अखिलेश यादव के साथ जमुई केस के आरोपी नंदन यादव तस्वीर एआई टूल की मदद से बनाई गई है। इसमें कोई सच्चाई नहीं है।
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसमें उनके साथ एक युवक को देखा जा सकता है। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स इस तस्वीर को शेयर करते हुए दावा कर रहे हैं कि यह युवक बिहार के जमुई केस का मुख्य आरोपी नंदन यादव है।
विश्वास न्यूज ने विस्तार से इसकी जांच की। यह फर्जी साबित हुई। जांच में पता चला कि एआई की मदद से यह तस्वीर वायरल करके झूठ फैलाया जा रहा है।
क्या है वायरल?
एक्स यूजर सूर्याभान सिंह राजपूत (@Suryabhan Singh Rajput) ने एक तस्वीर को अपने हैंडल पर शेयर किया। इसने इसे नंदन यादव की तस्वीर बताया।
इसे सच मानकर कई सोशल मीडिया यूजर्स शेयर कर रहे हैं। पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां देखें।
पड़ताल
विश्वास न्यूज ने सबसे पहले वायरल तस्वीर की सच्चाई जाननी चाही। इसलिए इसे गूगल लेंस टूल के जरिए सर्च किया। यह तस्वीर हमें कहीं नहीं मिली। यदि अखिलेश यादव की नंदन यादव के साथ कोई तस्वीर वायरल होती तो वह खबरों में जरूर आती। ऐसे में हमें इस तस्वीर के एआई जनरेटेड होने का शक हुआ।
इसके बाद हमने वायरल तस्वीर को एआई डिटेक्शन टूल्स की मदद से चेक करना शुरू किया। सबसे पहले हमने ‘HiveModeration’ टूल का इस्तेमाल किया। इस टूल ने वायरल तस्वीर के लिए 95.7 फीसदी संभावना इस बात की जताई कि इसे एआई से बनाया गया है।

इसी तरह तस्वीर को ‘साइट इंजन’ टूल की मदद से भी चेक किया गया। इसके एनालिसिस में इस वायरल तस्वीर के एआई से बने होने के करीब 99% संकेत मिले।

हमने तस्वीर को एआई डिटेक्टर टूल ‘ट्रूथ स्कैन’ से भी चेक किया, तो इसे 99 फीसदी से अधिक एआई संभावित बताया गया।

विश्वास न्यूज ने अधिक जानकारी के लिए वायरल तस्वीर को एआई एक्सपर्ट डॉ अजहर माचवे के साथ शेयर किया। उन्होंने इसे फेक बताया। उन्होंने बताया कि तस्वीर को यदि ध्यान से देखें तो दोनों शख्स का चेहरा चिपकाया हुआ लग रहा है। इसके अलावा युवक के कंधे पर अखिलेश यादव की केवल चार अंगुलियां दिख रही हैं। एआई से बनाई गईं तस्वीरों में यह सामान्य विसंगति होती है।
जागरण डॉट कॉम की 22 सितंबर की खबर के अनुसार, बिहार के जमुई जिले में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ मामले में पुलिस ने नंदन यादव समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। मुख्य आरोपित नंदन यादव और उसका साथी बालिग हैं। दोनों पेशे से ट्रैक्टर चालक हैं।
क्या है संदर्भ?
बीबीसी हिंदी की 24 सितंबर 2026 की एक खबर के अनुसार, 19 सितंबर की शाम 6.25 बजे छात्रा अपने एक दोस्त के साथ स्कूटी पर घूमने निकली थी। तकरीबन 20 मिनट बाद जब लड़की और उसका दोस्त मड़वा पहाड़ पर फोटो खींच रहे थे, तभी सात-आठ की संख्या में स्थानीय युवक आए और उन्होंने लड़की के साथ यौन हिंसा की।
बीबीसी की खबर में आगे बताया गया कि 21 सितंबर की देर रात सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कुछ युवक लड़की से हिंसा करते हुए दिख रहे थे। पुलिस ने इस मामले में 21 सितंबर को तीन नाबालिग लड़कों को गिरफ्तार किया था, जबकि दो मुख्य अभियुक्तों, हरेराम यादव और नंदन यादव की गिरफ्तारी 22 सितंबर को एनकाउंटर के बाद हुई थी। इसमें नंदन को गोली लगी थी।
‘दैनिक जागरण’ की 24 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, “पुलिस जांच में हरेराम का शराब तस्करी और अवैध बालू खनन का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है, जिसके बाद उसे पॉक्सो कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया।”
जांच के अंत में फेक फोटो शेयर करने वाले एक्स यूजर की जांच की गई। इस यूजर को एक्स पर नौ सौ से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। यह अकाउंट फरवरी 2022 में बनाया गया था।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज की जांच में वायरल तस्वीर फेक साबित हुई। अखिलेश यादव के साथ जमुई केस के आरोपी नंदन यादव तस्वीर एआई टूल की मदद से बनाई गई है। इसमें कोई सच्चाई नहीं है।

- Claim Review : अखिलेश यादव के साथ जमुई केस के आरोपी नंदन यादव की तस्वीर।
- Claimed By : X user Suryabhan Singh Rajput
- Fact Check : झूठ
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