डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के बाद अब मक्खी जनता पार्टी (एमजेपी) सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। एक बार फिर चीफ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी ने इस संगठन को जन्म दिया, जो सोशल मीडिया परतेजी से मशहूर हो रहा है।
MJP के 72 घंटे में 3.3 लाख फॉलोअर्स
संगठन ने मंगलवार को दावा किया कि महज 72 घंटों में उसके इंस्टाग्राम पेज को 40 लाख से अधिक व्यूज और 3.3 लाख फॉलोअर्स मिल चुके हैं। पेज पर आर्यन नाम के एक छात्र को संस्थापक बताया गया है।
एक स्टोरी में प्रवक्ता की तलाश भी दिखाई गई। यह अकाउंट जून 2021 में बना था और वर्तमान यूजरनेम अपनाने से पहले कई बार बदला गया था।

CJI की टिप्पणी के बाद बनी पार्टी
एमजेपी के पोस्ट से साफ है कि इसका नाम 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई से जुड़ा है। उस दिन बेंच दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह बंद करने पर सवाल उठा रहा था।
जजों ने कहा कि सुरक्षा के लिए नियंत्रण ठीक हो सकता है, लेकिन पूरा सिस्टम रोक देना सही नहीं। उन्होंने कहा कि ‘मक्खी मारने के लिए हथौड़ा नहीं चलाया जा सकता’। एमजेपी ने जवाब दिया कि जब चीफ जस्टिस खुद ऐसा कह रहे हैं तो मक्खी भी अपनी आवाज उठाएगी।
CJP के साथ तालमेल की कोशिश जारी
एमजेपी ने कॉकरोच जनता पार्टी के साथ तालमेल की कोशिश जारी रखी है। साथ ही ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की सदस्य नेहा बोरा का समर्थन जताया, जो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध कर रही हैं।
संगठन ने उनकी हिम्मत की सराहना करते हुए कहा कि सवाल उठाना लोकतंत्र की जरूरत है। उसने हाल के बिना अनुमति वाले प्रदर्शन को स्वीकार किया और नागरिकों से अधिकारों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की अपील की।

CJP को MJP का समर्थन
MJP के संस्थापक आर्यन के बयान में सीजेपी नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के बाद हिरासत पर आपत्ति जताई।
संगठन का कहना है कि जंतर-मंतर तय विरोध स्थल है और प्रदर्शनों को दूर रखने से असर कम होता है। लोकतंत्र को संवाद की जरूरत है, दूरी की नहीं।
बता दें, सीजेपी भी एक टिप्पणी पर मजाक के रूप में शुरू हुई थी, लेकिन परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ जुलाई में जंतर-मंतर प्रदर्शन और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तक पहुंच गई। अब एमजेपी भी इसी राह पर युवाओं की प्रतिक्रिया को जोड़ रहा है।
