शहर के कुख्यात पीक आवर ट्रैफिक ने एक बार फिर अपनी भयानकता का परिचय दिया। सिल्पा नाम की एक महिला ने इंस्टाग्राम पर अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि भारी बारिश और व्यस्त यातायात के बीच इलेक्ट्रॉनिक सिटी से कृष्णराजपुरम रेलवे स्टेशन तक सिर्फ 19 किलोमीटर की दूरी तय करने में उन्हें तीन घंटे से अधिक समय लग गया। उन्होंने कहा, “बेंगलुरु में रोजाना लंबी दूरी का सफर करने वाले लोगों के लिए मुझे बहुत सम्मान है।”
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @heyitsilpa_ नामक हैंडल से शेयर किया गया है। सिल्पा ने बताया कि उनको शाम 7 बजे की ट्रेन पकड़नी थी। वे करीब 5 बजे घर से निकलीं। ट्रेन पहले से ही दो घंटे लेट चल रही थी, लेकिन लगातार बारिश ने ट्रैफिक को और बिगाड़ दिया। उन्होंने बताया, “मेरी बदकिस्मती, कल बेंगलुरु में मूसलाधार बारिश हो रही थी, इसलिए ट्रैफिक और भी खराब हो गया। इलेक्ट्रॉनिक सिटी से कृष्णराजपुरम स्टेशन तक ठीक 19 किलोमीटर की दूरी में हमें तीन घंटे से ज्यादा समय लग गया।” एक समय ऐसा आया जब उन्होंने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी कि समय पर स्टेशन पहुंच पाएंगी। लेकिन ट्रेन भी अलग-अलग स्टेशनों पर रुकी हुई थी, इसलिए उन्होंने सफर जारी रखा। वे बताती हैं कि, “हम ट्रेन के साथ हेड-ऑन-हेड जैसे थे। जब हम स्टेशन पहुंचे और कैब से उतरे, तभी प्लेटफॉर्म नंबर दो पर ट्रेन की घोषणा हो रही थी।”
कैप्शन में लिखी ये बात
वे बोलीं कि, “हम सूटकेस लेकर सीढ़ियों पर ऊपर-नीचे ऐसे दौड़े जैसे जान बचाने के लिए भाग रहे हों।” लंबा वीकेंड होने के कारण केरल जाने का दूसरा टिकट मिलना मुश्किल था, इसलिए यह सफर उनके लिए जरूरी था। कैप्शन में उन्होंने लिखा, “19 किलोमीटर। 3 घंटे। एक ट्रेन पकड़नी है। और बीच में लगभग 17 भावनात्मक ब्रेकडाउन।” बाद में कमेंट्स में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका पोस्ट शहर पर हमला नहीं है। “सोशल मीडिया पर हर चीज हमला नहीं होती। कभी-कभी व्यक्ति सिर्फ अपना अनुभव साझा कर रहा होता है।”
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
वीडियो पर कई प्रतिक्रियाएं आईं। एक यूजर ने लिखा, “19 किलोमीटर में तीन घंटे अविश्वसनीय है।”
दूसरे ने कहा, “बेंगलुरु ट्रैफिक वाकई सब्र आजमाता है।”
कई लोगों ने इसे दर्दनाक रूप से रिलेटेबल बताया। बेंगलुरु में ट्रैफिक लंबे समय से बड़ी समस्या है। बारिश के मौसम में जलभराव और जाम स्थिति को और खराब कर देते हैं। छोटी दूरियां भी घंटों का सफर बन जाती हैं। सिल्पा का अनुभव उन हजारों कम्यूटर्स की आवाज है जो रोजाना इसी संघर्ष से गुजरते हैं। विशेषज्ञ बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट, मेट्रो विस्तार और सड़क सुधार की जरूरत पर जोर देते हैं।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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