Home ViralSupaul ICDS Office Controversy | Viral Video DM Probe Investigation

Supaul ICDS Office Controversy | Viral Video DM Probe Investigation

by BollywoodNewsAndMovie


सुपौल के छातापुर प्रखंड स्थित बाल विकास परियोजना (ICDS) कार्यालय से जुड़े कथित वसूली प्रकरण में वायरल वीडियो ने नया सवाल खड़ा कर दिया है।

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सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के एक हिस्से में एक व्यक्ति सरकारी फाइलों और दस्तावेजों के साथ कार्यालय के अंदर काम करता नजर आ रहा है।

वीडियो में वह फाइलों पर हस्ताक्षर करने और कार्यालय की मोहर लगाने जैसी गतिविधियां करता दिखाई दे रहा है।

वीडियो में दिख रहे व्यक्ति को LS ने अपना पति बताया

वायरल वीडियो में टी-शर्ट और चश्मा पहने नजर आ रहे व्यक्ति को संबंधित पक्षों और स्थानीय लोगों ने लेडी सुपरवाइजर (LS) नीलम कुमारी का पति ब्रह्मदेव रजक बताया है।

हालांकि वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधियों की वास्तविक प्रकृति और उसमें इस्तेमाल दस्तावेजों की आधिकारिक स्थिति की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

सरकारी कार्यालय में गैर-सरकारी व्यक्ति की भूमिका पर सवाल

वीडियो सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल सरकारी कार्यालय में गैर-सरकारी व्यक्ति की भूमिका को लेकर उठ रहा है। क्या किसी सरकारी कर्मी का परिजन कार्यालय में बैठकर विभागीय फाइलों और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर या मोहर लगा सकता है?

अगर ऐसा हुआ है तो इसकी अनुमति किस स्तर से थी और ऐसे दस्तावेजों की वैधता क्या होगी, यह जांच का अहम बिंदु बन गया है।

LS बोलीं- तबीयत खराब थी, पति कर रहे थे सहयोग

मामले में LS नीलम कुमारी ने वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान अपने पति ब्रह्मदेव रजक के रूप में की है। उनका कहना है कि उस समय उनकी तबीयत खराब थी और इसी वजह से उनके पति कार्यालय में कुछ काम में सहयोग कर रहे थे।

हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पति का इस तरह कार्यालयी कार्यों में शामिल होना गलती थी और ऐसा नहीं होना चाहिए था। LS ने कहा कि जांच में पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ जाएगी।

DM के निर्देश पर जांच, रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई

छातापुर की प्रभारी CDPO रंजना कुमारी ने बताया कि वायरल वीडियो और उससे जुड़े आरोपों की जांच जिलाधिकारी के निर्देश पर कराई जा रही है। वीडियो में दिखाई दे रहे सभी पहलुओं के साथ संबंधित गतिविधियों और दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पहले ₹2600 मासिक वसूली का लगा था आरोप

गौरतलब है कि इसी वायरल वीडियो को लेकर पहले एक आंगनबाड़ी सेविका ने THR वितरण और अन्य विभागीय कार्यों के नाम पर प्रत्येक केंद्र से कथित तौर पर प्रतिमाह ₹2600 की मांग किए जाने का आरोप लगाया था।

हालांकि इस मामले में अलग-अलग पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं और संबंधित अधिकारियों ने आरोपों से इनकार किया है।

जिलाधिकारी के निर्देश पर चल रही जांच

अब उसी प्रकरण के वायरल वीडियो के दूसरे हिस्से में LS के पति को सरकारी फाइलों पर हस्ताक्षर और कार्यालय की मोहर लगाते दिखाए जाने से मामला और गंभीर सवालों से जुड़ गया है।

फिलहाल वीडियो की सत्यता, उसमें दिखाई दे रही गतिविधियों और ब्रह्मदेव रजक की वास्तविक भूमिका की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

जिलाधिकारी के निर्देश पर चल रही जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि सरकारी कार्यालय में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं।



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