बलरामपुर में क्लास में बैठी एक बच्ची बेंच पर अचानक बेहोश हो गई। अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया। स्कूलवालों ने बताया कि बच्ची जब बेहोश हुई, तब गणेश विसर्जन का जुलूस निकल रहा था। उसका डीजे इतना तेज था कि खिड़कियों के शीशे तक हिल रहे थे। आशंका जत
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सवाल है कि तेज आवाज से ऐसा क्या असर होता है कि इंसान की मौत तक हो सकती है? आवाज का असर क्लास की सिर्फ एक ही बच्ची पर क्यों हुआ? पढ़िए, आज के यूपी एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: DJ की तेज आवाज का असर क्या हमारे दिल पर होता है, जिससे हार्ट अटैक हो सकता है?
जवाब: सीधे कहें तो, डीजे या साउंड सिस्टम की तेज आवाज हमारे दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर को अचानक बढ़ा सकती है। तेज आवाज से शरीर में उठने वाला तेज कंपन और मानसिक तनाव कुछ ही मिनटों में हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट (धड़कन अचानक बंद होना) की वजह बन सकता है। गोरखपुर एम्स के हार्ड स्पेशलिस्ट डॉ. आशुतोष प्रसाद त्रिपाठी इसे ऐसे समझाते हैं…
A. स्ट्रेस हार्मोन अचानक बढ़ जाता है
- जब अचानक बहुत तेज आवाज (जैसे डीजे का बेस या धमाका) कान के पर्दों से टकराती है, तो दिमाग इसे खतरे की तरह लेता है। इससे शरीर में एड्रिनेलिन और कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन अचानक बहुत बढ़ जाते हैं।
- इससे खून की नसें तुरंत सिकुड़ जाती हैं। नतीजतन ब्लड प्रेशर और धड़कन अचानक बहुत तेज हो जाती है। इससे दिल पर काफी दबाव पड़ता है।
B. धड़कनें अनियंत्रित होती हैं
- डीजे के हैवी बेस से निकलने वाली लो-फ्रीक्वेंसी तरंगें हमारे शरीर और छाती में तेज कंपन पैदा करती हैं। यह कंपन दिल के प्राकृतिक इलेक्ट्रिकल सिस्टम (नैचुरल पेसमेकर) को बाधित कर सकता है।
- इससे धड़कन अचानक असामान्य रूप से तेज या अनियमित हो जाती है, जिसे मेडिकल भाषा में ‘अरिदमिया’ कहते हैं।
- धड़कन पूरी तरह अनियंत्रित होने पर दिल अचानक काम करना बंद कर सकता है। इसे ‘सडन कार्डियक अरेस्ट’ कहा जाता है। मौके पर ही मौत हो सकती है।
C. साइलेंट हार्ट ब्लॉकेज भी एक वजह
- कई लोगों की नसें, जो दिल से साफ खून अन्य अंगों तक पहुंचाती हैं (धमनी), उनमें पहले से ही हल्का ब्लॉकेज होता है। इसका उन्हें खुद पता नहीं होता, इसे ‘साइलेंट ब्लॉकेज’ कहते हैं।
- तेज आवाज से BP अचानक बढ़ने की वजह से धमनियों में जमा फैट टूट सकता है। इससे तुरंत वहां खून का थक्का बन जाता है, जो दिल तक खून की सप्लाई रोक देता है। यही स्थिति हार्ट अटैक कहलाती है।
D. दिल के मरीजों को ज्यादा खतरा
- जिन लोगों को पहले से हाई ब्लड प्रेशर या दिल से जुड़ी कोई बीमारी है, उनका शरीर तेज आवाज बर्दाश्त नहीं कर पाता। भीड़भाड़, गर्मी और डीजे के शोर के बीच ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। यही दिल के दौरे का कारण बनती है।
CCTV फुटेज में साफ दिख रहा है कि बच्ची को बेचैनी महसूस हो रही थी और कुछ ही देर बाद वह बेहोश हो गई।
सवाल-2: क्या बलरामपुर में भी बच्ची की मौत तेज आवाज से हुई? अन्य बच्चों पर इसका असर क्यों नहीं हुआ?
जवाब: बलरामपुर पुलिस के मुताबिक, घटना 21 सितंबर (सोमवार) की है। घरवालों या स्कूल प्रबंधन ने पुलिस को इसकी जानकारी नहीं दी थी। वीडियो वायरल होने पर 22 सितंबर को मामला सामने आया। तब तक बच्ची का अंतिम संस्कार कराया जा चुका था। पोस्टमॉर्टम नहीं होने की वजह से मौत का सटीक कारण साफ नहीं है।
- हालांकि, CCTV फुटेज के आधार पर बलरामपुर जिला अस्पताल के डॉ. गिरिधर चौहान बताते हैं कि छोटे बच्चों के कान अंदरूनी हिस्सा (नर्वस सिस्टम) बेहद संवेदनशील होता है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि बच्ची बेचैनी महसूस कर रही थी। उसे तीन बार झटके जैसे भी महसूस हुए।
- वे कहते हैं- स्कूलवाले बता रहे थे, डीजे की आवाज इतनी ज्यादा थी कि स्कूल की खिड़कियों के शीशे तक कांप रहे थे। इससे लगाता है कि तेज आवाज की वजह से बच्ची के शरीर में एड्रिनेलिन हार्मोन तेजी से बढ़ा और बच्ची को सडन कार्डियक अरेस्ट या हार्ट अटैक आ गया।
- अन्य बच्चों पर असर के बारे में गोरखपुर एम्स के हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. आशुतोष प्रसाद त्रिपाठी कहते हैं कि हर शरीर की क्षमता अलग होती है। कई बार छोटे बच्चों में जन्म से ही दिल की बीमारी होती है। सामान्य दिनों में यह पता नहीं चल पाती। ऐसे में जब बच्चे का सामना अचानक तेज आवाज या हैवी वाइब्रेशन से होता है, तो यह कार्डिएक अरेस्ट (अचानक दिल की धड़करन रुकना) की वजह बन जाती है।
सवाल-3: यूपी में DJ या साउंड सिस्टम को लेकर क्या कानून है? क्या बलरामपुर में नियमों का पालन नहीं हुआ?
जवाब: यूपी में डीजे और लाउडस्पीकर के रेग्युलेशन के लिए ध्वनि प्रदूषण (नियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत नियम लागू हैं। इसके मुताबिक…
- किसी भी सार्वजनिक या धार्मिक स्थल पर बिना प्रशासन की लिखित अनुमति डीजे या लाउडस्पीकर नहीं बजाया जा सकता। जुलूसों में डीजे की अधिकतम ऊंचाई 12 फीट और चौड़ाई 10 फीट से ज्यादा नहीं हो सकती।
- इसके अलावा रात 10 से सुबह 6 बजे तक खुले आसमान के नीचे डीजे, लाउडस्पीकर या किसी भी प्रकार के एम्पलीफायर का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है। केवल बंद ऑडिटोरियम या हॉल के अंदर ही इसकी इजाजत होती है।
- दरअसल, पुलिस-प्रशासन के अधिकारी हर जुलूस के साथ मौजूद नहीं रह पाते। आयोजक इसी का फायदा उठाते हैं। वे तय डेसिबल से कहीं ज्यादा तेज आवाज में (अक्सर 100-110 DB से ऊपर) हैवी बेस वाले डीजे का इस्तेमाल करते हैं।
- ऐसे में बलरामपुर पुलिस जांच कर रही है कि जुलूस निकालने के दौरान इन नियमों का पालन हुआ था या नहीं। जुलूस के तौर इस्तेमाल हुए डीजे की भी जांच हो रही है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 5 साल की जेल, 1 लाख रुपए जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
सवाल-4: किसी जगह पर कितना शोर है, यह कैसे पता चल सकता है?
जवाब: यह जानने के लिए टेक्नोलॉजी की मदद ली जा सकती है। आजकल कई मोबाइल एप्लिकेशन हैं, जिससे किसी जगह पर आवाज की तीव्रता मापी जा सकती है। एप्पल ऐप स्टोर या गूगल प्ले स्टोर से Decibel X, SPL Meter और Sound Meter & Noise Detector जैसे ऐप डाउनलोड कर सकते हैं।
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