सुबह पांच बजे रानी सराय के पेड़ों पर रोज की तरह चहल-पहल थी। तोते अपने ठिकानों से उड़े और दूरदराज की ओर चले गए। उन्हें क्या पता था कि शाम को लौटने पर उनका बरसों पुराना आशियाना ही नहीं मिलेगा।
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सोमवार को मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए इन पेड़ों की कटाई शुरू हो गई। दिन में परिसर के एक हिस्से को घेरकर कटर चलाए गए। कुछ ही मिनटों में हरे-भरे पेड़ तनों और शाखाओं समेत जमीन पर बिछ गए। शाम हुई तो रोज की तरह लौटे तोतों के सामने ठहरने का पुराना ठिकाना नहीं था। जिन डालियों पर हर शाम तोतों का शोर गूंजता था, वहां अब कटे तने और बिखरी शाखाएं थीं। आसमान में उड़ते पक्षियों के झुंड और नीचे जमीन पर पड़े पेड़ इस बदलाव की तस्वीर बता रहे थे।
अपने पुराने ठिकानों पर लौटे तोते देर तक इधर-उधर फड़फड़ाते रहे। वे कभी एक डाल पर जाते, कभी दूसरी पर। रात तक उनका एक डाल से दूसरी डाल पर आना-जाना जारी रहा। रानी सराय के बाकी पेड़ भी अब कुछ ही दिन के मेहमान हैं। मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए रानी सराय परिसर में जिन पेड़ों को काटा जाना है, उस हिस्से को सोमवार को पूरी तरह पैक कर दिया गया। तीन-चार अधिकारियों की मौजूदगी में कटाई भी शुरू हो गई।
160 पेड़ काटे जाने हैं…
रानी सराय परिसर के कुल 160 पेड़ काटे जाने हैं। इन पर तोते बरसों से बैठते आए हैं। पेड़ों की कटाई अफसरों और विशेषज्ञों की निगरानी में की जानी है। सोमवार को शुरुआत में 10-12 पेड़ काटे गए। मेट्रो प्रबंधन ने 160 पेड़ों और उन पर बैठने वाले पक्षियों की कीमत 10 करोड़ रु. आंकी है। यह राशि निगम को दी जा चुकी है। इनके बदले 8 से 10 फीट के पौधे लगाए जाएंगे। हाई कोर्ट ने पौधे लगाने के बाद उनकी गूगल इमेज लेने और देखभाल करने के निर्देश दिए हैं।
