Abhijeet Dipke Viral Resignation Letter: Claims To Be MP CM in Balaghat


भोपाल2 दिन पहले

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CJP के फाउंडर दिपके बालाघाट के गांवों में लोगों से मिले, जहां बीते दो महीने में 30 से ज्यादा बच्चों की मौतें हुई हैं।

मध्य प्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौतों के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की बयानबाजी जारी है। CJP के फाउंडर अभिजीत दिपके ने प्रभावित गांवों का दौरा करने के बाद सोशल मीडिया पर एक लेटर पोस्ट किया है। इसमें उन्होंने खुद को एमपी का मुख्यमंत्री बताया है और लिखा है कि मैं अपने इस पद से इस्तीफा देता हूं।

राज्यपाल मंगूभाई पटेल को संबोधित यह पत्र 13 अगस्त 2026 को लिखा गया है। अभिजीत दिपके नाम के एक्स अकाउंट से भी मुख्यमंत्री पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देने की पोस्ट की गई है।

प्रधानमंत्री मोदी को भी टैग किया

X पर अंग्रेजी में लिखी पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए दिपके ने कहा- मैं तत्काल प्रभाव से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देता हूं। मैं माननीय प्रधानमंत्री @narendramodi जी का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने मुझे MP की जनता की सेवा करने का मौका दिया। एक ऐसा मौका, जिसमें मैं साफ तौर पर नाकाम रहा हूं।

CJP फाउंडर अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर यह पोस्ट की।

बालाघाट में 30 से ज्यादा बच्चों की मौत का संदर्भ दिया

दिपके ने पत्र में लिखा है- बालाघाट में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत के बाद उनका विवेक उन्हें इस पद पर बने रहने की अनुमति नहीं देता।

मुख्यमंत्री के रूप में वे इन बच्चों को समय पर जरूरी चिकित्सा देखभाल और सहायता उपलब्ध कराने में विफल रहे। इनमें से कई बच्चों की जान बचाई जा सकती थी और इस विफलता की जिम्मेदारी से वे बच नहीं सकते।

मंत्री या विधायक के बच्चे होते तो 4 लाख पर्याप्त मानते?

दिपके ने मुआवजे को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाया। उन्होंने पत्र में लिखा है कि पहले प्रत्येक बच्चे के लिए केवल 2 लाख रुपए मुआवजे की घोषणा की गई, आदिवासी समुदाय के विरोध के बाद इसे बढ़ाकर 4 लाख रुपए किया गया।

यदि ये बच्चे मंत्रियों या विधायकों के होते तो क्या 4 लाख रुपए का मुआवजा पर्याप्त माना जाता? सरकार की प्रतिक्रिया से आदिवासी बच्चों के जीवन को दिए गए महत्व का पता चलता है।

पीने के पानी और स्कूलों की हालत पर भी सवाल उठाया

दिपके ने अपने लेटर में पेयजल और स्कूल व्यवस्था का भी जिक्र किया है। लिखा है- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘हर घर नल योजना’ को सफल घोषित किए जाने के बावजूद बालाघाट के कुछ हिस्सों में आदिवासी परिवार अभी भी पीने के लिए नदी के पानी पर निर्भर हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर खतरा बना हुआ है।

कई गांवों में स्कूलों की स्थिति पशु आश्रयों से भी बदतर है। आंगनबाड़ी से कक्षा 5 तक के करीब 75 बच्चे एक ही कमरे में पढ़ते हैं। स्थानीय आदिवासी समुदाय की ओर से बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद उनके लिए उचित स्कूल भवन उपलब्ध नहीं कराया गया।

21 साल से भाजपा सरकार, बुनियादी सुविधाएं भी नहीं

पत्र में कहा गया है- मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकारों के करीब 21 वर्ष पूरे होने के बाद भी आदिवासी परिवारों को पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।

मध्य प्रदेश में 55,795 आदिवासी परिवार अब भी बिजली के बिना हैं। NCRB के आंकड़ों के अनुसार, भारत में अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ होने वाले अपराधों में से 32 प्रतिशत मामले मध्य प्रदेश में दर्ज हुए। राज्य में 5.41 लाख से अधिक बच्चे (8.60 प्रतिशत) कम वजन वाले वर्ग में हैं।

बालाघाट के 5 गांवों में लोगों से मिले दिपके

दरअसल, CJP के फाउंडर अभिजीत दिपके शनिवार को बालाघाट पहुंचे थे। यहां वे कुंडेकसा, बोंदारी, कोरका, कोडबीरकोना और घाघाटोला गांव में लोगों से मिले, जहां बीते दो महीने में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौतें हुई हैं।

दिपके ने स्वास्थ्य सुविधाओं और बच्चों की मौत के कारणों की जानकारी जुटाते हुए प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग की।

सवालों पर नहीं दे सके जवाब, गाड़ी आगे बढ़ाई

इस दौरान एक सोशल मीडिया जर्नलिस्ट ने दिपके पर बच्चों की मौत जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उनसे पूछा कि घटना के इतने दिन बाद वे अब क्यों पहुंचे हैं? क्या उनका दौरा राजनीतिक फायदे के लिए है? लेडी जर्नलिस्ट ने पूछा- अब सुध मिली है आपको? मिल गया कंटेट?

इस पर दिपके ने कहा- मैं माफी चाहता हूं, पहले नहीं आ पाया। एक और जर्नलिस्ट के सवाल पर उन्होंने अच्छा-अच्छा कहते हुए गाड़ी आगे बढ़ा दी।

बालाघाट में दिपके, सोशल मीडिया जर्नलिस्ट के सवालों पर असहज नजर आए।

भाजपा विधायक बोले- उन्हें दिमाग का इलाज कराना चाहिए

दिपके के ट्वीट पर भोपाल की दक्षिण-पश्चिम विधानसभा सीट से भाजपा विधायक भगवान दास सबनानी ने कहा- उन्हें अपने दिमाग का इलाज कराना चाहिए। मध्य प्रदेश में मोहन यादव जी की सरकार बहुत दृढ़ता के साथ आपराधिक मामलों में कड़ी कार्रवाई करती है। चाहे वह सागर हो या बालाघाट हो। दिपके जी को यह विचार करना चाहिए कि वह किसी सदन के सदस्य नहीं है और मध्य प्रदेश कोई मखौल का स्थान नहीं है, जहां पर इस तरीके का कृत्य बर्दाश्त किया जाए।

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अभिजीत दिपके बोले- सरकार आदिवासी बच्चों की मौत की जिम्मेदार

कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके शनिवार को बालाघाट पहुंचे। वे उन गांवों के लोगों से मिले, जहां बीते महीनों में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौतें हुई हैं। दिपके ने कहा कि आदिवासी बच्चे जिस तरह से लगातार बीमार हो रहे हैं, उससे साफ है कि उनकी बहुत अनदेखी हुई है। उन्हें बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। पढ़ें पूरी खबर…

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