चूहे और बिल्ली के खतरनाक खेल की कहानी
डायरेक्टर प्रियदर्शन एक बार फिर ऐसी कहानी लेकर आए हैं, जिसमें डर सिर्फ खून-खराबे या एक्शन से नहीं, बल्कि दिमागी खेल से पैदा होता है। हॉलीवुड की डॉन्ट ब्रीद, अ क्वाइट प्लेस और द इनविज़िबल मैन जैसी साइकोलॉजिकल थ्रिलर में जिस तरह सर्वाइवल, डर और अनदेखे खतरे को कहानी का हिस्सा बनाया गया है, ‘हैवान’ उसी स्पेस में अपनी एक अलग दुनिया तैयार करती है।
यहां एक तरफ परशुराम है, जो हर कदम सोच-समझकर चलता है, तो दूसरी तरफ श्याम है, जो देख नहीं सकता, लेकिन अपनी सुनने की क्षमता और तेज इंस्टिंक्ट्स से हर खतरे को महसूस करता है। दोनों के बीच शुरू होने वाला ये चूहे और बिल्ली वाला खेल सिर्फ ताकत की लड़ाई नहीं, बल्कि दिमाग और इंस्टिंक्ट का मुकाबला है।
यही चीज ‘हैवान’ को एक रिफ्रेशिंग साइकोलॉजिकल एक्शन थ्रिलर बनाती है, जहां हर मोड़ पर सस्पेंस बढ़ता है और लगातार सवाल बना रहता है कि आखिर इस खेल में शिकारी कौन है और शिकार कौन।
