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18 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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इन दिनों देशभर में गरबा और डांडिया की तैयारियां जोरों पर हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर ‘रेंट ए गरबा पार्टनर’ के नाम से कई पोस्ट वायरल हो रहे हैं। इनमें गरबा पार्टनर के साथ डांस, फोटो, रील्स और आउटिंग आदि का दावा किया जा रहा है। सिल्वर, गोल्ड और प्लैटिनम पैकेज के नाम से मिल रहे इन ऑफर्स की कीमत 1,000 से 6,000 रुपए तक है।
सुनने में यह दिलचस्प लग सकता है। लेकिन क्या वाकई ये ऑफर्स भरोसेमंद हैं? हाल ही में अहमदाबाद साइबर पुलिस ने ‘रेंट ए गरबा पार्टनर’ नाम से सोशल मीडिया पर आने वाली पोस्ट्स को लेकर लोगों को सतर्क किया है।
इसलिए आज ‘साइबर लिटरेसी’ में ‘रेंट ए गरबा पार्टनर’ के नाम पर होने वाले स्कैम के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- गरबा पार्टनर के नाम पर स्कैमर्स लोगों को किस तरह निशाना बना सकते हैं?
- ठगी से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतना जरूरी है?
एक्सपर्ट- राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस
सवाल- ‘रेंट ए गरबा पार्टनर’ क्या है? सोशल मीडिया पर यह ट्रेंड कैसे शुरू हुआ?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- ‘रेंट ए गरबा पार्टनर’ सोशल मीडिया पर वायरल एक ट्रेंड है।
- इसमें गरबा और डांडिया के लिए पार्टनर बुक करने की सुविधा देने का दावा किया जा रहा है।
ट्रेंड कैसे शुरू हुआ?
- पिछले दिनों गुजरात के एक इंस्टाग्राम यूजर ने अलग-अलग पैकेज के साथ एक पोस्ट शेयर किया।
- शुरुआत में इसे मजाक के तौर पर शेयर किया गया था। बाद में कई दूसरे अकाउंट्स ने भी इसी ट्रेंड को अपनाना शुरू कर दिया।
- इसके बाद अहमदाबाद पुलिस ने लोगों को चेतावनी दी कि ऐसे ऑफर्स की आड़ में साइबर ठगी हो सकती है।
सवाल- इन पोस्ट्स में लोगों को वास्तव में क्या ऑफर किया जा रहा है?
जवाब- इन पोस्ट्स में गरबा या डांडिया के लिए पार्टनर बुकिंग का दावा किया जा रहा है। इसके साथ कई तरह की सुविधाएं भी ऑफर की जा रही हैं। कुछ पोस्ट्स में इन्हें सिल्वर, गोल्ड और प्लेटिनम जैसे पैकेज में बांटा गया है। इनमें शामिल सुविधाएं हैं-
- पार्टनर के साथ डांस स्टेप सीखने की सुविधा।
- मैचिंग आउटफिट में गरबा खेलने का ऑफर।
- साथ में सेल्फी, फोटो और रील बनाने का ऑफर।
- साथ में फोटो खींचने और आउटिंग का ऑफर।
- कुछ पोस्ट्स में देर रात तक साथ रहने और घर छोड़ने जैसी बातें भी लिखी गई हैं।
सवाल- साइबर पुलिस इसे स्कैम क्यों कह रही है और लोगों को क्यों सावधान रहने को कहा जा रहा है?
जवाब- साइबर पुलिस के मुताबिक, इन वायरल पोस्ट्स के जरिए ठग लोगों को फर्जी ऑफर का झांसा देकर ठगी कर सकते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- गरबा पार्टनर के नाम पर स्कैमर्स लोगों को कैसे ठग सकते हैं?
जवाब- स्कैमर्स अलग-अलग तरीकों से लोगों को निशाना बना सकते हैं-
- बुकिंग के नाम पर एडवांस पेमेंट मांग सकते हैं।
- फर्जी UPI लिंक या QR कोड भेजकर पैसे ट्रांसफर करा सकते हैं।
- रिफंड या बुकिंग कन्फर्म करने के बहाने बैंकिंग डिटेल्स या OTP मांग सकते हैं।
- मालवेयर वाला लिंक या APK डाउनलोड करने के लिए भेज सकते हैं।
- वीडियो कॉल या फोटो के जरिए निजी जानकारी जुटाकर बाद में ब्लैकमेल कर सकते हैं।
- बातचीत के दौरान मिले मोबाइल नंबर, फोटो या अन्य निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।
सवाल- असली ऑफर और फ्रॉड ऑफर में फर्क कैसे पहचानें?
जवाब- असली ऑफर में आमतौर पर आयोजक, कंपनी या सर्विस प्रोवाइडर की जानकारी बिल्कुल स्पष्ट होती है। वहीं फ्रॉड ऑफर्स में जानकारी आधी–अधूरी होती है और जल्दबाजी में पैसे भेजने का दबाव बनाया जाता है। असली और फ्रॉड ऑफर में फर्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- ठगी से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतना जरूरी है?
जवाब- इसके लिए बुकिंग के दौरान कुछ बातों का खास ख्याल रखें। सभी जरूरी सावधानियां ग्राफिक में देखिए-

आइए अब इसे विस्तार से समझते हैं-
प्रोफाइल वेरिफाई करें
- प्रोफाइल फोटो, पोस्ट और दूसरे सोशल मीडिया अकाउंट की जांच करें।
- नए अकाउंट से सावधान रहें।
- सिर्फ पोस्ट, फॉलोअर्स या कमेंट देखकर सर्विस को असली न मानें।
- सर्विस देने वाले व्यक्ति या संस्था का नाम, पता और कॉन्टैक्ट डिटेल वेरिफाई करें।
लिंक और एप से सावधान रहें
- अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
- कोई भी APK या संदिग्ध एप डाउनलोड न करें।
- टिकट या पास हमेशा ऑफिशियल सोर्स से ही बुक करें।
पर्सनल डिटेल्स शेयर न करें
- OTP, UPI पिन, पासवर्ड और बैंक डिटेल कभी शेयर न करें।
- अपना पता, परिवार या ऑफिस की जानकारी न बताएं।
पैसे भेजने में जल्दबाजी न करें
- गरबा पास, कपल एंट्री या रजिस्ट्रेशन के नाम पर पैसे न भेजें।
- QR कोड या UPI से पेमेंट करने से पहले ऑफर की पुष्टि करें।
- एडवांस पेमेंट न करें।
फोटो-वीडियो न भेजें
- किसी ऑनलाइन संपर्क को निजी फोटो या वीडियो न भेजें।
- सामने वाले की पहचान और भरोसेमंद होने की पुष्टि किए बिना निजी कंटेंट साझा न करें।
मुलाकात में सावधानी रखें
- पहली मुलाकात सार्वजनिक जगह पर करें।
- परिवार या दोस्त को पहले से इसकी जानकारी दें।
- किसी अनजान व्यक्ति को अपना फोन, पर्स या जरूरी डॉक्यूमेंट्स न पकड़ाएं।
सवाल- क्या हर वेरिफाइड अकाउंट को भरोसेमंद मानना सही है?
जवाब- नहीं, हर वेरिफाइड अकाउंट सेफ नहीं होता। असल में अकाउंट का वेरीफाइड होना किसी ऑफर या सर्विस के सुरक्षित और असली होने की गारंटी नहीं है।
सवाल- क्या सिर्फ ज्यादा फॉलोअर्स होना भरोसे की गारंटी है?
जवाब- नहीं, फॉलोअर्स फर्जी या खरीदे हुए भी हो सकते हैं। इसलिए सर्विस लेने से पहले व्यक्ति या संस्था की पहचान और ऑफर की जानकारी अलग से वेरिफाई करें।

सवाल- क्या कमेंट्स और लाइक्स से किसी अकाउंट की ऑथेंटिसिटी पता चल सकती है?
जवाब- नहीं, इसे भरोसे का प्रमाण नहीं मानें। इन्हें फर्जी तरीके से भी बढ़ाया जा सकता है।
सवाल- वायरल पोस्ट देखकर लोग ज्यादा भरोसा क्यों करते हैं?
जवाब- ज्यादा व्यूज, लाइक्स, शेयर और कमेंट्स देखकर लोगों को लगता है कि पोस्ट भरोसेमंद है। इसे साइकोलॉजी में ‘सोशल प्रूफ’ कहा जाता है।
यानी जब बहुत सारे लोग किसी चीज में दिलचस्पी दिखाते नजर आते हैं, तो हमें भी वह सही या लोकप्रिय लगने लगती है। साइबर ठग इसी भरोसे का फायदा उठाते हैं।
सवाल- त्योहारों के समय स्कैमर्स ज्यादा एक्टिव होते हैं। गरबा स्कैम के अलावा इस समय और किस तरह के स्कैम हो सकते हैं?
जवाब- त्योहारों के दौरान साइबर अपराधी फर्जी शॉपिंग ऑफर, टिकट, डिलीवरी और पेमेंट के नाम पर ठगी कर सकते हैं। कुछ कॉमन स्कैम ग्राफिक में देखिए-

सवाल- अगर फ्रॉड हो गया है, पैसे भेज दिए हैं तो तुरंत क्या कदम उठाएं?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- सबसे पहले साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
- इसके बाद cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
- बैंक/UPI एप को अस्थाई रूप से ब्लॉक कराएं।
- ट्रांजैक्शन ID, स्क्रीनशॉट, फोन नंबर, चैट और लिंक जैसे सभी सबूत सुरक्षित रखें।
सवाल- नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत कैसे करें?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- cybercrime.gov.in पर जाएं।
- ‘रिपोर्ट साइबर क्राइम’ चुनें।
- मांगी गई जानकारी और सबूत अपलोड करें।
- शिकायत सबमिट करके ‘एकनॉलेजमेंट नंबर’ सुरक्षित रखें।
- इससे आप अपनी शिकायत ट्रेस कर सकते हैं।
सवाल- शिकायत करते समय कौन-कौन से स्क्रीनशॉट्स पास रखें?
जवाब- इस दौरान ये स्क्रीनशॉट जरूर सुरक्षित रखें-
- सोशल मीडिया पोस्ट/विज्ञापन।
- प्रोफाइल और यूजरनेम।
- चैट और बातचीत।
- फोन नंबर/वॉट्सएप प्रोफाइल।
- पेमेंट या UPI ट्रांजैक्शन।
- QR कोड या पेमेंट लिंक।
- ईमेल और SMS।
- फर्जी वेबसाइट या लिंक।
- ट्रांजैक्शन ID, तारीख और समय।
सवाल- अगर शिकायत करने में देरी हो तो इससे क्या फर्क पड़ सकता है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- ऐसे में ठग खाते से पैसे निकाल सकते हैं।
- रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर सकते हैं।
- डिजिटल सबूत मिटाने की कोशिश कर सकते हैं।
- जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होती है, उतनी ही जल्दी बैंक, पेमेंट प्लेटफॉर्म और जांच एजेंसियां कार्रवाई शुरू कर सकती हैं।
इसलिए साइबर ठगी का पता चलते ही तुरंत रिपोर्ट करना जरूरी है।
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