. रविंद्र जैन का जन्म 28 फरवरी 1944 को अलीगढ़ में हुआ था और वह जन्म से ही दृष्टिहीन थे. बचपन से ही उनका झुकाव संगीत की ओर था. चार साल की उम्र में उन्होंने घर पर संगीत सीखना शुरू कर दिया था. आगे चलकर उन्होंने संगीत की शिक्षा ली और मुंबई पहुंचकर फिल्म संगीत में अपनी पहचान बनाई.

यह भी पढ़ें: दो सुपरस्टार, 50 करोड़ बजट, थिएटर्स में दर्शकों के लिए तरसी फिल्म, OTT पर मारामारी, एक साथ 6 ओटीटी प्लेटफॉर्म पर होगी रिलीज

रविंद्र जैन ने यह साबित किया कि संगीत के लिए आंखों से ज्यादा जरूरी सुनने और महसूस करने की क्षमता है. ‘नदिया के पार’ में भी उन्होंने ऐसी धुनें बनाईं, जिनमें बड़े ऑर्केस्ट्रा या चमक\ दमक के बजाय गांव की सादगी खनकती है.

‘जोगी जी धीरे-धीरे’ में गांव की होली

ये फिल्म के सबसे लोकप्रिय गीतों में शामिल है. इसकी खासियत इसकी देसी भाषा  है. गीत में जसपाल सिंह, हेमलता, चंद्राणी मुखर्जी और सुशील कुमार की आवाजें मिलकर ऐसा माहौल बनाती हैं, जो सीधे उत्तर भारत के गांवों की होली की याद दिलाता है. यह गाना आठ मिनट 14 सेकंड लंबा है.

इसी फिल्म के दूसरे गाने ‘कौन दिशा में लेके चला रे बतोहिया’, ‘सांची कहे तोरे आवन से’, ‘जब तक पूरे ना हो फेरे सात’ और ‘गुंजा रे चंदन’ भी खूब लोकप्रिय हुए. फिल्म का संगीत सिर्फ एक गाने नहीं, बल्कि पूरे एलबम की वजह से यादगार बना.

नदिया के पार में सचिन पिलगांवकर ने चंदन और साधना सिंह ने गुंजा का किरदार निभाया था. फिल्म में इंदर ठाकुर, मिताली, लीला मिश्रा, साविता बजाज, राम मोहन और शील शर्मा भी नजर आए थे. फिल्म का निर्देशन गोविंद मूनीस ने किया और निर्माता ताराचंद बड़जात्या थे.

18 लाख में बनी फिल्म, और रीमेक

फिल्म का सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा इसका बजट और बॉक्स ऑफिस है. फिल्म को लगभग 18 लाख रुपये के बजट में बनाया गया था और इसने लगभग 5.4 करोड़ रुपये का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन किया था. फिल्म 1982 की सफल फिल्मों में शामिल रही.

‘नदिया के पार’ की कहानी लेखक केशव प्रसाद मिश्र के उपन्यास ‘कोहबर की शर्त’ पर आधारित थी. फिल्म की शूटिंग उत्तर प्रदेश के गांवों में की गई. राजश्री प्रोडक्शंस ने बाद में इसी कहानी को बड़े पैमाने पर ‘हम आपके हैं कौन..!’ के रूप में पेश किया. सलमान खान और माधुरी दीक्षित की यह फिल्म 1994 में आई और हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी सफल फिल्मों में शामिल हुई. लेकिन हिंदी सिनेमा में नदिया के पार की जगह कोई नहीं ले सकता.




Source link

You may also like

Leave a Comment